जमशेदपुर : पूर्वी सिंहभूम के लिए एक बड़ी औद्योगिक खुशखबरी सामने आई है। दो दशक से बंद पड़े पाथरगोड़ा तांबा खदान और नए चिह्नित चापरी कॉपर ब्लॉक में जल्द ही खनन गतिविधियां शुरू हो सकती हैं। जिंदल स्टील द्वारा इन परियोजनाओं के संचालन की तैयारी से क्षेत्र में रोजगार, उद्योग और आर्थिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।
इस पहल से क्षेत्र की विशाल खनिज संपदा का दोहन संभव होगा, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और देश में तांबे के घरेलू उत्पादन को भी मजबूती मिलेगी।
जानकारी के अनुसार, जिंदल स्टील की तकनीकी टीम ने हाल ही में दोनों खनन क्षेत्रों का विस्तृत सर्वेक्षण पूरा कर लिया है। फिलहाल यह प्रस्ताव झारखंड सरकार और खान एवं भूविज्ञान विभाग की अंतिम प्रशासनिक स्वीकृति की प्रतीक्षा में है।
खनन विशेषज्ञों के मुताबिक, पाथरगोड़ा और चापरी दोनों ब्लॉकों में मिलाकर लगभग 10.4 करोड़ टन तांबा अयस्क (कॉपर ओर) का भंडार मौजूद है। इनमें चापरी ब्लॉक में करीब 6.4 करोड़ टन और पाथरगोड़ा खदान में लगभग 4 करोड़ टन तांबा अयस्क होने का अनुमान है।
पाथरगोड़ा खदान का पुनरारंभ विशेष महत्व रखता है। यह भूमिगत खदान कभी क्षेत्र की प्रमुख तांबा उत्पादक इकाइयों में शामिल थी और वर्ष 2000 तक यहां से प्रतिवर्ष लगभग दो लाख टन तांबा अयस्क का उत्पादन होता था। हालांकि बढ़ती लागत और आर्थिक घाटे के कारण खनन कार्य बंद कर दिया गया था। पिछले 25 वर्षों से यह खदान निष्क्रिय पड़ी हुई है।
वर्तमान में दोनों खदानें हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (एचसीएल) के स्वामित्व में हैं। कंपनी के पास झारखंड सरकार द्वारा वर्ष 2043 तक वैध खनन पट्टा है। प्रस्तावित माइन डेवलपर-कम-ऑपरेटर (एमडीओ) मॉडल के तहत जिंदल स्टील खनन कार्यों के संचालन के साथ-साथ आवश्यक बुनियादी ढांचे, जैसे कि कंसंट्रेटर प्लांट, का विकास करेगी। हालांकि भूमि और खदानों का स्वामित्व एचसीएल के पास ही रहेगा।
अधिकारियों के अनुसार, खनन और उत्पादन से जुड़ी पूरी लागत जिंदल स्टील वहन करेगी। इसके बदले तांबे की बिक्री से प्राप्त राजस्व का पूर्व निर्धारित हिस्सा राजस्व साझेदारी समझौते के तहत एचसीएल को दिया जाएगा। वहीं रॉयल्टी और करों का भुगतान एचसीएल के माध्यम से राज्य सरकार को किया जाता रहेगा।
उद्योग जगत के जानकारों का मानना है कि पाथरगोड़ा और चापरी खदानों के पुनर्जीवन से पूर्वी सिंहभूम देश के प्रमुख तांबा उत्पादन केंद्रों में शामिल हो सकता है। इससे न केवल खनिज उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
परिवहन, प्रसंस्करण और अन्य सहायक उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे जमशेदपुर और आसपास के क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि परियोजना के शुरू होने से क्षेत्र से होने वाले पलायन में कमी आएगी और खनन से जुड़े व्यवसायों एवं सेवाओं में स्थानीय लोगों के लिए स्थायी आजीविका के अवसर विकसित होंगे।
तांबा खदान खुलने से जिले के साथ-साथ राज्य के विभिन्न जिले के बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा।
