चाईबासा से रांची तक ‘नो एंट्री न्याय पदयात्रा’ 26 अप्रैल से, सड़क सुरक्षा को लेकर बड़ा जनआंदोलन
चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम में चाईबासा बाइपास सड़क पर भारी वाहनों के आवागमन पर रोक की मांग को लेकर 26 अप्रैल से ‘नो एंट्री न्याय पदयात्रा’ शुरू होगी। यह यात्रा 1 मई को रांची पहुंचकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपेगी।
‘नो एंट्री न्याय पदयात्रा’ को लेकर पश्चिमी सिंहभूम जिले में जनआंदोलन तेज हो गया है। चाईबासा बाइपास सड़क (डोबरोसाई—गितिलपी रोड) और एमडीआर-177 पर दिन के समय भारी वाहनों के परिचालन पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग को लेकर 26 अप्रैल से पदयात्रा शुरू होगी, जो 1 मई को रांची पहुंचेगी। इस दौरान राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
यह पदयात्रा सड़क सुरक्षा से जुड़ी गंभीर समस्याओं के विरोध में आयोजित की जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, चाईबासा बाइपास सड़क पर भारी वाहनों के अनियंत्रित परिचालन के कारण लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं। औसतन हर महीने 4 से 5 हादसे सामने आ रहे हैं, जिनमें कई लोगों की जान जा चुकी है। इस मार्ग से प्रतिदिन हजारों छात्र-छात्राएं, नौकरीपेशा लोग और आम नागरिक गुजरते हैं, जिससे जोखिम और बढ़ गया है। इसके बावजूद प्रशासन द्वारा अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाने से लोगों में आक्रोश है।
गांव-गांव में तेज हुआ जनसंपर्क अभियान
पदयात्रा को सफल बनाने के लिए आंदोलन समिति द्वारा गांव-गांव में जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है। मंगलवार को सिंहपोखरिया गांव में आयोजित बैठक में समिति के संयोजक रमेश बालमुचू ने लोगों से पदयात्रा में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ सड़क का मुद्दा नहीं, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा और जीवन से जुड़ा सवाल है।
आंदोलन को व्यापक समर्थन दिलाने के लिए स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों से भी संपर्क किया जा रहा है। समिति का कहना है कि इस मार्ग पर सबसे अधिक खतरा छात्रों को है। तांबो, तुईवीर, सरजोमगुटू, हेसाबासा, गितिलपी, महुलसाई और टुंगरी सहित कई क्षेत्रों के लोग भारी वाहनों की आवाजाही से परेशान हैं। ऐसे में इन इलाकों के लोगों से भी आंदोलन में जुड़ने की अपील की गई है।
यह पदयात्रा अब एक बड़े जनआंदोलन का रूप लेती जा रही है। 26 अप्रैल से 1 मई तक चलने वाली यह यात्रा सरकार के लिए बड़ा संदेश मानी जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि सरकार इस पर गंभीरता से ध्यान देती है, तो हजारों लोगों को राहत मिल सकती है, अन्यथा आंदोलन और उग्र हो सकता है।
पहले भी हो चुका है आंदोलन
इस मुद्दे को लेकर पहले भी आंदोलन हो चुका है। 27 अक्टूबर 2025 को तांबो चौक पर सड़क जाम के दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़प हुई थी। इस मामले में 70 से अधिक नामजद और 700 से ज्यादा अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। 16 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था, जिन्हें बाद में जमानत मिल गई। फिलहाल यह मामला न्यायालय में लंबित है।
