तांगरैन स्कूल में पारंपरिक भूमिज संगीत और नृत्य कार्यशाला का उद्घाटन
टाटा स्टील फाउंडेशन और आदिवासी रोमोज अखड़ा द्वारा टांगरेन स्कूल में पारंपरिक भूमिज संगीत और नृत्य पर पांच दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन किया गया।
कार्यशाला का उद्देश्य युवाओं के बीच भूमिज सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और बढ़ावा देना है।
जमशेदपुर – कार्यशाला का उद्देश्य युवाओं के बीच भूमिज सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और बढ़ावा देना है।
उत्क्रमित मध्य विद्यालय टांगराईन में पारंपरिक भूमिज संगीत वाद्ययंत्र एवं नृत्य पर पांच दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन किया गया। टाटा इस्पात फाउंडेशन और आदिवासी रोमोज अखाड़ा।
6 अगस्त से 10 अगस्त तक आयोजित कार्यशाला का उद्घाटन प्राचार्य अरविंद तिवारी, समाजसेवी मोहनलाल सरदार, उज्ज्वल मंडल व अन्य गणमान्य लोगों ने किया।
परियोजना समन्वयक बाबूलाल गोईपाई ने बताया कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य भूमिज समुदाय की पारंपरिक संस्कृति को संरक्षित एवं संवर्धित करना है, जो विलुप्त होने के खतरे का सामना कर रही है।
कार्यशाला में बच्चों में अपनी संस्कृति के प्रति रुचि और उत्साह पैदा करने के लिए संगीत वाद्ययंत्र बजाने, नृत्य और संगीत की मूल बातें सिखाई जाएंगी।
कार्यशाला के प्रशिक्षकों में सुभाष सरदार, दशरथ सरदार, सामू सरदार, सरस्वती सरदार, डुमनी मुर्मू और संगीता समद शामिल हैं।
इस पहल का उद्देश्य युवा पीढ़ी के बीच भूमिज विरासत के प्रति गौरव और निरंतरता की भावना को बढ़ावा देना है।
प्रतिभागियों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपनी सांस्कृतिक जड़ों की गहरी समझ और सराहना हासिल करें।
यह सहयोगात्मक प्रयास आधुनिकीकरण के दौर में सांस्कृतिक संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालता है।
समुदाय के सदस्यों और आयोजकों ने आशा व्यक्त की कि कार्यशाला भूमिज परंपराओं को बनाए रखने और मनाने के लिए चल रहे प्रयासों को प्रेरित करेगी।
