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नई दिल्ली, 8 जून (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने सोमवार को दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान इंडी अलायंस की बैठक पर निशाना साधा है। उन्होंने विपक्षी दलों पर राजनीतिक पाखंड का आरोप लगाते हुए कहा कि जनता का उनके प्रति विश्वास लगातार कम होता जा रहा है।
भाजपा सांसद संबित पात्रा ने कहा कि इंडी अलायंस की बैठक संविधान क्लब के एक कमरे में आयोजित की गई, जहां कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मीडिया को संबोधित करते हुए चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे उठाए। पात्रा ने कहा कि विपक्ष बार-बार एक ही प्रकार के आरोप दोहरा रहा है और हार के बाद चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े करना उसकी आदत बन गई है।
उन्होंने कहा कि पहले इंडी अलायंस की बैठकें बड़े स्टेडियमों में आयोजित होती थीं, जहां सभी दलों के नेता एकजुटता का प्रदर्शन करते थे। लेकिन, अब स्थिति यह है कि उनकी बैठकें छोटे कमरों तक सीमित हो गई हैं। पात्रा के अनुसार, यह विपक्ष की घटती राजनीतिक स्वीकार्यता और जनाधार का संकेत है।
भाजपा सांसद ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि जब महिला सशक्तीकरण और ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सर्वदलीय बैठक बुलाई गई थी, तब विपक्षी दल उसमें शामिल नहीं हुए। अब वही दल सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग कर रहे हैं।
पश्चिम बंगाल की राजनीति और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए पात्रा ने कहा कि वह पार्टी के आंतरिक मामलों पर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहना चाहते, लेकिन मीडिया में सामने आ रही खबरों और कुछ नेताओं के बयानों से यह स्पष्ट है कि पार्टी के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है। यदि किसी दल के भीतर समस्याएं हैं, तो उसे पहले अपने संगठन को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।
राहुल गांधी और ममता बनर्जी के राजनीतिक संबंधों पर कटाक्ष करते हुए पात्रा ने कहा कि कभी कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने स्वयं ममता बनर्जी और उनकी पार्टी की कार्यशैली को पश्चिम बंगाल में भाजपा के बढ़ते प्रभाव का कारण बताया था, जबकि आज दोनों दल एक मंच पर साथ दिखाई दे रहे हैं।
इंडी अलायंस की बैठक पर व्यंग्य करते हुए पात्रा ने कहा कि गठबंधन की बैठकें लगातार छोटी होती जा रही हैं। उन्होंने दावा किया कि जनता ने विपक्ष की विश्वसनीयता को नकार दिया है और इसी कारण उसे चुनावों में अपेक्षित समर्थन नहीं मिल रहा है।
एसएके
