पोटका हरिणा मेला 15 जून से, भोक्ताडांग लेकर गांव-गांव पहुंच रहे ग्रामीण, सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आगाज

पोटका : रजो संक्रांति के अवसर पर कोल्हान क्षेत्र के प्रसिद्ध पांच दिवसीय हरिणा मेला का शुभारंभ 15 जून से मुक्तेश्वर धाम मंदिर प्रांगण में होगा। मेले को लेकर क्षेत्र में धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।

परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना के बाद हरिणा मंदिर से भोक्ताडांग लेकर मंदिर समिति के सदस्य एवं ग्रामीण गांव-गांव जाकर लोगों को मेले में शामिल होने का आमंत्रण दे रहे हैं।

शनिवार को सैकड़ों ग्रामीण और मंदिर के पुजारी गाजे-बाजे के साथ भोक्ताडांग लेकर पोटका विधायक संजीव सरदार के उदाल स्थित आवास पहुंचे।

विधायक की अनुपस्थिति में उनके परिजनों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भोक्ताडांग का स्वागत किया और पूजा-अर्चना संपन्न कराई।

दशकों पुरानी परंपरा का निर्वहन

मंदिर के मुख्य पुजारी सह ग्राम प्रधान बज्रांकन दंडपात ने बताया कि मेले के शुभारंभ से तीन-चार दिन पहले भोक्ताडांग लेकर क्षेत्र के प्रमुख गांवों का भ्रमण किया जाता है। इस दौरान ग्रामीणों को मेले में शामिल होने का निमंत्रण दिया जाता है।

उन्होंने कहा कि यह परंपरा दशकों से चली आ रही है और आज क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।

इस अवसर पर विकास पंडा, लखी नायक, पोलटू सरदार, टेकेन दंडपात, लालमोहन पंडा, जवाहर लाल नायक, तरुण सरदार, देव पालित, पिंटू नायक समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

छऊ नृत्य के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत

शनिवार को हरिणा गांव में आयोजित छऊ नृत्य कार्यक्रम का उद्घाटन विधायक संजीव सरदार ने किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया।

बज्रांकन दंडपात ने बताया कि 14 जून को गोरियाभार, जामडाली और निशाघोट की रस्में संपन्न होंगी, जबकि 15 जून को पातभोक्ता के साथ मेले का विधिवत शुभारंभ किया जाएगा। यह मेला 20 जून तक चलेगा।

उन्होंने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में मेले में शामिल होकर आयोजन को सफल बनाने की अपील की।

संस्कृति संरक्षण का संदेश

मौके पर विधायक संजीव सरदार ने कहा कि हरिणा मेला कोल्हान की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है। ऐसे आयोजन हमारी लोक परंपराओं, सांस्कृतिक मूल्यों और सामाजिक एकता को सुदृढ़ करते हैं।

उन्होंने कहा कि यह मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्रीय पहचान और सांस्कृतिक गौरव का उत्सव है।

विधायक ने मंदिर समिति, ग्रामीणों और युवाओं से मेले के सफल आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाने तथा इस गौरवशाली परंपरा को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाने का आह्वान किया।

उन्होंने भरोसा दिलाया कि क्षेत्र की संस्कृति और आस्था से जुड़े आयोजनों के संरक्षण एवं विकास के लिए उनका सहयोग आगे भी जारी रहेगा।

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