जमशेदपुर के देवघर से उठी आदिवासी हक की हुंकार: पेसा व वनाधिकार पर ग्रामीणों ने जताई मजबूत दावेदारी


जमशेदपुर :देवघर ग्राम सभा ही असली प्रशासन है, सरकार नहीं रोक सकती हमारे अधिकार— इसी जज़्बे के साथ रविवार को देवघर में बिदू चन्दन ट्रस्ट फॉर ट्राइबल सेल्फ इंपावरमेंट द्वारा आयोजित कार्यशाला में पाँच पंचायतों के ग्रामीणों ने हक़ की आवाज़ बुलंद की।
प्रशिक्षकों ने साफ कहा कि इको सेंसेटिव जोन में भी सामुदायिक और व्यक्तिगत पट्टा मिल सकता है, और यदि कोई अधिकारी जान-बूझकर आवेदन खारिज करे तो उसके खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत कानूनी कार्रवाई ग्रामीणों का हक़ है।

मुख्य प्रशिक्षक मदन मोहन (अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता) ने कहा कि इको सेंसेटिव जोन में भी सामुदायिक एवं व्यक्तिगत पट्टा दिए जा सकते हैं।
यदि प्रशासन इसे असंभव बताता है, तो यह गुमराह करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पेसा कानून के तहत ग्राम सभा ही प्रशासन का स्वरूप है और उसके निर्णयों का अनुपालन पदाधिकारियों को करना आवश्यक है।

प्रशिक्षक बबलू मुर्मू ने कहा कि यदि किसी का पट्टा आवेदन जानबूझकर खारिज किया जाता है, तो संबंधित व्यक्ति एससी-एसटी एक्ट के तहत कानूनी कार्रवाई कर सकता है।

कार्यक्रम में हरिपदो मुर्मू, लेदेम किस्कू, मांझी बाबा सिमल मुर्मू, पलटन सोरेन, पिथो सोरेन, जयपाल मुर्मू, अजय नाग, रामहरि बास्के, संगीता सोरेन, रोटरी क्लब अध्यक्ष अनिल पांडे सहित कई ग्रामीण व सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

ट्रस्ट की ओर से शिवानी मार्डी, सुनीता टुडू, सालगे टुडू, मोहिनी टुडू, अंकुर, फादर एलेक्स, मैय्या सोरेन, सिमोती बेसरा, सुनील हेम्ब्रम, सुकलाल आदि शामिल हुए।

आयोजकों ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य आदिवासी समुदाय को संविधान प्रदत्त अधिकारों, ग्राम सभा की भूमिका, आदिवासी स्वशासन और वनाधिकार कानून के महत्व पर जागरूक करना तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना है।

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