सरायकेला। जिला मुख्यालय और आसपास के क्षेत्रों में पेट्रोल संकट लगातार तीसरे दिन भी बना हुआ है। हालात ऐसे हैं कि शहर के मुख्य तीन पेट्रोल पंपों को छोड़ अधिकांश पंपों पर आम लोगों को पेट्रोल देने से साफ इनकार किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि कई पंपों पर पेट्रोल खत्म होने के बावजूद ‘आउट ऑफ स्टॉक’ का बोर्ड तक नहीं लगाया गया है।
पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि बोर्ड लगाने से लोगों में घबराहट फैल सकती है, इसलिए ऐसा नहीं किया जा रहा। लेकिन इसका उल्टा असर देखने को मिल रहा है। लोग उम्मीद में पेट्रोल पंप पहुंच रहे हैं और वहां से बिना पेट्रोल लिए वापस लौटने को मजबूर हो रहे हैं। कर्मचारियों का जवाब सिर्फ इतना है कि “तेल खत्म हो गया है, जो आ रहा है उसे वापस किया जा रहा है।”
इस बीच पेट्रोल वितरण में दोहरे मापदंड के आरोप भी सामने आए हैं। जहां आम लोग पेट्रोल के लिए परेशान हैं, वहीं ‘इमरजेंसी स्टॉक’ के नाम पर अधिकारियों और रसूखदारों के निजी वाहनों में पेट्रोल भरे जाने की शिकायतें मिल रही हैं। इससे लोगों में भारी नाराजगी है। स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि स्टॉक उपलब्ध है तो सभी को पेट्रोल क्यों नहीं दिया जा रहा।
लगातार तीसरे दिन जारी इस संकट के कारण दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों की परेशानियां बढ़ गई हैं। कई वाहन सड़कों पर बंद पड़े दिखाई दे रहे हैं, जबकि लोगों के दैनिक कामकाज भी प्रभावित हो रहे हैं। वाहन चालक पेट्रोल की तलाश में एक पंप से दूसरे पंप तक भटकते नजर आ रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से पेट्रोल पंपों की जांच कराने, कृत्रिम किल्लत पैदा करने वालों पर कार्रवाई करने और स्टॉक की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की है। साथ ही, सभी पंपों पर ‘आउट ऑफ स्टॉक’ बोर्ड अनिवार्य रूप से लगाने का निर्देश देने की भी अपील की गई है।


