- **स्कूल से लौटी तो घर की जगह मिला मलबा, राहत और पुनर्वास का इंतजार
- **लक्ष्मी का परिवार इसी जग दुकान चलाकर चलाता था आजीविका, ठिकाना भी वहीं
- **रांची के मोरहाबादी इलाके में ध्वस्त किए गए 60 से अधिक अवैध निर्माण
रांची : राजधानी रांची के मोरहाबादी स्थित ऑक्सीजन पार्क के पास नगर निगम के अतिक्रमण हटाओ अभियान में 60 से अधिक अवैध निर्माण ध्वस्त कर दिए गए। इस कार्रवाई में 10वीं की छात्रा लक्ष्मी का घर भी टूट गया। स्कूल से लौटने पर उसे अपना आशियाना मलबे में तब्दील मिला। बारिश के बीच उसने अपनी किताबों को छाते से बचाया, लेकिन खुद के सिर पर छत नहीं बची। घटना के बाद पुनर्वास और राहत को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
सुबह अपने भविष्य के सपनों के साथ स्कूल गई लक्ष्मी को इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि लौटने पर उसके सिर से छत छिन चुकी होगी। बारिश के बीच उसने अपनी किताबों और कॉपियों को भीगने से बचाने के लिए उन पर छाता तान लिया, लेकिन खुद के रहने के लिए उसके पास कोई सुरक्षित जगह नहीं बची।
उसकी आंखों में छलकते आंसू और चेहरे पर छाई मायूसी ने मौके पर मौजूद लोगों को भावुक कर दिया।
नगर निगम ने मोरहाबादी से हरमू रोड तक व्यापक अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया। इस दौरान 60 से अधिक अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया गया।
प्रशासन का कहना है कि सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने, यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाने और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास भीड़भाड़ कम करने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की गई। विशेष रूप से ऑक्सीजन पार्क की बाउंड्री वॉल से सटे अवैध निर्माणों को प्राथमिकता के आधार पर हटाया गया।
हालांकि, प्रभावित परिवारों का आरोप है कि प्रशासन ने पर्याप्त पूर्व सूचना दिए बिना कार्रवाई कर दी। उनका कहना है कि न तो पुनर्वास की कोई व्यवस्था की गई और न ही प्रभावित परिवारों के लिए किसी राहत पैकेज की घोषणा हुई।
लक्ष्मी का परिवार भी इसी स्थान पर दुकान चलाकर अपनी आजीविका चलाता था और वहीं निवास करता था। कार्रवाई के बाद परिवार ने एक साथ अपना घर और रोजगार दोनों खो दिए।
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद अब तक प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों के लिए किसी वैकल्पिक आवास या आर्थिक सहायता की औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर परिवारों के सामने भविष्य को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
इस बीच रांची की मेयर रमा खलखो देर रात प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचीं। उन्होंने जल्द से जल्द वैकल्पिक व्यवस्था कराने का आश्वासन दिया। वहीं, डिप्टी मेयर रोशनी खलखो ने कहा कि नगर निगम की बैठक में व्यस्त रहने के कारण उन्हें कार्रवाई की जानकारी समय पर नहीं मिल सकी।
उन्होंने इस घटना पर दुख जताते हुए कहा कि गरीब परिवारों का आशियाना उजड़ना बेहद पीड़ादायक है। हालांकि, फिलहाल प्रभावित परिवारों को न तो राहत पैकेज मिला है और न ही पुनर्वास की कोई ठोस व्यवस्था की गई है।
वैसे लोगों में इस बात की भी चर्चा होती रही कि अतिक्रमण के दौरान प्रशासन मूकदर्शक बना रहता है। जब आशियाना बन जाता है लोग रहने लगते हैं तब अतिक्रमित भूमि बताकर चंद मिनट में इसे ध्वस्त कर दिया जाता है।
