महिला कल्याण योजना को रोकने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर, भाजपा पर विपक्ष का आरोप
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मेनया सम्मान योजना का बचाव किया, जबकि उच्च न्यायालय में महिला कल्याण योजना को रोकने के लिए एक जनहित याचिका दायर की गई है।
रांची – झारखंड उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका में मेन्या सम्मान योजना को चुनौती दी गई है, जिसके बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने महिला कल्याण योजना का बचाव किया है।
झारखंड उच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका (पीआईएल) का उद्देश्य मुख्यमंत्री मैय्या सम्मान योजना के कार्यान्वयन को रोकना है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर विपक्ष की मंशा पर सवाल उठाया है।
सोरेन ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा, “भाजपा हमारी बहनों का कल्याण क्यों नहीं चाहती? झारखंडी हितों पर उनका लगातार हमला चिंताजनक है।”
झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने आरोप लगाया है कि यह कानूनी चुनौती भाजपा द्वारा संचालित है।
झामुमो प्रवक्ता ने कहा, “अन्य तरीकों से योजना को रोकने में असमर्थ होने पर उन्होंने कानूनी दांवपेंच का सहारा लिया है।”
याचिकाकर्ता, सिमडेगा के विष्णु साहू का तर्क है कि राज्य सरकार सीधे व्यक्तियों को धन हस्तांतरित नहीं कर सकती है।
साहू की याचिका में कहा गया है, “सार्वजनिक धन को कल्याणकारी योजनाओं में निवेश किया जाना चाहिए, न कि व्यक्तिगत खातों में जमा किया जाना चाहिए।”
मेन्या सम्मान योजना के तहत 20-50 वर्ष की पात्र महिलाओं को 1000 रुपये मासिक प्रदान किया जाता है।
आलोचकों का दावा है कि इस योजना का उद्देश्य आगामी विधानसभा चुनावों से पहले मतदाताओं को प्रभावित करना है।
समर्थकों का तर्क है कि यह महिला सशक्तिकरण और वित्तीय स्वतंत्रता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस मामले पर उच्च न्यायालय के निर्णय का योजना के समर्थकों और विरोधियों दोनों को उत्सुकता से इंतजार है।
