जमशेदपुर के डिमना लेक में एनडीआरएफ का रेस्क्यू प्रशिक्षण, 72 छात्र-छात्राएं सीख रहे बचाव अभियान की तकनीक

जमशेदपुर: प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए शहर के डिमना लेकर एनडीआरएफ की ओर से छात्रों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मानसून के दौरान संभावित बाढ़, जलभराव और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए जमशेदपुर में विशेष तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की पटना इकाई द्वारा डिमना लेक में पांच दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जा रहा है।

शिविर में सिविल डिफेंस के 72 छात्र-छात्राएं भाग लेकर आपदा प्रबंधन और बचाव कार्यों की बारीकियां सीख रहे हैं।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को बाढ़ और जलभराव जैसी परिस्थितियों में सुरक्षित एवं प्रभावी रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने की तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

एनडीआरएफ के विशेषज्ञ प्रशिक्षक छात्रों को आपदा के समय त्वरित निर्णय लेने, प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने तथा राहत एवं बचाव कार्यों को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने की जानकारी दे रहे हैं।

शिविर में प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) का भी विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षक छात्रों को बता रहे हैं कि दुर्घटना या आपदा की स्थिति में घायल व्यक्तियों को प्रारंभिक चिकित्सा सहायता कैसे प्रदान की जाए, उनकी स्थिति को कैसे स्थिर रखा जाए और अस्पताल पहुंचाने तक किन आवश्यक सावधानियों का पालन किया जाए।

इस प्रशिक्षण में शामिल अधिकांश छात्र-छात्राएं शहरी क्षेत्रों से हैं। उन्हें केवल बाढ़ बचाव ही नहीं, बल्कि भूकंप, आगजनी, सड़क दुर्घटना और अन्य प्राकृतिक एवं मानवजनित आपदाओं से निपटने की भी जानकारी दी जा रही है।

प्रशिक्षण के दौरान मॉक ड्रिल और व्यावहारिक अभ्यास के माध्यम से आपदा की वास्तविक परिस्थितियों का अनुभव कराया जा रहा है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर वे प्रभावी भूमिका निभा सकें।

एनडीआरएफ की पटना इकाई से पहुंचे सब इंस्पेक्टर कबि रंजन ने बताया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण अभियान देशभर में चलाए जा रहे हैं। उनका उद्देश्य आपदा की स्थिति में प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना तथा सुरक्षित और त्वरित रेस्क्यू ऑपरेशन को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन केवल सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी भी आवश्यक है।

उन्होंने सिविल डिफेंस के सदस्यों के साथ-साथ आम नागरिकों से भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेने और आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूक बनने की अपील की।

उनका कहना था कि प्रशिक्षित नागरिक किसी भी आपदा के दौरान शुरुआती राहत एवं बचाव कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं और कई लोगों की जान बचाने में मददगार साबित हो सकते हैं।

इस प्रशिक्षण में प्रशिक्षित छात्र अापदा की घड़ी में मददगार साबित होंगे।

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