जमशेदपुर कोषागार की सख्त जांच, डीसी ने 5 साल के आवंटन-निकासी मिलान के दिए निर्देश
जमशेदपुर : झारखंड के हजारीबाग, बोकारो और रांची कोषागारों में फर्जी निकासी के मामलों के बाद अब जमशेदपुर कोषागार पर भी प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। इसी कड़ी में उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने शुक्रवार को कोषागार का विस्तृत निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने वित्तीय अभिलेखों, भुगतान प्रणाली और विभागीय समन्वय की गहन समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि सभी वित्तीय कार्यों में पारदर्शिता, सटीकता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
उपायुक्त ने विशेष रूप से यांत्रिकी विभागों द्वारा पिछले 5 वर्षों में प्राप्त आवंटन और की गई निकासी का WAMIS के माध्यम से मिलान करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि विभागवार सभी अभिलेखों का पुनः सत्यापन कर यह सुनिश्चित किया जाए कि राशि का उपयोग नियमों के अनुरूप हुआ है। किसी भी तरह की गड़बड़ी पाए जाने पर त्वरित कार्रवाई करने को कहा गया है।
इसके साथ ही सभी यांत्रिकी विभागों को निर्देश दिया गया कि पूर्ण हो चुकी योजनाओं के उपयोगिता प्रमाण पत्र (UC) 10 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से जमा करें।
निरीक्षण के क्रम में सभी निकासी एवं व्ययन पदाधिकारियों (DDOs) को भी पूर्व में हुई निकासी की पूरी प्रक्रिया की गहन जांच करने का निर्देश दिया गया। उपायुक्त ने कहा कि हर भुगतान की स्वीकृति, अभिलेख और बैंक विवरण का सावधानीपूर्वक मिलान किया जाए, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता की गुंजाइश न रहे।
उपायुक्त ने दोहराया कि कोषागार की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और शुचिता बनाए रखना अनिवार्य है। उन्होंने कोषागार पदाधिकारी को सभी विपत्रों की सूक्ष्म जांच करने और नियमों के अनुपालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान लंबित मामलों और वित्तीय प्रगति की भी समीक्षा की गई तथा सभी कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिया गया।
