सुरक्षित पलायन और बाल श्रम उन्मूलन हमारी साझा जिम्मेदारी: कुंवरजी बावलिया

गांधीनगर, 16 जून (आईएएनएस)। गांधीनगर स्थित सरदार पटेल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (एसपीआईपीए) में दो दिवसीय अंतरराज्यीय संवाद का आयोजन किया गया, जिसमें इस बात पर खास जोर दिया गया कि प्रवासी मजदूरों के बच्चे शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और सुरक्षा प्रणालियों के दायरे से बाहर न रह जाएं।

उद्घाटन सत्र में बोलते हुए गुजरात के श्रम, कौशल विकास और रोजगार मंत्री कुंवरजी बावलिया ने कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि के लिए पलायन जरूरी है, लेकिन इससे अक्सर बच्चे शोषण, तस्करी और बाल श्रम के ज्यादा जोखिम में पड़ जाते हैं।

बावलिया ने कहा कि सुरक्षित पलायन और बाल श्रम को खत्म करना एक सामाजिक, आर्थिक और मानवीय जिम्मेदारी है जिसे हम सभी को मिलकर पूरा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि श्रम नीति को प्रशासनिक ढांचों से आगे बढ़कर हर मजदूर के परिवार और बच्चे तक पहुंचना चाहिए।

‘बाल श्रम के खिलाफ विश्व दिवस’ पर आयोजित इस कार्यशाला में गुजरात, राजस्थान, बिहार, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के प्रतिनिधियों के साथ-साथ नीति-निर्माता, बाल अधिकार संगठन और विषय विशेषज्ञ शामिल हुए। उन्होंने बाल श्रम को रोकने और कमजोर वर्ग के बच्चों की सुरक्षा के लिए रणनीतियों पर चर्चा की।

बावलिया ने कहा कि प्रवासी मजदूर उद्योग, निर्माण, सेवा और कृषि क्षेत्रों में विकास को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं और उन्हें राष्ट्र-निर्माण का स्तंभ बताया। भारत के प्रमुख औद्योगिक राज्यों में से एक होने के नाते गुजरात देशभर से लाखों मजदूरों को आकर्षित करता है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

हालांकि, उन्होंने कहा कि पलायन से अक्सर बच्चों की शिक्षा में रुकावट आती है, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच प्रभावित होती है और कई बच्चे सामाजिक सुरक्षा और बाल संरक्षण प्रणालियों से बाहर रह जाते हैं। ऐसी स्थितियां बाल श्रम, बाल तस्करी और शोषण के अन्य रूपों को जन्म दे सकती हैं।

मंत्री ने कहा कि राज्य ने बाल और किशोर श्रम को खत्म करने के लिए काम कर रहे जिला-स्तरीय टास्क फोर्स को मजबूत किया है और बच्चों के बचाव, पुनर्वास और मुख्यधारा में वापसी से जुड़े सरकारी विभागों के बीच तालमेल बेहतर किया है।

मजदूरों के ऑनलाइन पंजीकरण, जागरूकता कार्यक्रमों और सामाजिक सुरक्षा कवरेज का दायरा बढ़ाने के प्रयास भी किए जा रहे थे। उन्होंने कहा कि बाल श्रम को खत्म करने के लिए सिर्फ कानूनी कार्रवाई से ज्यादा की जरूरत है। इसके लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि हर बच्चे को अच्छी शिक्षा, सुरक्षित माहौल, स्वास्थ्य सेवा और विकास के समान अवसर मिलें।

गुजरात राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष धर्मिष्ठा गज्जर ने बाल श्रम को केवल कानूनी उल्लंघन नहीं, बल्कि बच्चों के अधिकारों, आकांक्षाओं और भविष्य पर सीधा हमला बताया। उन्होंने कहा कि हर बच्चे को सुरक्षित बचपन, अच्छी शिक्षा, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन का समान अधिकार है।

लेबर कमिश्नर के.डी. लखानी ने कहा कि बाल मजदूरी को शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी एक व्यापक सामाजिक समस्या के तौर पर देखा जाना चाहिए।

महात्मा गांधी लेबर इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर जनरल प्रवीण सोलंकी ने कहा कि बाल मजदूरी को व्यापक सामाजिक-आर्थिक हकीकतों से अलग नहीं किया जा सकता।

इस कार्यक्रम में यूनिसेफ के चीफ फील्ड ऑफिस प्रतिनिधि डॉ. नारायण गावकर ने कहा कि गुजरात के औद्योगिक विकास ने दूसरे राज्यों से बड़े पैमाने पर लोगों को आकर्षित किया है और इस बात पर जोर दिया कि आर्थिक विकास बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य या सुरक्षा की कीमत पर नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यूनिसेफ ने बाल मजदूरी को रोकने के लिए कई साल तक सरकारों और संस्थानों के साथ काम किया है और परिवारों को मजबूत करने ताकि वे कमजोर न पड़ें, शिक्षा और कौशल विकास के जरिए किशोरों की मदद करने और स्कूलिंग तक बिना रुकावट पहुंच पक्का करने पर ध्यान दे रहा है।

डीकेएमवीसी

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