जमशेदपुर सदर अस्पताल की व्यवस्थाओं पर उठे सवाल, महिला मरीज की मौत के बाद स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बढ़ी चिंता

==परिजनों ने इलाज में लापरवाही का लगाया आरोप

==आईसीयू, डायलिसिस व अन्य सुविधाओं के संचालन को लेकर भी उठ रहे प्रश्न

जमशेदपुर : पूर्वी सिंहभूम जिले के सदर अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और प्रबंधन व्यवस्था एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। फेब्रिकेटेड वार्ड में भर्ती एक महिला मरीज की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। मृतका के परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में विरोध जताया और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

जानकारी के अनुसार, रविवार रात फेब्रिकेटेड वार्ड में भर्ती आशिता नंदी की मृत्यु हो गई। परिजनों का आरोप है कि मरीज को समय पर समुचित उपचार नहीं मिला। उनका कहना है कि यदि आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं थी तो मरीज को उस वार्ड में भर्ती क्यों किया गया। उन्होंने रात्रि पाली में तैनात चिकित्सकीय व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं।

अस्पताल प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था पर चर्चा
मरीज की मौत के बाद अस्पताल के फेब्रिकेटेड वार्ड की कार्यप्रणाली को लेकर भी बहस तेज हो गई है। अस्पताल से जुड़े सूत्रों का दावा है कि कई महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं के संचालन और समन्वय को लेकर स्पष्ट जवाबदेही का अभाव है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि अस्पताल में चिकित्सकीय संसाधनों और मानवबल की कमी के कारण कई सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की ओर से अभी तक इस मामले में विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

दवाओं और उपकरणों की उपलब्धता पर भी प्रश्न
अस्पताल से जुड़े कुछ कर्मचारियों और मरीजों का कहना है कि कई विभागों में आवश्यक दवाओं, उपकरणों और उपभोग्य सामग्रियों की उपलब्धता को लेकर समय-समय पर समस्याएं सामने आती रही हैं। सूत्रों के अनुसार, ऑपरेशन कक्ष समेत कई इकाइयों में जरूरी संसाधनों की कमी की शिकायतें मिलती रही हैं।

इसी बीच अस्पताल में दवा खरीद और निविदा प्रक्रिया को लेकर पूर्व में उठी शिकायतों की जांच भी चर्चा का विषय बनी हुई है। प्रशासनिक स्तर पर जांच जारी होने की जानकारी है, हालांकि इसकी अंतिम रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है।

आईसीयू, डायलिसिस और एचडीयू सेवाओं को लेकर चिंता
जानकारों का कहना है कि अस्पताल की कुछ महत्वपूर्ण इकाइयों में विशेषज्ञ चिकित्सकों और तकनीकी कर्मियों की कमी महसूस की जा रही है। डायलिसिस सेवा के संचालन को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि तकनीकी कर्मियों की उपलब्धता प्रभावित होने से यह सेवा नियमित रूप से संचालित नहीं हो पा रही है।

वहीं अस्पताल में हाल ही में उच्च निर्भरता इकाई (एचडीयू) की शुरुआत की गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि नई सुविधाओं के सफल संचालन के लिए पर्याप्त चिकित्सकीय और तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना आवश्यक होगा।

स्वास्थ्य मंत्री के हस्तक्षेप की मांग
अस्पताल की वर्तमान स्थिति को लेकर विभिन्न सामाजिक और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों ने राज्य सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में संसाधनों, मानवबल और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है ताकि मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जा सके।

डीपीसी नियुक्ति को लेकर भी उठे सवाल
जमशेदपुर के स्वास्थ्य विभाग में जिला कार्यक्रम समन्वयक (डीपीसी) की नियुक्ति प्रक्रिया भी चर्चा में है। सूत्रों के अनुसार, दिसंबर 2025 में झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के अंतर्गत हुई नियुक्ति से जुड़े अनुभव प्रमाणपत्र को लेकर विवाद सामने आया था।

बताया जा रहा है कि चयनित अभ्यर्थी डॉ. अंकित कुमार के अनुभव प्रमाणपत्र पर संबंधित संस्था द्वारा आपत्ति दर्ज कराई गई थी। इसके बावजूद नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ी। बाद में वेतन स्वीकृति के दौरान इस विषय पर पुनः स्पष्टीकरण मांगा गया।

सूत्रों के अनुसार, इस मामले में स्वास्थ्य विभाग और आरोग्य सोसाइटी के बीच पत्राचार भी हुआ है। हालांकि अब तक वेतन भुगतान और नियुक्ति से जुड़े विवाद का अंतिम समाधान सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। बताया जाता है कि वेतन संबंधी अनिश्चितता के बीच संबंधित अधिकारी ने कार्यालय आना भी बंद कर दिया है।

स्वास्थ्य विभाग के जानकारों का मानना है कि नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े सभी तथ्यों को सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए, ताकि किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति न बने और प्रशासनिक पारदर्शिता बनी रहे।

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