एनएमएल में इंडस्ट्रियल पीएचडी की शुरुआत, मशीनों की सेहत पर एआई-डेटा एनालिसिस पर जोर
जमशेदपुर में आरएलए-2026 का समापन, उद्योग और शिक्षा के बीच मजबूत तालमेल पर बल, उद्योगों की भारी मशीनों की उम्र के आकलन पर केंद्रित रही चर्चा
जमशेदपुर: सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (एनएमएल), जमशेदपुर में आयोजित आरएलए-2026 संगोष्ठी का शुक्रवार को समापन हो गया। दो दिवसीय इस राष्ट्रीय कार्यक्रम ने इंजीनियरिंग क्षेत्र को अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनाने की दिशा में नई संभावनाओं के द्वार खोले।
समापन सत्र में शिक्षा और उद्योग के बीच की दूरी कम करने पर विशेष जोर दिया गया। एनएमएल के निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधरी और डॉ. जेके साहू ने जानकारी दी कि सीएसआईआर-एनएमएल ने औद्योगिक पेशेवरों के लिए इंडस्ट्रियल पीएचडी और विशेष सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किए हैं। इसका उद्देश्य फैक्ट्री में कार्यरत इंजीनियरों को वास्तविक समस्याओं पर शोध करने के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि उनका ज्ञान व्यावहारिक रूप से और मजबूत हो सके।
संगोष्ठी के दौरान मुख्य चर्चा इस बात पर केंद्रित रही कि उद्योगों में उपयोग होने वाली भारी मशीनों—जैसे बॉयलर और टरबाइन—की उम्र का सटीक आकलन कैसे किया जाए और उनकी कार्यक्षमता को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए नई तकनीकों का इस्तेमाल कैसे बढ़ाया जाए। विशेषज्ञों ने स्पष्ट कहा कि अब मशीनों की निगरानी और रखरखाव में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और आधुनिक डेटा विश्लेषण का उपयोग अनिवार्य हो गया है।
पैनल चर्चा में यह भी रेखांकित किया गया कि निरीक्षण प्रणाली चाहे कितनी भी उन्नत क्यों न हो, यदि आंकड़ों की सटीकता में कमी रही तो दुर्घटनाओं का जोखिम बना रहेगा। विशेषज्ञों ने उद्योगों को आगाह करते हुए कहा कि ऑटोमेशन के बढ़ते उपयोग के बीच गुणवत्ता से समझौता करना खतरनाक साबित हो सकता है।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. कृष्णा गुगुलोथ ने सभी प्रतिभागियों और आयोजकों का आभार व्यक्त किया।
