भारत के पहले सौर मिशन आदित्य-एल1 ने अंतरिक्ष में बनाई नई उपलब्धि
इसरो के आदित्य-एल1 मिशन ने अंतरिक्ष अनुसंधान में भारत को दिलाई ऐतिहासिक सफलता
डेस्क – भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक नया इतिहास रचते हुए शनिवार को आदित्य-एल1, भारत के पहले समर्पित सौर मिशन को उसके अंतिम गंतव्य, लैग्रेंज प्वाइंट एल1 पर सफलतापूर्वक स्थापित किया।
पृथ्वी से करीब 15 लाख किलोमीटर दूर स्थापित यह अंतरिक्ष यान, सूर्य के विस्तृत अध्ययन में एक महत्वपूर्ण साधन साबित होगा।
इस मिशन की सफलता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने खुशी व्यक्त की।
सितंबर में आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित पीएसएलवी-सी57.1 रॉकेट द्वारा इस अंतरिक्ष यान को ले जाया गया था।
चंद्रयान-3 के बाद इसरो के इस मिशन का सफल प्रक्षेपण भारतीय अंतरिक्ष इतिहास में एक और चमकदार अध्याय जोड़ता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस उपलब्धि को विज्ञान के नए क्षेत्रों में भारत की निरंतर प्रगति के रूप में सराहा।
आदित्य-एल1 में सात पेलोड हैं, जिनमें से चार सूर्य से प्रकाश का निर
ीक्षण करेंगे और अन्य तीन प्लाज्मा और चुंबकीय क्षेत्र के मापदंडों को मापेंगे।
इस मिशन का सबसे बड़ा और चुनौतीपूर्ण पेलोड विजिबल एमिशन लाइन कोरोनाग्राफ (VELC) है, जिसे होसाकोटे में भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान के CREST परिसर में तैयार किया गया था।
इस मिशन के जरिए अंतरिक्ष मौसम और सौर विस्फोटों के कारणों का विस्तृत अध्ययन संभव हो पाएगा।
भारत के इस सौर मिशन से सौर कोरोना की भौतिकी, सौर वायु त्वरण, और कोरोनल मास इजेक्शन जैसे विषयों का गहन अध्ययन हो सकेगा।
