जमशेदपुर : यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर मंगलवार को देशभर के सरकारी बैंकों में कामकाज पूरी तरह ठप रहा। बैंक कर्मचारी लंबे समय से लंबित पांच-दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग को लेकर राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर उतर आए, जिससे आम ग्राहकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
हड़ताल के कारण नकदी जमा-निकासी, चेक क्लीयरेंस, ड्राफ्ट, पासबुक अपडेट और अन्य शाखा-स्तरीय सेवाएं प्रभावित रहीं। कई स्थानों पर बैंक शाखाओं के बाहर ग्राहकों की भीड़ देखने को मिली, लेकिन कामकाज ठप रहने से उन्हें निराश लौटना पड़ा।
UFBU, जो नौ प्रमुख बैंक यूनियनों का संयुक्त मंच है, ने सरकार से सभी शनिवारों को बैंक अवकाश घोषित करने की मांग की है। यूनियनों का कहना है कि मार्च 2024 में इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) के साथ हुए वेतन समझौते के दौरान इस विषय पर सैद्धांतिक सहमति बनी थी, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई औपचारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है।
यूनियन नेताओं का तर्क है कि जब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) और केंद्र सरकार के कार्यालयों में पहले से ही पांच-दिवसीय कार्य सप्ताह लागू है, तो बैंकों में भी इसे लागू किया जाना चाहिए।
इस हड़ताल का असर इसलिए भी ज्यादा गंभीर रहा क्योंकि 24 जनवरी (चौथा शनिवार), 25 जनवरी (रविवार) और 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) की छुट्टियों के बाद बैंक लगातार चार दिनों तक बंद रहे। इससे शाखाओं से जुड़ी सेवाओं में लंबा अंतराल पैदा हो गया।
हड़ताल से मुख्य रूप से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक प्रभावित हुए, जिनमें भारतीय स्टेट बैंक (SBI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB), बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) और केनरा बैंक प्रमुख हैं। इन बैंकों ने पहले ही अपने ग्राहकों को संभावित व्यवधान को लेकर सतर्क कर दिया था।
