अब रांची में भी निमहंस 2, इलाज के लिए झारखंड के लोगों को नहीं जाना पड़ेगा बेंगलुरु

नई दिल्ली, रांची : अब झारखंड के मरीजों को मानसिक रोग, तंत्रिका विज्ञान, न्यूरोसर्जरी, बाल मनाेरोग एवं आनुवंशिक विकारों और जीनोमिक परीक्षण के लिए बेंगलुरु नहीं जाना पड़ेगा। अब तक यहां के लोगों को इन बीमारियों के इलाज के लिए बेंगलुरु जाना पड़ता था, जो काफी खर्चीला था। सामान्य लोग वहां आर्थिक कारणों से नहीं जा पाते थे।

इस बार केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक महत्वपूर्ण निमहंस-2 की घोषणा की है। इसके लिए रांची और तेजपुर को चुना गया है।

निमहंस 2 के माध्यम से उत्तर भारत में मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने का फैसला लिया गया है। रांची में पहले से ही सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ साइकियाट्री (सीआईपी) मौजूद है, जहां देश भर से आने वाले मरीजों का इलाज होता है। केंद्र सरकार के निर्णय से सीआईपी को अपग्रेड करने से इलाज और शोध को मिलेगी नई दिशा।


सीआईपी में स्नातक प्रशिक्षण और शोध कार्य

सीआईपी में मनोरोग, मनोविज्ञान और सामाजिक कार्य में स्नातक प्रशिक्षण और शोध कार्य होता है। 600 से अधिक बेड की क्षमता वाले इस संस्थान में मरीजों को बंद कमरों में नहीं रखा जाता। यहां 24 घंटे आपातकालीन सेवा ओपीडी और हेल्पलाइन भी उपलब्ध है।

सीआईपी को गरीब मरीजों के इलाज के लिए सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। यदि यहां कोई मरीज भर्ती होता है तो उसकी परिवार की सबसे बड़ी चिंता दूर हो जाती है। काफी कम खर्चे पर इलाज, रहने, खाने, कपड़े और दवाइयां की सुविधा मरीज को उपलब्ध कराई जाती है। जिसके कारण इस अस्पताल में झारखंड ही नहीं बल्कि बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश समेत पूर्वोत्तर राज्यों से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए आते हैं।

संस्थान में मरीजों के उपचार के साथ-साथ साइकोथेरेपी, योग और इंडोर-आउटडोर खेलकूद की सुविधा भी उपलब्ध है।बजट घोषणा के अनुसार केंद्र सरकार अब सीआईपी को अपग्रेड करेगी, ताकि मानसिक रोगों की इलाज और शोध को नई दिशा मिल सके। सीआईपी की स्थापना 17 मई 1918 को हुई थी, जिसे पहले रांची यूरोपीयन ल्यूनेटिक असाइलम कहा जाता था। करीब 200 में फैला यह संस्थान एशिया के सबसे बड़े मनोरोग अस्पतालों में से एक है। अब केंद्र सरकार ने इसे अपग्रेड करने का फैसला लिया है।

निमहंस बेंगलुरु में कौन-कौन सी बीमारियों का होता है इलाज

निमहांस (NIMHANS), बेंगलुरु, मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान (Neurosciences) के क्षेत्र में भारत का प्रमुख संस्थान है। यहाँ अवसाद, चिंता, तनाव, स्किज़ोफ्रेनिया, नशामुक्ति, मिर्गी (Epilepsy), पार्किंसंस, स्ट्रोक, दिमागी बुखार, न्यूरोमस्कुलर रोग, डिमेंशिया और बच्चों की मनोरोग संबंधी बीमारियों का व्यापक इलाज और न्यूरोसर्जरी की जाती है।

निमहंस में उपलब्ध प्रमुख इलाज और सेवाएं:

मानसिक रोग (Psychiatry): अवसाद (Depression), चिंता, तनाव, मनोविकार (Psychosis), नशामुक्ति, और मनोरोग से संबंधित अन्य समस्याओं के लिए विशेषज्ञ परामर्श।

तंत्रिका विज्ञान (Neurology): मिर्गी (Epilepsy), पार्किंसंस रोग, स्ट्रोक (Stroke), न्यूरोमस्कुलर विकार (Neuromuscular disorders), हेडेक (Headache), और न्यूरोमाइलाइटिस ऑप्टिका का इलाज।

न्यूरोसर्जरी (Neurosurgery): मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी बीमारियों का ऑपरेशन।

विशेष क्लिनिक: बाल मनोरोग (Child & Adolescent Psychiatry), वृद्ध मनोरोग, व्यवहार संबंधी विकार, और पुनर्वास (Rehabilitation) सेवाएं।

डायग्नोस्टिक्स: आनुवंशिक विकार (Genetic disorders) और जीनोमिक परीक्षण।

यह संस्थान देश भर में मानसिक और न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के लिए 24×7 टेली-मानसिक स्वास्थ्य सेवा (Tele-MANAS) भी संचालित करता है।

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