डीएफओ बोले- वन भूमि हस्तांतरण को मंजूरी, परिवेश पोर्टल पर आवेदन नहीं कर रहा निगम
जमशेदपुर। जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने गुरुवार को पूर्वी सिंहभूम वन प्रमंडल के डीएफओ से बातचीत कर मानगो क्षेत्र की लंबित सड़क एवं फ्लाईओवर परियोजनाओं की स्थिति की जानकारी ली।
डीएफओ ने उन्हें बताया कि पायल सिनेमा के सामने सड़क चौड़ीकरण के लिए वन विभाग भूमि हस्तांतरण को तैयार है, लेकिन मानगो नगर निगम ने अब तक परिवेश पोर्टल पर आवश्यक आवेदन जमा नहीं किया है।
डीएफओ के अनुसार, वन विभाग की ओर से मानगो नगर निगम को दो बार आवेदन करने के लिए स्मरण पत्र भेजा जा चुका है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में परियोजना में हो रही देरी के लिए मानगो नगर निगम जिम्मेदार है और इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
वन विभाग से मिल चुकी है मंजूरी
गौरतलब है कि बुधवार को केंद्रीय राज्यमंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा था कि वन भूमि हस्तांतरण होते ही एनएच-33 पर निर्माणाधीन ऊपरी पथ (फ्लाईओवर) का कार्य तेजी से आगे बढ़ेगा। इस पर डीएफओ ने विधायक को बताया कि संबंधित परियोजना को वन विभाग की स्वीकृति पहले ही मिल चुकी है और राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (वाइल्ड लाइफ बोर्ड) से भी अनुमति प्राप्त हो चुकी है।
सरयू राय ने कहा कि संभवतः केंद्रीय मंत्री को इसकी पूरी जानकारी नहीं थी, इसलिए उन्होंने सभा में वन भूमि हस्तांतरण को लेकर यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जब वन विभाग की मंजूरी मिल चुकी है, तो केंद्र और राज्य सरकार के संबंधित विभागों को आगे बढ़कर निर्माण कार्य शुरू कराने की पहल करनी चाहिए।
दो महत्वपूर्ण परियोजनाएं प्रभावित
सरयू राय ने कहा कि लंबे समय से यह धारणा बनाई जा रही थी कि वन विभाग से भूमि हस्तांतरण की अनुमति नहीं मिलने के कारण मानगो क्षेत्र की दो महत्वपूर्ण परियोजनाएं अटकी हुई हैं। इनमें पहली परियोजना मानगो चौक से पायल सिनेमा की ओर जाने वाले फ्लाईओवर रैम्प के अंतिम हिस्से का निर्माण है, जो वन भूमि के अभाव में पूरा नहीं हो पा रहा है। इसके कारण दुर्घटनाओं और रोजाना जाम की समस्या बनी रहती है।
दूसरी परियोजना पारडीह काली मंदिर से बालीगुमा तक एनएच-33 पर निर्माणाधीन ऊपरी पथ से जुड़ी है, जिसके बारे में केंद्रीय मंत्री ने भी अपने संबोधन में उल्लेख किया था। सरयू राय ने मानगो नगर निगम से परिवेश पोर्टल पर जल्द आवेदन अपलोड करने और लंबित प्रक्रिया पूरी करने की मांग की है।
लंबे समय के बाद इस बात का खुलासा हुआ कि लापरवाही मानगो नगर निगम की है। आम लोगों में यह संदेश जा रहा था कि बेवजह विलंब हो रहा है।
