जमशेदपुर : जमशेदपुर में हवाई अड्डे की मांग को लेकर लंबे समय से विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता राजनीति कर रहे हैं। उनकी मांग का कितना असर हुआ यह तो झारखंड सरकार और केंद्र सरकार की गंभीरता से परिलक्षित हो रही है लेकिन इस मुद्दे को लेकर कोई गंभीर नहीं है। चाहे वह धालभूमगढ़ में प्रस्तावित एयरपोर्ट का मामला हो या फिर सोनारी हवाई अड्डे के विस्तार की बात हो। दोनों ही मामले मीडिया में सुर्खियां बटोरने में कामयाब रही पर हकीकत ठीक इसके उलट है। जरूरतमंद छात्र और कारोबारी को कुछ हासिल नहीं हुआ।
इसी कड़ी में शहर के औद्योगिक एवं व्यावसायिक विकास के लिए लंबे समय से लंबित धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना को शीघ्र शुरू करने की मांग को लेकर सिंहभूम चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा विरोध-प्रदर्शन का आयोजन किया जा रहा है। इससे पहले भी चेंबर ने इस मामले को उठाया था लेकिन असर नगन्य रहा।
चेंबर के अध्यक्ष Manav Kedia ने कहा कि धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना वर्षों से लंबित है, जबकि जमशेदपुर तथा कोल्हान क्षेत्र देश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में से एक है। एयरपोर्ट के अभाव में इस क्षेत्र की औद्योगिक, व्यापारिक तथा पर्यटन संभावनाएँ प्रभावित हो रही हैं। इसलिए भारत सरकार एवं झारखंड सरकार को इस परियोजना से संबंधित सभी शेष प्रक्रियात्मक एवं नियामकीय बाधाओं को तत्काल दूर कर निर्माण कार्य शुरू करना चाहिए तथा परियोजना की समयबद्ध कार्ययोजना सार्वजनिक करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जमशेदपुर एवं कोल्हान क्षेत्र के लोगों की वर्षों पुरानी सीधी हवाई संपर्क की मांग को अब और अधिक समय तक लंबित नहीं रखा जा सकता। एयरपोर्ट के शीघ्र निर्माण से झारखंड के साथ-साथ पश्चिम बंगाल और ओडिशा के सीमावर्ती क्षेत्रों में औद्योगिक विकास, व्यापार, पर्यटन और क्षेत्रीय संपर्क को नई गति मिलेगी।
चेंबर द्वारा 7 मार्च 2026 (शनिवार) को सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक पोस्टल पार्क, गोपाल मैदान के निकट एक दिवसीय विरोध-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा।
चेंबर के सभी पदाधिकारियों ने जमशेदपुर के सभी नागरिकों, व्यापारिक संगठनों, उद्योग जगत एवं सामाजिक संस्थाओं से अपील की है कि वे इस जनहित की मांग को मजबूत बनाने के लिए बड़ी संख्या में उपस्थित होकर इस शांतिपूर्ण आंदोलन को सफल बनाएं, ताकि धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना को शीघ्र धरातल पर उतारा जा सके।
देखना यह है कि इस आंदोलन को जमशेदपुर के सांसद, जमशेदपुर पूर्वी और पश्चिमी के विधायक, बहरागोड़ा, घाटशिला और जुगसलाई के विधायक का समर्थन मिलता है या फिर सिर्फ बयानबाजी तक ही आंदोलन थम जाएगा।
