जमशेदपुर : केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने बुधवार को मानगो स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग पर निर्माणाधीन एलिवेटेड कॉरिडोर (फ्लाइओवर) परियोजना का निरीक्षण किया।
इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्य की प्रगति का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों से परियोजना की वर्तमान स्थिति की जानकारी प्राप्त की। निरीक्षण के दौरान उनके साथ विद्युत वरण महतो सहित भाजपा के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
करीब 10 किलोमीटर लंबी इस महत्वाकांक्षी परियोजना को जमशेदपुर की प्रमुख आधारभूत संरचना योजनाओं में शामिल किया गया है। निरीक्षण के बाद केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार विकास और जनकल्याण से जुड़ी परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने विश्वास जताया कि एलिवेटेड कॉरिडोर के पूरा होने के बाद मानगो, डिमना चौक और आसपास के इलाकों में लंबे समय से बनी हुई ट्रैफिक जाम की समस्या में उल्लेखनीय कमी आएगी।
सतीश चंद्र दुबे ने बताया कि परियोजना का एक हिस्सा वन विभाग की भूमि से संबंधित है, जिसके कारण निर्माण कार्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं मिलने के कारण कार्य की रफ्तार अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सकी है।
उन्होंने राज्य सरकार और वन विभाग से बेहतर समन्वय स्थापित कर आवश्यक अनुमति एवं भूमि उपलब्ध कराने की अपील की, ताकि परियोजना को निर्धारित समय सीमा में पूरा किया जा सके।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण से शहर की यातायात व्यवस्था अधिक सुगम होगी और क्षेत्र के समग्र विकास को भी नई दिशा मिलेगी। इससे प्रतिदिन हजारों लोगों को आवागमन में सुविधा होगी तथा यात्रा का समय भी कम होगा।
उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद निर्माण कार्य में तेजी आएगी और वर्ष 2026 के अंत तक एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण पूरा कर लिया जाएगा। इसके पूरा होने से जमशेदपुर को आधुनिक यातायात अवसंरचना का एक महत्वपूर्ण उपहार मिलेगा।
बहरहाल योजना अच्छी है। उपयोगी है और जमशेदपुर के लोगों के लिए सौगात है लेकिन सवाल उठ रहा है कि कोई भी योजना तय सीमा में पूरा नहीं हो पा रही है। यह व्यवस्था पर सवाल है। डिमना रोड फ्लाईओवर भी समय पर पूरा नहीं हो पा रहा है। 2026 तक एलिवेटेड कोरिडोर परियोजना के पूरा होने पर संदेह है। परियोजना यदि तय समय पर पूरा नहीं हो पाती है तो सरकार के राजस्व और समय दोनों का नुकसान होता है।
