झामुमो और कांग्रेस नेताओं ने सम्मान का स्वागत किया, भारत रत्न की मांग दोहराई
मुख्य बिंदु:
- शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किया जाएगा
- राष्ट्रपति भवन में मंगलवार को होगा अलंकरण समारोह
- नेताओं ने भारत रत्न देने की मांग फिर उठाई
रांची — झारखंड आंदोलन के अग्रणी नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरू शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान दिए जाने की घोषणा से प्रदेशभर में हर्ष का वातावरण बना हुआ है।
राज्य के विभिन्न दलों के नेताओं ने इस फैसले की प्रशंसा की है। उनका कहना है कि यह सम्मान सोरेन के दशकों लंबे संघर्ष और झारखंड के निर्माण में उनकी भूमिका को मान्यता देता है।
झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रवक्ता मनोज पांडे ने आईएएनएस के साथ बातचीत में इस सम्मान को पूरे राज्य के लिए गर्व का विषय बताया। उन्होंने यह भी कहा कि सोरेन वास्तव में भारत रत्न के योग्य थे।
हालांकि, उन्होंने केंद्र सरकार के इस निर्णय का भी आभार व्यक्त किया। पांडे के अनुसार, शिबू सोरेन सिर्फ एक राजनेता नहीं थे, बल्कि स्वयं एक विचारधारा और संस्था के समान थे।
उनके मुताबिक सोरेन का जीवन-दर्शन आगे आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करता रहेगा। इसी क्रम में उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि सोरेन के संघर्षों को देशभर के स्कूली पाठ्यक्रम में जोड़ा जाए।
उनका मानना है कि इससे युवा पीढ़ी आदिवासी अधिकारों और झारखंड आंदोलन के इतिहास को बेहतर तरीके से समझ सकेगी। दूसरी ओर, कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने भी इस सम्मान पर खुशी जताई।
उन्होंने इसे केवल सोरेन परिवार तक सीमित न मानते हुए पूरे झारखंड का गौरव बताया। सिन्हा के अनुसार, सोरेन ने जंगल, जमीन और आदिवासी हक की आवाज को गांव-गांव से उठाकर संसद के गलियारों तक पहुंचाने का ऐतिहासिक कार्य किया था।
उन्होंने कहा, “पद्म भूषण मिलना स्वाभाविक परिणाम है, लेकिन भारत रत्न मिलने पर यह सम्मान और भी सार्थक हो जाता।” बता दें कि शिबू सोरेन का राजनीतिक सफर झारखंड पृथक राज्य आंदोलन से शुरू हुआ था।
वह राज्य के गठन के बाद तीन बार मुख्यमंत्री और केंद्र में मंत्री भी रह चुके थे। उनके निधन के बाद उनके पुत्र हेमंत सोरेन वर्तमान में राज्य की कमान संभाल रहे हैं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित अलंकरण समारोह में दिशोम गुरू को यह सम्मान प्रदान करेंगी। समारोह में उनकी पत्नी रूपी सोरेन परिवार की ओर से यह सम्मान ग्रहण करेंगी।
इस अवसर पर झामुमो और अन्य सहयोगी दलों के कई वरिष्ठ नेताओं के भी दिल्ली में मौजूद रहने की संभावना है। पार्टी कार्यकर्ताओं में भी इस सम्मान को लेकर उत्साह का माहौल देखा जा रहा है।
राज्यभर में आदिवासी संगठनों ने भी इस घोषणा का स्वागत करते हुए इसे आदिवासी समाज के संघर्ष की जीत बताया है। कई स्थानीय इकाइयों ने जश्न मनाने की भी योजना बनाई है।
(आईएएनएस से प्राप्त इनपुट पर आधारित)
