जमशेदपुर : शहर के बागबेड़ा थाना क्षेत्र के नागाडीह गांव में 18 मई 2017 की रात बच्चा चोर की अफवाह पर उभरे जनसैलाब ने जो कहर बरपाया था, उसका फैसला आठ साल बाद आया है। जमशेदपुर कोर्ट ने गुरुवार को इस बहुचर्चित नागाडीह मॉब लिंचिंग मामले में पाँच आरोपियों को दोषी करार दिया है। वहीं, शेष आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।
अब सभी की नजरें 8 अक्टूबर 2025 पर टिकी हैं, जब प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विमलेश सहाय सजा का ऐलान करेंगे। पीड़ित परिवारों की माँग है कि दोषियों को फांसी दी जाए।
क्या था नागाडीह हत्याकांड?
18 मई 2017 की शाम जुगसलाई के रहने वाले उत्तम वर्मा, विकास वर्मा, उनकी दादी रामसखी देवी (76) और मित्र गंगेश गुप्ता किसी कार्य से नागाडीह पहुंचे थे। भीड़ ने बच्चा चोर समझकर उन्हें घेर लिया। पहचान पत्र माँगे गए, लेकिन उत्तम के पास आधार नहीं था। वह घर चला गया और एक घंटे बाद जब वह लौटे, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
जैसे ही चारों लोग गांव में दाखिल हुए, उन्मादी भीड़ ने ईंट-पत्थर और लाठी-डंडों से हमला कर दिया। मौके पर ही गौतम वर्मा और विकास वर्मा की मौत हो गई, वहीं रामसखी देवी ने 26 दिन बाद टीएमएच में दम तोड़ दिया। गंगेश गुप्ता की भी इलाज के दौरान मौत हुई।
दोषियों की सूची
कोर्ट ने जिन पाँच आरोपियों को दोषी ठहराया है, वे हैं:
राजाराम हांसदा (पूर्व मुखिया, मुख्य आरोपी)
रेंगो पूर्ति
गोपाल हांसदा
सुनील सरदार
तारा मंडल
इनमें राजाराम हांसदा घटना के तीसरे दिन से जेल में हैं। गरीब परिवार से आने के कारण उनकी जमानत नहीं हो सकी। आरोप है कि हमला करने वाला पहला व्यक्ति वही था, जो टांगी लेकर दौड़ा था।
दर्ज हुई थी बड़ी एफआईआर
27 नामजद और 300 अज्ञात लोगों के खिलाफ बागबेड़ा थाना में मामला दर्ज किया गया था।
तत्कालीन थाना प्रभारी थे आमिश हुसैन और विधि व्यवस्था की कमान थी डीएसपी बिमल कुमार के पास।
एफआईआर उत्तम वर्मा के बयान पर दर्ज की गई थी।
पीड़ित परिवार का बयान
पीड़ित परिवार कोर्ट के फैसले से असंतुष्ट हैं। उनका कहना है कि केवल पाँच को सज़ा देना पर्याप्त नहीं है। इतने बड़े कांड में और भी लोग शामिल थे। हम हाईकोर्ट में अपील करेंगे और चाहते हैं कि दोषियों को फांसी दी जाए।”
क्या कहते हैं कानून विशेषज्ञ?
जमशेदपुर के अधिवक्ता अमित तिवारी के अनुसार भीड़ हिंसा में सबसे बड़ी चुनौती सबूतों का अभाव होता है। यदि कोर्ट ने पाँच को दोषी माना है, तो यह एक मजबूत मैसेज है। लेकिन बरी हुए आरोपियों के खिलाफ अपील करना पूरी तरह जायज़ है।”
मॉब लिंचिंग: समाज के लिए खतरे की घंटी
नागाडीह हत्याकांड महज एक घटना नहीं, बल्कि भीड़तंत्र की उस मानसिकता का प्रतीक है, जिसमें अफवाहें सच से बड़ी हो जाती हैं। इस तरह की घटनाएं कानून व्यवस्था, सामाजिक सद्भाव, और मानवता तीनों के लिए एक गंभीर खतरा हैं।
आगे क्या
8 अक्टूबर को सजा पर फैसला
पीड़ित पक्ष करेगा हाईकोर्ट में अपील
मॉब लिंचिंग के खिलाफ फिर उठ सकती है राजनीतिक और सामाजिक बहस
