झारखंड के मंत्री ने पीएम मोदी के दौरे को सवालों से चुनौती दी
स्वास्थ्य मंत्री ने प्रधानमंत्री की जमशेदपुर यात्रा के दौरान बुनियादी ढांचे और आदिवासी कल्याण के मुद्दे उठाए
प्रमुख बिंदु:
• मंत्री ने प्रधानमंत्री की सड़क यात्रा पर सवाल उठाए, भाजपा के कानून-व्यवस्था के दावों को चुनौती दी
• सरना कोड लागू करने और ओबीसी आरक्षण की मांग उठाई गई
• एनएच-33 के अधूरे निर्माण और राज्य के वित्तीय बकाए पर चिंता व्यक्त की गई
जमशेदपुर – झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जमशेदपुर दौरे के दौरान उन्हें कई चुनौतियां दीं, जिनमें बुनियादी ढांचे के विकास और जनजातीय कल्याण नीतियों पर सवाल उठाए गए।
गुप्ता की प्रेस विज्ञप्ति में प्रधानमंत्री की 130 किलोमीटर की सुगम सड़क यात्रा पर प्रकाश डाला गया।
यह तथ्य राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था के भाजपा के दावों का खंडन करता है।
एक अनाम सरकारी सूत्र ने टिप्पणी की, “प्रधानमंत्री का एनएच-33 पर सफर करना भाजपा के आरोपों पर सवाल उठाता है।”
मंत्री ने आदिवासियों के लिए सरना धर्म संहिता के कार्यान्वयन पर स्पष्टता की मांग की।
उन्होंने पिछड़े वर्गों के लिए 27% आरक्षण के बारे में भी पूछा, तथा मोदी द्वारा अपनी ओबीसी पृष्ठभूमि का बार-बार उल्लेख करने का हवाला दिया।
गुप्ता ने झारखंड की निर्वाचित सरकार को लेकर भाजपा की मंशा पर सवाल उठाया।
उन्होंने विशेष रूप से पूछा कि क्या चंपई सोरेन को एनडीए का मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया जाएगा।
विज्ञप्ति में केंद्र सरकार द्वारा झारखंड की वित्तीय बकाया राशि रोके जाने का मुद्दा उठाया गया।
गुप्ता ने राज्य को बकाया 1.36 लाख करोड़ रुपये की देरी से जारी करने के लिए स्पष्टीकरण मांगा।
मंत्री ने चांडिल गोलचक्कर के पास एनएच-33 पर अधूरे निर्माण कार्य की ओर ध्यान दिलाया।
उन्होंने इन देरी के कारण बार-बार होने वाले यातायात जाम और दुर्घटनाओं पर चिंता व्यक्त की।
एक स्थानीय निवासी ने सवाल किया, “क्या अधूरे एनएच-33 परियोजना की जांच होगी?”
गुप्ता की प्रेस विज्ञप्ति का उद्देश्य प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान विभिन्न मुद्दों की ओर ध्यान आकर्षित करना था।
इसमें बुनियादी ढांचे के विकास, जनजातीय कल्याण और राज्य के वित्त से संबंधित चिंताओं पर प्रकाश डाला गया।
