Ram Katha Day 7: सिदगोड़ा सूर्यधाम में विशाल महाभण्डारा के साथ हुआ सात दिवसीय श्रीराम कथा अनुष्ठान का समापन, 22 हजार से अधिक भक्तों ने ग्रहण किया प्रसाद

■ सुंदरकांड व  श्रीराम जी के राज्याभिषेक से श्रीराम कथा का हुआ विधिवत विश्राम, फूलों से श्रद्धालुओं ने खेली होली, भक्तिमय भजन पर श्रद्धालु जमकर थिरके पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास

■ दिन भर डटे रहे पूर्व सीएम, लेते रहे व्यवस्थाओं की जानकारी, 60 काउंटर पर महाप्रसाद, 20 काउंटर पर की गई थी पानी की व्यवस्था

जमशेदपुर:  सूर्य धाम समिति, सिदगोड़ा द्वारा श्रीराम मंदिर स्थापना की तृतीय वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा का मंगलवार को विशाल महाभण्डारा के साथ समापन हुआ. महाप्रसाद वितरण हेतु सूर्यमंदिर परिसर में 40 कांउटर महिलाओं के लिए एवं 20 काउंटर पुरुषों के लिए लगाए गए थे. वहीं, 20 काउंटर शीतल पेय के लगाए गए थे. प्रसाद के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए पुरुष एवं महिलाओं के लिए मंदिर कमेटी ने अलग-अलग स्थानों की व्यवस्था की थी. संध्या 7:30 बजे से लेकर देर रात तक चले भंडारे में करीब 22 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया. 

सूर्य मंदिर समिति ने भंडारा में प्रसाद ग्रहण करने हेतु कागज के प्लेट व कागज के ग्लास की व्यवस्था की थी। इसके साथ ही, भंडारा में  सूर्य मंदिर समिति के मुख्य संरक्षक सह राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने महाभण्डारा के सफलतापूर्वक समापन हेतु मंदिर समिति के पदाधिकारी, मंडल अध्यक्ष एवं भाजपा कार्यकर्ताओं के संग निरंतर बैठक कर रूपरेखा बनाई। संध्या 7:30 बजे से देर रात तक चले भंडारा में पूर्व सीएम रघुवर दास शरूआत से अंत तक डटे रहे और काउंटर पर जाकर स्थिति की जानकारी लेते रहे.

 इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पिछले कई दिनों से चल रहे धार्मिक अनुष्ठान की कड़ी में महाभण्डारा सबसे बड़ी जिम्मेदारी रही। जिसे जमशेदपुर की जनता के सहयोग व प्रभु श्रीराम जी के कृपा से सफलतापूर्वक संपन्न किया गया. उन्होंने जमशेदपुर की राम भक्त जनता, महिलाएं पुरुष, युवाओं के प्रति आभार जताया, जिनके सहयोग से यह समारोह सफलतापूर्वक संपन्न हुआ. कहा कि कलश यात्रा से लेकर नगर भ्रमण व विशाल भंडार में जिस उत्साह से जमशेदपुर के भक्तों ने भाग लिया, उसका शब्दों में वर्णन करना कम ही होगा.  कहा कि यहाँ की जनता की भक्ति भावना अद्वितीय एवं सराहनीय है. जमशेदपुर की जनता समेत सभी भक्तों के सहयोग व भक्तिभाव ने सूर्यमंदिरधाम को आज आस्था का केंद्र बिंदु बना दिया है.

 सूर्य मंदिर समिति यूं ही सामाजिक एवं धार्मिक कार्यों में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करती रहेगी.  दास ने अनुष्ठान में लगे भाजपा कार्यकर्ताओं समेत मंदिर कमिटी के पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं के प्रति धन्यवाद प्रकट करते हुए कहा कि लगन, निष्ठा एवं समर्पण भाव से किए गए कार्यों के परिणाम भी सुखद होते हैं.

दास ने कहा कि भारत एक धर्म परायण देश है. यही कारण है कि राम कथा हमें प्राचीन काल से आंदोलित और प्रल्ल्वित करते रहे हैं. श्रीराम मंदिर स्थापना की तृतीय वर्षगांठ पर व्यास पूज्य पंडित गौरांगी गौरी जी की कथा को जीवन पर्यंत नहीं भूल सकते हैं  अपने मुखारविंद से नाम महिमा. कथा महिमा, शिव सती प्रसंग, शिव-पार्वती विवाह, राम जन्मोत्सव, बाल लीला, अहिल्या उद्धार, सीता राम विवाहोत्सव, राम वनवास, केवट प्रसंग, भरत मिलाप, सबरी प्रसंग से लेकर सुंदरकांड और श्री राम के राज्याभिषेक उत्सव तक की जो विद्वतापूर्वक प्रस्तुति की वह अद्वितीय और अद्भुत है. भगवान राम संसार के कण-कण में बसे हैं और जीवन के हर क्षण में राम हैं.

सूर्य मंदिर समिति के संरक्षक चंद्रगुप्त सिंह ने जमशेदपुर की जनता के सहयोग और आशीर्वाद के लिए सभी श्रद्धालुओं का आभार जताया. उन्होंने कहा कि श्रीराम कथा में आप सभी भक्तों की आपार समूह ने इस आयोजन को सफल बनाया. उन्होंने कहा कि सूर्य मंदिर समिति आप सभी के सहयोग से संस्कृति संरक्षण और विश्व कल्याण की दिशा में निरंतर ऐसे आयोजन करती रहेगी. विशाल भंडारा में महाप्रसाद ग्रहण करने को लेकर भी श्रद्धालुओं में उत्साह देखा गया। विशाल भंडारा में समरसता की झलक देखने को मिली.

इससे पहले, संगीतमय श्रीराम कथा के अंतिम दिन श्री अयोध्याधाम से पधारी मर्मज्ञ कथा वाचिका पूज्य पंडित गौरांगी गौरी जी का स्वागत किया गया. स्वागत के पश्चात कथा व्यास पूज्य पंडित गौरांगी गौरी जी ने श्रीराम कथा में बताया कि सुंदरकांड के प्रारम्भ में ही श्री हनुमान जी के दिव्य विराट स्वरूप का दर्शन होता है जो राम कार्य के लिए हनुमान जी ने धारण किया.  श्री हनुमान जी का सम्पूर्ण जीवन रामकार्यों के लिए ही समर्पित है इसलिए कलयुग में भी श्री हनुमान जी की महिमा सर्वाधिक वंदनीय है.

सुरसा सिंह का और लंकिनी रूपी विधनों को पार करते हुए हनुमान जी लंका में पहुंचे वहां विभीषण से मिलकर श्री जानकी जी का पता लेकर श्री हनुमान जी अशोक वाटिका में आये और माता सीता का दर्शन किया. यहां संकेत है कि यदि भाव सच्चा हो तो सुदूर विघ्नों के बीच जाकर भी जीव भक्ति देवी की कृपा प्राप्त कर सकता है.

जानकी जी को भगवान का संदेश देकर एवं लंका को जलाकर हनुमान जी भगवान के पास वापस आये. तत्पश्चात भगवान सेना सहित लंका में पहुंचे जहां राम-रावण युद्ध प्रारम्भ हुआ जो धर्म-अधर्म, सत्य-असत्य का युद्ध है. भगवान को विजय श्री प्राप्त हुई क्योंकि यह सनातन सिद्धान्त है कि विजय हमेशा सत्य की ही होती है.

रावण वध के पश्चात भगवान लौटकर अयोध्या में आए। जहां भगवान का राजतिलक किया गया. राम राज्य दोषों, दुर्गुणों, दुःख ददों आदि को मिटाकर सुखी एवं समृद्ध जीवन की आशा से परिपूर्ण है. समस्त भक्तजनों ने रामराज्य तिलक में भाव से सम्मिलित होकर सुखी एवं समृद्ध होकर राष्ट्र की कामना करते हुए एक दूसरे को बधाई दी. श्री राम राजतिलक के साथ ही श्रीरामकथा ने विश्राम प्राप्त किया। पूरे कथा में श्रद्धालुओं ने भक्तिमय संगीत में जमकर आनंद लिया और जमकर झूमे.

कथा के दौरान मंच संचालन मंदिर समिति के वरीय सदस्य कमलेश सिंह ने किया.

आयोजन में भाजपा नेता राकेश प्रसाद, संजय जायसवाल, मंदिर कमेटी के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह, अंजन सरकार, बलदेव भुइयाँ, कुसुम पूर्ति, दिनेश केडिया, अविनाश सिंह राजा, महासचिव अखिलेश चौधरी, संजीव सिंह, अमरजीत सिंह राजा, संतोष यादव, शशिकांत सिंह, महामंत्री अखिलेश चौधरी, रूबी झा, कृष्ण मोहन सिंह, बंटी अग्रवाल, कंचन दत्ता, अधेन्दू बनर्जी, लक्ष्मीकांत सिंह, प्रेम झा, प्रमोद मिश्रा एवं तृतीय वर्षगांठ आयोजन समिति के संयोजक गुंजन यादव, दिनेश कुमार, राकेश सिंह, कमलेश सिंह, कुलवंत सिंह बंटी, महेंद्र यादव, सुशांतो पांडा, पवन अग्रवाल, कल्याणी शरण, कमलेश साहू, खेमलाल चौधरी, सुरेश शर्मा, संतोष ठाकुर, अजय सिंह, दीपक झा, ध्रुव मिश्रा, हेमंत सिंह, बिनोद राय, संदीप शर्मा बौबी, प्रोबिर चटर्जी राणा, अमित अग्रवाल, धर्मेंद्र प्रसाद, अभिमन्यु सिंह चौहान, कुमार अभिषेक, महावीर सिंह, अशोक सामंत, संतोष कुमार, बंटी सिंह, हन्नी परिहार, राजेश सिंह, रंजीत सिंह, निकेत सिंह, नीलू झा, ममता कपूर, पुष्पा तिर्की, राम मिश्रा, कुमार आशुतोष, सतीश कुमार, अनिकेत रॉय, निर्मल गोप, रुपा देवी, प्रमिला साहू, कमला साहू, मधु देवी, सरस्वती देवी, आशा देवी, उर्मिला देवी, गंगा देवी, नीलम देवी, लखी कौर, शोभा देवी, कान्ता देवी, हीरा देवी, राकेश राय, गौतम प्रसाद, कुलवंत सिंह संधू, संजू सिंह समेत अन्य अन्य उपस्थित थे.

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