राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने अधूरे खरसावां अस्पताल का किया निरीक्षण; समीक्षा की और कायाकल्प का वादा किया, विधायक ने 2024 तक पूरा होने की उम्मीद जताई
खरसावां- राज्य के स्वास्थ्य सह आपदा प्रबंधन मंत्री खरसावां के अमदा में 12 वर्षों से अधूरे पड़े 500 बेड के अस्पताल का औचक निरीक्षण करने पहुंचे.
यात्रा के दौरान स्थानीय विधायक दशरथ गागराई भी उनके साथ थे.
निरीक्षण के बाद स्वास्थ्य मंत्री ने क्षेत्र के लोगों को आश्वासन दिया कि जल्द ही अस्पताल का कायाकल्प किया जायेगा.
उन्होंने स्थिति की समीक्षा करने और परियोजना पर आगे की कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्धता जताई.
154 करोड़ की लागत से बन रहे इस अस्पताल को देरी का सामना करना पड़ा और एक दशक से अधिक समय तक यह अधूरा पड़ा रहा.
स्वास्थ्य मंत्री, बन्ना गुप्ता ने मीडिया के माध्यम से क्षेत्र के लोगों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की.
उन्होंने कहा, ”मैं आ गया हूं, जल्द ही इस अस्पताल का कायाकल्प हो जाएगा.”
उन्होंने लोगों को आश्वासन दिया कि वह प्रगति की समीक्षा करेंगे और परियोजना को पूरा करने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे.
उनका दौरा अस्पताल के निर्माण की जमीनी हकीकत को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था.
स्थानीय विधायक दशरथ गागराई ने परियोजना के प्रति स्वास्थ्य मंत्री की प्रतिबद्धता पर भरोसा जताया.
उन्होंने एक कदम आगे बढ़कर दावा किया है कि 2024 में अस्पताल की सौगात सरकार द्वारा जनता को समर्पित कर दी जाएगी.
उन्होंने कहा कि उनके अनुरोध पर स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल का दौरा किया और उन्हें विश्वास है कि मंत्री इस परियोजना को पूरा करने के प्रति गंभीरता दिखाएंगे.
उन्होंने समुदाय के लिए अस्पताल के महत्व और इसके पूरा होने में तेजी लाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया.
खरसावां के अमदा में 500 बिस्तरों वाला अस्पताल स्थानीय समुदाय के लिए एक लंबे समय से प्रतीक्षित परियोजना रही है.
यह 12 वर्षों से अधूरा पड़ा हुआ है, जिससे निवासियों में चिंता और निराशा है.
अस्पताल की योजना क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने की है, और इसका पूरा होना स्थानीय आबादी की भलाई के लिए आवश्यक माना जाता है.
स्वास्थ्य मंत्री के हालिया दौरे और विधायक के दावों से परियोजना के पुनर्जीवन की उम्मीद जगी है.
12 साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, जो वर्तमान में केंद्रीय मंत्री हैं, ने इस अस्पताल का शिलान्यास किया था.
समय बीतता गया, इस बीच झारखंड में कई राजनीतिक बदलाव हुए, लेकिन जनता के लिए अस्पताल नहीं बन सका.
पिछली बार भी प्रदेश में भाजपा सरकार थी, लेकिन तत्कालीन भाजपा सरकार ने भी इस अस्पताल को लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखाई.
इस बीच कोरोना महामारी के दौरान सरायकेला-खरसावां जिले को भी कठिन समय का सामना करना पड़ा.
अगर यह अस्पताल बन जाता तो हजारों लोगों को इसका लाभ मिलता.
हालांकि स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने सोमवार को क्षेत्र के लोगों को आश्वासन दिया है कि अब वे इस अस्पताल को लेकर गंभीरता दिखाएंगे और जल्द ही यह अस्पताल जनता को समर्पित कर दिया जाएगा.
क्षेत्र के लोगों को अब उस समय का इंतजार है जब यह अस्पताल जनता को समर्पित किया जायेगा.
