अशोक गहलोत के ‘भाजपा पर प्रतिबंध’ से जुड़े बयान पर आठवले का पलटवार, ‘यह लोकतंत्र के खिलाफ’

मुंबई, 15 जून (आईएएनएस)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर प्रतिबंध लगाने संबंधी बयान पर केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास आठवले ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

आठवले ने आईएएनएस से बातचीत में गहलोत के बयान को हास्यास्पद बताते हुए कहा कि एक पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में उन्हें इस प्रकार की टिप्पणी करने से बचना चाहिए। गहलोत का कहना कि यदि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी आज जीवित होतीं तो भाजपा पर प्रतिबंध लगा देतीं, लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। भाजपा लोकतंत्र में विश्वास रखने वाली पार्टी है और प्रधानमंत्री मोदी सभी वर्गों को साथ लेकर देश के विकास के लिए कार्य कर रहे हैं।

अशोक गहलोत ने हाल ही में आरोप लगाया था कि भाजपा धर्म के मुद्दे को आधार बनाकर देश में धार्मिक ध्रुवीकरण कर रही है और इससे राष्ट्र कमजोर हो रहा है। इस पर पलटवार करते हुए रामदास आठवले ने कहा कि भारत विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों का देश है, जहां सभी समुदायों के लोग अपने-अपने धर्म और परंपराओं के अनुसार जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस की राजनीति हमेशा से समाज को बांटने वाली रही है और उसकी नीतियों में ‘बांटो और राज करो’ की मानसिकता दिखाई देती है। भाजपा सभी धर्मों और वर्गों को साथ लेकर चलने में विश्वास करती है।

इस बीच, पश्चिम बंगाल की सियासत और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बागी सांसदों के नई राजनीतिक राह चुनने के मुद्दे पर भी रामदास आठवले ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बागी सांसदों ने त्रिपुरा की एक राजनीतिक पार्टी के साथ जाने का फैसला किया है।

आठवले ने कहा कि उन्हें अधिक खुशी होती यदि ये नेता रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई) में शामिल होते, क्योंकि उनकी पार्टी मणिपुर और नागालैंड जैसे राज्यों में मान्यता प्राप्त है। यदि ये नेता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों से जुड़ी पार्टी में आते तो यह बेहतर होता, लेकिन उन्होंने त्रिपुरा की पार्टी और एनडीए के साथ जाने का निर्णय लिया है, जिसका वह स्वागत करते हैं।

महिला आरक्षण विधेयक के मुद्दे पर भी आठवले ने विपक्षी दलों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस जैसे दलों के कारण लंबे समय तक महिला आरक्षण विधेयक अटका रहा, लेकिन अब इसके पारित होने की राह आसान हो सकती है।

एएसएच

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