ओयो रूम्स के फाउंडर रितेश अग्रवाल की प्रेरक सफलता की कहानी

सड़कों पर सिम बेचने वाले लड़के से लेकर 3.65 बिलियन डॉलर के कारोबार के मालिक तक, रितेश अग्रवाल ने अद्भुत सफर तय किया।

कोविड-19 के बाद के दौर में, ओयो रूम्स ने 229 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया, जो 35 देशों और 1,74,000 होटलों के साथ काम कर रहा है।

हॉस्पिटैलिटी चैन ओयो रूम्स के फाउंडर रितेश अग्रवाल यानी महज कुछ साल पहले दिल्ली की सड़कों पर सिम कार्ड बेचने वाला एक लड़का आज दुनिया की यंग बिलेनियर लिस्ट में शामिल है।

आज दुनिया के 80 देश के 800 शहरों में रितेश का होटल कारोबार है और 31 वर्ष की आयु में उसके कारोबार की कुल कीमत 3.65 billion dollar है। इस बार चर्चा करेंगे उसी रितेश की प्रेरक कहानी की।

रितेश अग्रवाल का जन्म 16 नवंबर 1993 को कटक (उड़ीसा) में एक साधारण मारवाड़ी परिवार में हुआ। माता-पिता ने उन्हें अच्छी एजुकेशन दिलाने के पूरे प्रयास किये। पढ़ाई के लिए रितेश ने दिल्ली के इंडियन स्कूल आफ बिजनेस अकादमी में एडमिशन लिया, लेकिन दिमाग में उद्यमी बनने का सपना हावी था और पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। आईआईटी प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए कोटा भी गए थे। वहां भी सफलता हाथ नहीं लगी।

इन विफलताओं के बाद वर्ष 2012 में रितेश ने अपना एक स्टार्टअप शुरू किया, सिर्फ 19 वर्ष की उम्र में। लेकिन ओरावेल नाम के इस स्टार्टअप में रितेश को भारी घाटा हुआ और उनके पैसे नहीं बचे। वह वापस दिल्ली आ गए।

पैसे जब बिल्कुल खत्म हो गए, तब रितेश ने दिल्ली की सड़कों पर सिम बेचना शुरू किया। रितेश को घूमने का बड़ा शौक था। इसी क्रम में जब वह घूमने कहीं जाते और होटल में ठहरते तो उनका ऑब्जरवेशन यह रहा कि बड़े-बड़े होटलों में तो भर भर के लोग आते हैं, ब्रांड नाम की वजह से। लेकिन उसके बगल में ही कुछ ऐसे होटल भी हैं जिनके पास कमरे हैं, सर्विस भी ठीक-ठाक है, प्राइम लोकेशन भी है लेकिन अतिथियों का ठहराव वहां कम है। अब यहां डिमांड एंड सप्लाई के बीच का गैप को पाटने की रितेश ने ठानी। छोटी सी उम्र में ही रितेश लगभग 200 छोटे होटलों में ठहरे।

रितेश ने यह समझा कि होटल वालों को यह बताना जरूरी है कि कैसे किफायती दामों पर रूम को रेंट किया जा सकता है। रितेश ने होटल वालों को यह समझने की कोशिश की कि आप अपने खाली पड़े कमरों को मेरी वेबसाइट के जरिए फुल कर दें लेकिन किफायती दामों पर। मिसाल के लिए, यदि आपके कमरे की कीमत ₹2500 है तो उसे मेरे वेबसाइट के जरिए ₹1500 में दें।

इससे खाली पड़ी कमरों से आमदनी हो जाएगी। इसके लिए रितेश ने कुछ होटल में इंटीरियर और सजावट अपनी ओर से लगाया। कमरों में टीवी, पेंट, फिनिशिंग इत्यादि अपनी टीम की ओर से मेंटेन करना शुरू किया और फिर Oyo Rooms वेबसाइट के जरिए उन कमरों का गेस्ट को मिलना तय हुआ।

रितेश होटल वालों को यह समझाने में कामयाब रहे कि आप अपने कमरों की occupancy का औसत निकाल कर अपने खाली पड़े कमरों को Oyo Rooms के जिम्मे दे दें। इन कमरों से जो कमाई होगी उसमें दोनों पार्टी अपना-अपना शेयर ले लेंगे। यह एक विन-विन सिचुएशन थी, दोनों पक्षों के लिए।

अब यह सवाल स्वाभाविक रूप से आपके मन में उठेगा कि यह सब करने के लिए रितेश के पास पैसे कहां से आए। दरअसल वर्ष 2013 में रितेश को रियल फेलोशिप के तहत 2 साल के लिए 75 लाख रुपए मिले थे और 2013 में ही रितेश ने ओयो रूम्स की शुरुआत की।

ग्राहकों की संतुष्टि के लिए रितेश ने इस बात को सुनिश्चित किया कि उनकी वेबसाइट पर किसी होटल का अगर कोई रूम दिखाया जा रहा है तो वह वहां की रियल फोटो होगी। ओयो रूम्स का ही कर्मचारी उस होटल में जाकर वहां के कमरों की फोटो खींचकर लायेगा।

धीरे-धीरे ग्राहक ओयो रूम्स से जुड़ते चले गए और सिर्फ 2 साल बाद 2015 में रितेश अग्रवाल ने 184 करोड रुपए की सीरीज ए फंडिंग उठा ली। वर्ष 2016 में रितेश ने देश के बाहर पहली बार मलेशिया में अपना व्यापार शुरू कर दिया । वर्ष 2018 में चीन और नेपाल में अपना व्यापार फैला लिया।

रितेश ने एशिया के बाहर यूनाइटेड किंगडम (यू के) में भी ओयो रूम्स के व्यापार का विस्तार किया। वर्ष 2019 में ओयो रूम्स की वैल्यूएशन 75,000 करोड रुपए पहुंच गई। वर्ष 2020 में ओयो रूम्स के 5 करोड़ एप दुनिया भर में डाउनलोड हुए। फिर फोर्ब्स मैगजीन में दुनिया भर के जाने-माने Under-30 entrepreneurs में की सूची में उनका नाम आ गया। ओयो रूम्स जिस समय बुलंदियां छू रहा था, उसी समय कोरोना भी जोर पकड़ रहा था। कोरोना में टूरिज्म बंद हुआ, लोगों का होटल में आना बंद हो गया। कमाई घट गई।

उन होटलों के लिए ओयो रूम्स ने जो कर्मचारी दुनिया भर में रख लिए थे, धीरे-धीरे उनकी सैलरी देने में भी दिक्कत आने लगी ।नतीजा, ओयो रूम्स ने कर्मचारियों की छंटनी शुरू कर दी। इससे व्यापार जगत में उनका नाम खराब हुआ। सितारे गर्दिश में आ गए। लेकिन कोरोना कल खत्म हुआ और ओयो रूम्स ने फिर से अपनी वापसी की कोशिश की। परिणाम यह आया कि आज फिर ओयो रूम्स 35 देशों में 1,74,000 होटल्स के साथ चल रहा है। आज ओयो रूम्स के 13 करोड़ ऐप डाउनलोड हो चुके हैं। दुनिया भर में जो सबसे ज्यादा एप्लीकेशंस डाउनलोड होते हैं, टॉप फाइव ऐप्स में ओयो रूम्स का नाम आता है। वित्त वर्ष 2024 में ओयो रूम्स का रेवेन्यू 5389 करोड़ रुपए रहा है।

जहां पहले लोकल होटल ओयो रूम्स के साथ जुड़े थे, अब दुनिया के बड़े-बड़े ब्रांड ओयो रूम्स के साथ जुड़ रहे हैं। संडे, टाउन हाउस, पैलेट ऐसे ही कुछ नाम है। इस वर्ष ओयो रूम्स का मुनाफा (प्रॉफिट आफ्टर टैक्स) 229 करोड रुपए रहा है। पोस्ट कॉविड पीरियड में वैसे भी hospitality की बिजनेस चल निकली है। औसतन हर होटल 94 से 95 फ़ीसदी बुकिंग के साथ occupied है।

कोरोना काल में बहुत बुरा वक्त देखने वाले रितेश अग्रवाल अगर हिम्मत हार गए होते तो उसी वक्त बोरिया बिस्तर समेट कर अपना बिजनेस बंद कर चुके होते। लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत पर विश्वास किया। आज फिर उनके सितारे बुलंद है। हाल ही में ओयो रूम्स ने फ्रांस की एक बड़ी कंपनी को खरीदा है।

Moral of the story: Positive thought process can turn around the situation.

सड़कों पर सिम बेचने वाले लड़के से लेकर 3.65 बिलियन डॉलर के कारोबार के मालिक तक, रितेश अग्रवाल ने अद्भुत सफर तय किया।
सड़कों पर सिम बेचने वाले लड़के से लेकर 3.65 बिलियन डॉलर के कारोबार के मालिक तक, रितेश अग्रवाल ने अद्भुत सफर तय किया।

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