झारखंड में टेंडर कमीशन घोटाला : ईडी ने कार्यपालक अभियंता समेत 12 अभियंताओं को भेजा नोटिस
रांची : झारखंड के ग्रामीण विकास विभाग में हुए ‘टेंडर घोटाले’ की जांच एक बार फिर ईडी ने तेज कर दी है। दर्जनभर अभियंता निशाने पर हैं और अलग-अलग तारीख तय करते हुए पूछताछ के लिए उन्हें बुलाया गया है।
किस स्तर के पदाधिकारी निशाने पर
झारखंड के ग्रामीण विकास विभाग के टेंडर कमीशन घोटाले में कार्यपालक अभियंता (EE), सहायक अभियंता (AE) और कनीय अभियंता (JE) स्तर के अधिकारी शामिल हैं। ED ने सभी को रांची स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में पेश होने का निर्देश दिया है। जांच एजेंसी भ्रष्टाचार का खुलासा करने के मकसद से सभी अभियंताओं से पूछताछ करेगी।
विभाग के अंदर भ्रष्टाचार का सिंडिकेट
जांच एजेंसी को पड़ताल के दौरान पुख्ता जानकारी मिली है कि विभागीय ठेकेदारों से मोटी रकम की वसूली होती थी। उस पैसे में विभागीय मंत्री से लेकर आला अधिकारी और निचले पायदान तक का मुलाजिम शामिल है। ईडी विस्तार से अपनी जानकारी को और पुख्ता करना चाहती है कि इसमें कौन लोग शामिल थे? किसे कितना पैसा मिलता था? ईडी का प्रयास है कि तथ्य हासिल करने के बाद आगे की जांच की कार्रवाई करे। वैसे अब तक कि जानकारी के अनुसार प्रत्येक ठेकेदार से 3.2 प्रतिशत की वसूली होती थी। इसमें 1.5 प्रतिशत विभागीय मंत्री और बाकी बचे पैसे में विभागीय आला अधिकारी समेत कुछेक रसूखदार भी शामिल हैं।
तत्कालीन मंत्री व मुख्य अभियंता समेत 22 के खिलाफ प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट
ग्रामीण विकास विभाग में मनी लॉन्ड्रिंग के इस बड़े खेल में ED अब तक चार चरणों में 22 आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (आरोप पत्र) दायर कर चुकी है। इस मामले के मुख्य आरोपियों में आलमगीर आलम (तत्कालीन मंत्री), संजीव कुमार (मंत्री के तत्कालीन आप्त सचिव), बीरेंद्र राम (मुख्य अभियंता), आलोक रंजन और अन्य शामिल हैं।
