September 10, 2026
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Balen Shah Nepal: महज एक माह में दो-दो मंत्रियों को देना पड़ा इस्तीफा, सरकार पर संकट के संकेत

Balen Shah Nepal: महज एक माह में दो-दो मंत्रियों को देना पड़ा इस्तीफा, सरकार पर संकट के संकेत

• भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के आरोपों से घिरी सरकार

• पार्टी के भीतर खटपट की चर्चा • भारत-नेपाल संबंधों पर भी उठे सवाल

नई दिल्ली: नेपाल में प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार बने अभी एक महीना भी पूरा नहीं हुआ है, लेकिन इतने कम समय में ही सरकार विवादों में घिरती नजर आ रही है। महज 30 दिनों के भीतर दो मंत्रियों को इस्तीफा देना पड़ा है, जिससे नई सरकार की स्थिरता पर सवाल उठने लगे हैं।

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) को जनता ने भारी जनादेश देकर सत्ता में पहुंचाया था। खासकर जेन-जी आंदोलन के बाद बनी इस सरकार से लोगों को बड़े बदलाव की उम्मीद थी, लेकिन शुरुआती घटनाक्रम ने इन उम्मीदों को झटका दिया है।

27 मार्च 2026 को पदभार संभालने के बाद पहले ही 13वें दिन श्रम मंत्री दीपक कुमार शाह को अपनी पत्नी को पद दिलाने के आरोप में इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद 26वें दिन गृहमंत्री सूडान गुरुंग भी भ्रष्टाचार के आरोपों में पद छोड़ने को मजबूर हो गए।

काठमांडू के राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि पार्टी नेतृत्व के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री बालेन शाह और पार्टी प्रमुख रबी लामिछाने के बीच मतभेद उभरने लगे हैं। कहा जा रहा है कि सरकार गठन में बालेन शाह का दबदबा अधिक रहा, जिससे रबी लामिछाने के समर्थकों को अपेक्षित महत्व नहीं मिल पाया।

गृहमंत्री सूडान गुरुंग का इस्तीफा भी इसी आंतरिक खींचतान से जुड़ा माना जा रहा है। वहीं, जेन-जी आंदोलन को लेकर भी कुछ हलकों में संदेह व्यक्त किया जा रहा है।

भारत-नेपाल संबंधों को लेकर भी नई सरकार के कुछ फैसलों पर सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में लागू किए गए एक नियम के तहत भारत से खरीदे जाने वाले 100 नेपाली रुपये से अधिक कीमत के सामान पर कस्टम ड्यूटी लगाने का प्रावधान किया गया है।

सीमावर्ती इलाकों में इस फैसले का विरोध देखने को मिल रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इससे उनके पारंपरिक ‘रोटी-बेटी’ संबंध प्रभावित हो रहे हैं और बॉर्डर क्षेत्रों में असंतोष बढ़ रहा है।

सूत्रों का यह भी कहना है कि नेपाल में जेन-जी आंदोलन से लेकर वर्तमान राजनीतिक हालात तक की जानकारी भारतीय एजेंसियों को जरूर होगी, लेकिन उनकी चुप्पी भी कई सवाल खड़े कर रही है।

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