बिहार के तीन पारंपरिक उत्पादों को जीआई टैग मिलने से विशिष्ट पहचान को मिलेगी मजबूती : नीतीश कुमार

पटना, 14 जून (आईएएनएस)। बिहार के तीन पारंपरिक उत्पादों, नालंदा का बावन बूटी, गया का पत्थरकट्टी एवं भोजपुर के पीढ़िया पेंटिंग को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग दिया गया है। इस उपलब्धि को राज्य के शिल्पकार, बुनकर एवं ग्रामीण उत्पादक समुदाय गर्व का विषय बता रहा है। इस बीच, जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसे प्रसन्नता का विषय बताते हुए कहा कि इससे इन उत्पादों की प्रामाणिकता और विशिष्ट पहचान को मजबूती मिलेगी।

नीतीश कुमार ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इन उत्पादों को जीआई टैग मिलने पर प्रसन्नता जताते हुए लिखा, ”नालंदा की बावन बूटी साड़ी एवं फैब्रिक, गया के पत्थरकट्टी स्टोन क्राफ्ट तथा भोजपुर की पीढ़िया पेंटिंग को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्राप्त होना प्रसन्नता का विषय है।”

उन्होंने कहा कि जीआई टैग प्राप्त होने से इन उत्पादों की प्रामाणिकता और विशिष्ट पहचान को मजबूती मिलेगी। इससे बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को देश-दुनिया में और अधिक प्रतिष्ठा प्राप्त होगी। पूर्व सीएम नीतिश कुमार ने इस उपलब्धि पर राज्य के सभी शिल्पकारों, बुनकरों, कलाकारों एवं संबंधित संस्थाओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं भी दी।

इधर, जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने इस उपलब्धि को लेकर खुशी जताते हुए कहा कि भोजपुर की पीढ़िया पेंटिंग, गया की पत्थरकट्टी स्टोन क्राफ्ट और नालंदा की मशहूर बावन बूटी साड़ी और कपड़े को जीआई टैग मिलना, पीढ़ियों से कारीगरों द्वारा संरक्षित कौशल, रचनात्मकता और परंपराओं की एक उचित मान्यता है।

उन्होंने कहा कि इससे बिहार के अनूठे हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों की पहचान मजबूत होगी और साथ ही आजीविका, उद्यमिता और वैश्विक मान्यता के नए रास्ते खुलेंगे। नालंदा जिले की प्रसिद्ध बावन बूटी बिहार की प्राचीन बुनकरी परंपरा का एक अद्वितीय उदाहरण है।

इस विशिष्ट वस्त्रकला में कपड़े पर 52 प्रकार के पारंपरिक बौद्ध एवं सांस्कृतिक प्रतीकों (बूटी) को हाथकरघे पर बुना जाता है। गया जिले के पत्थरकट्टी गांव की पत्थर शिल्पकला लगभग 300 वर्षों से अपनी उत्कृष्टता के लिए प्रसिद्ध है। यहां के कारीगर स्थानीय काले ग्रेनाइट पत्थरों से भगवान बुद्ध, भगवान महावीर, देवी-देवताओं तथा अन्य कलात्मक प्रतिमाओं का निर्माण करते हैं।

भोजपुर क्षेत्र की पिढ़िया पेंटिंग बिहार की लोक चित्रकला की एक विशिष्ट शैली है, जिसे मुख्यतः महिलाएं पारंपरिक पर्व-त्योहारों और सामाजिक अवसरों पर बनाती रही हैं। इस कला में प्राकृतिक रंगों एवं पारंपरिक प्रतीकों के माध्यम से लोक जीवन, पारिवारिक संबंधों, धार्मिक आस्थाओं तथा ग्रामीण संस्कृति का सजीव चित्रण किया जाता है।

एमएनपीएसके

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