लिव इन रिलेशन संस्कृति भगवान शिव के वैवाहिक पद्धति को अपमानित कर रहा

जमशेदपुर: आनंद मार्ग प्रचारक संघ का तीन दिवसीय ब्लॉक स्तरीय सेमिनार आनंद मार्ग जागृति में आयोजित किया गया।साधकों को संबोधित करते हुए सेमिनार के ट्रेनर सुनील आनंद ने “प्राण धर्म” विषय पर एक विचारोत्तेजक वक्तव्य जारी किया है, जिसमें मानव जीवन के सार, उसकी गरिमा और उसके सार्वभौमिक उद्देश्य पर गहन प्रकाश डाला गया है। उन्होंने कहा कि लिव इन रिलेशन भारतीय प्राण धर्म को झकझोर दिया है ।

लिव इन रिलेशन संस्कृति भगवान शिव के वैवाहिक पद्धति को अपमानित कर रहा है।

भगवान शिव के आने के पहले सृष्टि पर इसी तरह की व्यवस्था थी। सबसे ज्यादा शोषित महिलाएं ही होती थी ।महिलाओं का ही सबसे ज्यादा शोषण होता था। एक महिला कितने बच्चों की मां होती थी। उनके कितने सारे लोगों से संबंध होता था। इन सब चीजों से समाज आसंगठित हो चुका था। इस व्यवस्था को खत्म करने के लिए भगवान शिव ने विवाह प्रथा को जन्म दिया और खुद सबसे पहला विवाह पार्वती से कर एक नई सभ्यता का उदय हुआ। लिव इन रिलेशन भारतीय प्राण धर्म को झकझोर दिया है। इससे उस सभ्यता का अपमान हो रहा है जो भारत का प्राण धर्म है। भगवान शिव ने ही विवाह प्रथा को स्थापित कर सबसे पहले महिलाओं को सम्मान दिया ।

इस वक्तव्य में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी व्यक्ति, समाज या राष्ट्र की आत्मा उसके “प्राण धर्म” में निहित होती है — वह आंतरिक अनुशासन, जीवन-दृष्टिकोण और मूल्य जो मानव को पशुत्व से उठाकर दिव्यता की ओर ले जाते हैं।

आनंद मार्ग के अनुसार, भारत की सभ्यता सदियों से एक आध्यात्मिक दृष्टिकोण पर आधारित रही है, जहाँ जीवन का प्रत्येक पहलू साधना का ही अंग माना गया। भारत का प्राचीन शिक्षातंत्र, सामाजिक व्यवस्था और सांस्कृतिक मूल्य उसी आध्यात्मिक जीवनदृष्टि से पोषित हुए जिसे “प्राण धर्म” कहा जा सकता है। यह भी बताया गया कि किस प्रकार विदेशी शासन — चाहे वह मुग़ल हो, ब्रिटिश हो या पूंजीवादी शक्तियाँ — भारत के प्राण धर्म को कमजोर करने का प्रयास करते रहे। ब्रिटिशों ने शिक्षा के माध्यम से एक ऐसा वर्ग खड़ा किया जो भारतीय होकर भी भारतीय न रहा। साम्यवाद ने भी, भौतिकवाद के नाम पर, मानव जीवन के आध्यात्मिक मूल्यों को नष्ट करने की कोशिश की। किंतु आनंद मार्ग इस विघटनकारी प्रक्रिया के विरुद्ध खड़ा है।

आनंद मार्ग का सामाजिक-आर्थिक दर्शन, उसकी शिक्षा-नीति और आध्यात्मिक साधना प्रणाली, सभी इस बात के लिए समर्पित है कि प्रत्येक मानव अपने प्राण धर्म का पुनः अन्वेषण कर सके और उसे पूर्ण रूप से जी सके। आनंद मार्ग जीवन को माया नहीं मानता, बल्कि उसे एक सापेक्ष सत्य मानकर, उसकी समस्याओं के समाधान के लिए सक्रिय भागीदारी करता है।

आनंद मार्ग विश्व के सभी देशों को उनके विशिष्ट राष्ट्रीय प्राण धर्म को सुरक्षित रखते हुए, एक सार्वभौमिक मानव धर्म की स्थापना के लिए आमंत्रित करता है।

Join Our Newsletter

यह भी पढ़ें

नई दिल्ली : शाहबाद डेयरी में घर के बाहर फायरिंग से दहशत

नई दिल्ली, 18 जून (आईएएनएस)। आउटर नॉर्थ दिल्ली के शाहबाद डेयरी थाना क्षेत्र के सी-ब्लॉक में देर रात अज्ञात बदमाशों ने एक घर के...

महाराष्ट्र को गढ़चिरौली की 6 लौह अयस्क खदानें आवंटित करें केंद्र, सीएम फडणवीस का विशेष आग्रह

मुंबई, 18 जून (आईएएनएस)। महाराष्ट्र को 'ग्रीन स्टील हब' बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को...

अभिमत

झारखंड राज्यसभा चुनाव से तय होंगे बड़े राजनीतिक संकेत

झारखंड की राज्यसभा सीटों पर 18 जून को होने वाला चुनाव कांग्रेस की राजनीतिक ताकत, इंडिया गठबंधन की एकता और विपक्षी रणनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विश्वसनीय पत्रकारिता के पुरोधा राधेश्याम अग्रवाल : जिनकी विरासत आज भी रोशन कर रही है मीडिया का मार्ग

अग्रवाल साहब ने केवल एक समाचार पत्र की स्थापना नहीं की, बल्कि उन्होंने इस क्षेत्र में पत्रकारिता की ऐसी मजबूत नींव रखी, जिस पर आगे चलकर पूरे मीडिया उद्योग का विस्तार हुआ।

ज़िद

संपादक की पसंद

बिरसानगर पीएम आवास लाभुकों ने सरयू राय को किया सम्मानित, 19 जून को फ्लैट की चाबी मिलने पर जताया आभार

जमशेदपुर : बिरसानगर पीएम आवास योजना के लाभुकों ने सोमवार को जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय का अभिनंदन कर उनके संघर्ष और सहयोग...

बिहार के नालंदा में भीषण सड़क हादसा, तीन किशोरों की मौत से मातम

पटना, 17 जून (आईएएनएस)। बिहार के नालंदा जिले में बुधवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे में तीन किशोरों की मौत हो गई। यह घटना...

Feel like reacting? Express your views here!

यह भी

आपकी राय

अन्य समाचार व अभिमत