कर्नाटक के प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण का निर्णय विवादों में

कर्नाटक सरकार के प्राइवेट नौकरियों में आरक्षण के फैसले ने उत्पन्न किया विवाद

कर्नाटक की सरकार द्वारा निजी नौकरियों में स्थानीय लोगों के लिए आरक्षण लाने का प्रयास विरोध और विवाद का कारण बना है। इस कदम से सरकार की आलोचना हो रही है।

कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने स्थानीय लोगों को निजी (प्राइवेट) नौकरियों में आरक्षण देने के लिए पिछले दिनों State Employment of Local Candidates in the Industries, Factories & other Establishments Bill, 2024 टाइटल से एक बिल (विधेयक) लाया।

कर्नाटक सरकार को उम्मीद थी कि उसके इस कदम से स्थानीय लोग खूब तालियां पीटेंगे लेकिन हुआ इसका उल्टा।

कर्नाटक सरकार की खूब भद पिटी है, ऐसे उटपटांग कदम पर। इस विधेयक से साफ़ मंशा झलकती है कि यह एक लोकप्रिय कदम तो है जिसके जरिये राज्य सरकार तात्कालिक लाभ लेना चाहती है। अन्यथा इसमें दूरदर्शिता का सर्वथा अभाव है।

अतिश्योक्ति नहीं होगी, अगर कहें कि इस विधेयक से अलगाववाद की बू आती है।

बहरहाल, प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण लागू करने जैसा बेवकूफाना कदम उठाने के बाद बड़ा हल्ला मचा और भारत की 254 बिलियन डॉलर मूल्य की सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री की नुमाइंदगी करने वाली संस्था NASSCOM ने भी इस पर आपत्ति जताई। कहा किऐसा होने से कंपनियों को दूसरे राज्यों में पलायन के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

नैसकॉम और उसके सदस्यों ने कर्नाटक राज्य स्थानीय उद्योग कारखाना स्थापना रोजगार अधिनियम, 2024 के पारित होने के संबंध में निराशा जताई और गहरी चिंता व्यक्त की।

प्रौद्योगिकी क्षेत्र (Technology sector) कर्नाटक राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में 25 प्रतिशत का योगदान देता है, जिसमें देश की डिजिटल प्रतिभा का एक चौथाई, 11000 से अधिक स्टार्ट-अप और कुल Global Capability Centres का 30 प्रतिशत हिस्सा है।

बेंगलुरु को विश्व स्तर पर इंडिक्ट्स सिलिकॉन वॉली के रूप में जाना जाता है। प्रौद्योगिकी क्षेत्र ने राज्य के लिए उच्च विकास को सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक प्रति व्यक्ति आय है।

इस तरह के विधेयक को देखना बहुत परेशान करने वाला है जो न केवल उद्योग के विकास में बाधा डालेगा, नौकरियों और राज्य के लिए वैश्विक ब्रांड को प्रभावित करेगा। नैसकॉम के सदस्य इस विधेयक के प्रावधानों के बारे में गंभीरता से चिंतित हैं और राज्य सरकार से विधेयक को वापस लेने का आग्रह किया है।

विधेयक के प्रावधानों से इस प्रगति को उलटने, कंपनियों को चलाने और स्टार्टअप को रोकने का खतरा है, खासकर जब अधिक वैश्विक फर्म राज्य में निवेश करना चाह रही हैं।

आंध्र प्रदेश के मंत्री और मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के बेटे नरा लोकेश ने इस अवसर का लाभ उठा कर सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर कहा कि वह क्या क्या सुविधायें देंगे, अगर कंपनिया उनके प्रदेश में आएं। यह कोई छोटी मोटी बात नहीं है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू से आपके राजनीतिक अलगाव हो सकते हैं। लेकिन यह बात मानने में कोई शक नहीं कि हैदराबाद को आईटी हब, मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने में उनका बहुत बड़ा हाथ रहा है।

जिस ज़माने में उत्तर भारत के मुख्यमंत्री जाति पाति के झगड़ो में और खस्ता हाल आधारभूत संरचना से जूझ रहे थे, उस ज़माने में चंद्रबाबू नायडू अमेरिका जा कर बिल गेट्स और अन्य आईटी लीडर से मिला करते थे। उस ज़माने में नायडू ही थे जो विदेशी दौरे पर सरकारी अफसरों के बजाये पेशेवर को ले कर जाते थे और वहाँ की सरकारों और कॉरपोरेट के साथ उनकी मीटिंग हुआ करती थी।

खैर, बाद में आंध्र प्रदेश का विभाजन हुआ, तेलंगाना बना और हैदराबाद वहाँ की राजधानी बन गया। आंध्र प्रदेश अब फिर से शुरआत कर रहा है, अमरावती को बसाना है। वहीं उनके पास विशाखापत्तनम जैसा शहर भी है, जहाँ असीमित सम्भावनाएं हैं।

नायडू को फिर से 25-30 साल पहले जैसा काम करना पड़ेगा और कॉरपोरेट के लिए रेड कारपेट बिछाना पड़ेगा। यह कदम आगे चल कर लाखों लोगों के लिये नौकरी और आजीविका का इंतजाम करेंगे।

पिछले दिनों यही दृष्टिकोण उत्तर प्रदेश में भी दिखी थी, जब पंजाब से आये कारोबारियों से सी एम योगी आदित्यनाथ जी बार बार मिले, उन्हें बेहतर सुविधाएं और टैक्स बेनिफिट दिए, जिसके बाद सैंकड़ो कम्पनिया पंजाब से उत्तरप्रदेश शिफ्ट हो चुकी हैं। नतीजा देखिए, आज जीडीपी के मामले में उत्तर प्रदेश, देश के 28 राज्यों में दूसरे-तीसरे स्थान पर आ पहुंचा है।

इससे पहले देश का सबसे ज्यादा प्रगतिशील राज्य गुजरात ऐसे ही कई प्रोजेक्ट महाराष्ट्र से ले चुका है।

देश को आगे बढ़ाना है, करोड़ों लोगों को रोजगार देना है, तो ऐसी ही आक्रामक रणनीति सबको अपनानी पड़ेगी, सस्ती लोकप्रियता वाले कदमों से बचना होगा। फिलहाल, चौतरफा दबाव के बीच कर्नाटक सरकार की कैबिनेट इस विधेयक पर दोबारा विचार कर रही है। देखते हैं, बहुत जल्दी अंतिम फैसला आ जाएगा।

कर्नाटक सरकार के प्राइवेट नौकरियों में आरक्षण के फैसले ने उत्पन्न किया विवाद
कर्नाटक सरकार के प्राइवेट नौकरियों में आरक्षण के फैसले ने उत्पन्न किया विवाद

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