पेसा के अंतर्गत ग्रामसभा को प्राप्त है गांव संचालन की सर्वोच्च इकाई का दर्जा : विधायक संजीव सरदार
पोटका : जादूगोड़ा स्थित रंकिणी मंदिर के धुमकुड़िया भवन में भूमिज समाज की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठकशुक्रवार को आयोजित की गई। इस बैठक में सिंहभूम, मानभूम, बराहभूम एवं धालभूम क्षेत्र से सैकड़ों हातु सरदार, मुड़ा, नाया एवं डाकुआ शामिल हुए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पोटका के विधायक संजीव सरदार ने पेसा कानून के तहत ग्रामसभा को मिले अधिकारों की विस्तार से जानकारी दी। वक्ताओं ने बताया कि पेसा के अंतर्गत ग्रामसभा को गांव संचालन की सर्वोच्च इकाई का दर्जा प्राप्त है, जिससे विकास कार्यों और निर्णय प्रक्रिया में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित होगी।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि झारखंड सरकार की पूर्व अधिसूचना में भूमिज समाज की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को शामिल नहीं किया गया था, लेकिन विधायक संजीव सरदार के प्रयासों से अब इसे अधिसूचित कर दिया गया है। इससे हातु सरदार, मुड़ा, नाया एवं डाकुआ की भूमिका गांव के संचालन में और अधिक मजबूत हुई है।
इस अवसर पर मुखिया अभिषेक सरदार, कालीपद सरदार, सिधेश्वर सरदार, हरिश्चंद्र सिंह भूमिज, सुदर्शन भूमिज, सुबोध सरदार, शत्रुघ्न सरदार, रथु सिंह सरदार, रामेश्वर सरदार, श्याम चरण सरदार, बादल सरदार, हिमांशु सरदार, मनोरंजन सरदार, बिहारी लाल सरदार, बसंती सरदार, सुनाराम सरदार, देवनाथ सरदार, बुगनु सरदार, विश्वरथ सिंह सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।
ग्रामसभा होगी निर्णय की सर्वोच्च इकाई
विधायक संजीव सरदार ने कहा कि राज्य गठन के 25 वर्षों बाद पेसा नियमावली को मंजूरी मिलना आदिवासी स्वशासन की ऐतिहासिक उपलब्धि है। अब ग्रामसभा गांव की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली इकाई होगी और उसकी अनुमति के बिना भूमि अधिग्रहण या विकास कार्य संभव नहीं होंगे।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण अब जल, जंगल, जमीन, लघु वन उपज और खनिज संसाधनों का प्रबंधन स्वयं कर सकेंगे। साथ ही, स्थानीय विवादों का समाधान भी पारंपरिक व्यवस्था के तहत किया जाएगा। उन्होंने सभी हातु सरदार, मुड़ा, नाया एवं डाकुआ से अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए गांव को सशक्त बनाने की अपील की।
