झारखंड में आदिवासी कुड़मि समाज ने फिर दोहराई एसटी दर्जे की मांग

=रेल टेका आंदोलन की समीक्षा बैठक

जमशेदपुर; आदिवासी कुड़मि ( कुडमी) समाज द्वारा हाल ही में तीन राज्यों—झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल—में आयोजित रेल टेका और डहर छेंका आंदोलन की समीक्षा बैठक शुक्रवार को देवेंद्र सेवा सदन, कागलनगर, सोनारी में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता समाज के केंद्रीय अध्यक्ष शशांक शेखर महतो ने की।

बैठक में बड़ी संख्या में समाज के बुद्धिजीवी, महिला प्रतिनिधि एवं युवा नेता उपस्थित हुए। कार्यक्रम में तीनों राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

आंदोलन ऐतिहासिक न्याय की लड़ाई : अजीत प्रसाद महतो
इस अवसर पर मुख्य वक्ता मूलखूंटी मूलमानता अजीत प्रसाद महतो ने कहा कि कुड़मि समाज का अनुसूचित जनजाति (एसटी) दर्जा ऐतिहासिक रूप से सिद्ध है, लेकिन सरकार लंबे समय से इसे अनदेखा कर रही है।”

उन्होंने कहा कि रेल टेका आंदोलन में समाज के लाखों लोग— महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग और युवा—रेलवे ट्रैक पर शांतिपूर्वक ढोल-नगाड़े के साथ बैठे थे, फिर भी सरकार ने अब तक कोई ठोस पहल नहीं की है। आंदोलन के दौरान समाज को आर्थिक, मानसिक और प्रशासनिक दबाव झेलना पड़ा, साथ ही कई निर्दोषों पर झूठे मुकदमे भी दर्ज किए गए।

अजीत महतो ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह संघर्ष केवल सामाजिक दर्जे का नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों और आदिवासी पहचान की पुनर्स्थापना का आंदोलन है।

बंगाल में दमन, विरोध ही सफलता का संकेत
बैठक में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि बंगाल सरकार ने आंदोलन को दबाने के लिए कुड़मी बहुल गांवों में पुलिस भेजकर पुरुषों को घरों से उठा कर जेल भेजा। उन्होंने कहा कि यह दमन दर्शाता है कि सरकार आंदोलन की शक्ति से भयभीत है और यही समाज की सफलता का संकेत है।

अब निर्णायक लड़ाई की तैयारी
बैठक के समापन पर समाज के नेताओं ने स्पष्ट किया कि अब समय आ गया है कि सरकार कुड़मी समाज को उसका संवैधानिक हक यानी एसटी दर्जा दे। यदि सरकार इस पर जल्द निर्णय नहीं लेती है, तो आंदोलन को अधिक व्यापक और उग्र रूप दिया जाएगा।

प्रमुख पदाधिकारी रहे उपस्थित
बैठक में केंद्रीय उपाध्यक्ष शशधर काड़ुआर, महासचिव अधिवक्ता सुनील कुमार गुलिआर, सह-सचिव जयराम हिंदइआर, प्रदेश अध्यक्ष पद्मलोचन काड़ुआर, तालेश्वर पुनअरिआर, मणिलाल महतो, राकेश रंजन महतो, योगेश्वर नागवंशी, दिव्यसिंह मोहंता, काकोली काड़ुआर, मंटू महतो समेत बड़ी संख्या में समाज के वरिष्ठ नेता, युवा कार्यकर्ता एवं महिला प्रतिनिधि उपस्थित थे।

समीक्षा बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णय:
आंदोलन को और अधिक संगठित व चरणबद्ध रूप से आगे बढ़ाया जाएगा
आंदोलन के दौरान दर्ज झूठे केसों को वापस लेने की मांग
समाज के सभी वर्गों से एकता बनाए रखने का आह्वान
केंद्र और राज्य सरकारों को आगाह किया गया कि यदि सकारात्मक पहल नहीं की गई, तो आंदोलन होगा और उग्र

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