जमशेदपुर : जमशेदपुर ऑल मार्केट एसोसिएशन ने जेएनएसी की सैरात की दुकानों के किराये में की गई बढ़ोतरी पर कड़ा विरोध जताते हुए प्रशासन से किराया निर्धारण की प्रक्रिया पर पुनर्विचार करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि अंतिम निर्णय होने तक दुकानदारों से पुराने किराया दर पर ही राशि ली जाए।
किराया वृद्धि को लेकर शहर के व्यापारियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। दुकानदारों के प्रमुख संगठन जमशेदपुर ऑल मार्केट एसोसिएशन ने इस निर्णय का विरोध करते हुए प्रशासन से किराया निर्धारण की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करने और अंतिम निर्णय तक पुराने किराया दर पर ही वसूली जारी रखने की मांग की है।
एसोसिएशन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि शहर के हजारों व्यापारी वर्षों से जेएनएसी की दुकानों में कारोबार कर रहे हैं। यही व्यवसाय उनके परिवार की आजीविका का प्रमुख आधार है।
संगठन का दावा है कि अधिकांश दुकानदार समय-समय पर निर्धारित नियमों के अनुसार किराया जमा करते रहे हैं, लेकिन बिना व्यापक चर्चा के अचानक किराये में भारी बढ़ोतरी करना छोटे और मध्यम वर्ग के व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने जैसा है।
व्यापारियों का कहना है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में कारोबार पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे समय में किराये में एकमुश्त वृद्धि व्यापारियों की आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर सकती है।
ऐसे में किराया निर्धारण किसी एकतरफा प्रशासनिक निर्णय के बजाय सभी संबंधित पक्षों की सहमति से किया जाना चाहिए।
एसोसिएशन ने सुझाव दिया है कि प्रशासन, संबंधित विभाग और दुकानदारों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर ऐसा किराया तय करे, जो तर्कसंगत, व्यवहारिक और सभी पक्षों के लिए स्वीकार्य हो।
साथ ही किराया निर्धारण के दौरान बाजार की वास्तविक स्थिति, व्यापारिक गतिविधियों और दुकानदारों की भुगतान क्षमता को भी ध्यान में रखा जाए।
संगठन ने प्रशासन से आग्रह किया है कि जब तक नई किराया नीति पर अंतिम और सर्वमान्य निर्णय नहीं हो जाता, तब तक पुराने किराया दर पर ही वसूली की जाए। एसोसिएशन ने यह भी स्पष्ट किया कि वह व्यापारियों के हितों की रक्षा के साथ-साथ प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए हर स्तर पर सकारात्मक सहयोग देने को तैयार है।
शहर के बाजारों व व्यावसायिक परिसरों में आवंटित हैं दुकानें
जेएनएसी के अधीन शहर के विभिन्न बाजारों और व्यावसायिक परिसरों में बड़ी संख्या में दुकानें आवंटित हैं। समय-समय पर इन दुकानों के किराये में संशोधन को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं।
व्यापारिक संगठनों का लंबे समय से कहना रहा है कि किराया वृद्धि बाजार की वास्तविक स्थिति और व्यापारियों की आय के अनुरूप होनी चाहिए। उनका तर्क है कि बिना व्यापक परामर्श के की गई किराया वृद्धि छोटे कारोबारियों के लिए आर्थिक संकट पैदा कर सकती है। इसी कारण पहले भी किराया निर्धारण में पारदर्शिता और व्यापारिक संगठनों की भागीदारी की मांग उठती रही है। वर्तमान विवाद ने एक बार फिर इस मुद्दे को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
दुकानदार बार-बार किराया वृद्धि को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। जेएनएसी के अधिकारी की ओर से अब तक इस मामले में यह नहीं बताया गया है प्रशासन इस मामले में क्या निर्णय लेगा।
