- शिक्षा जगत में खोया गणित का महामनीषी , भोजपुर ने खोया अपना ‘ज्ञानपुरुष
जमशेदपुर/आरा : वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा के स्नातकोत्तर गणित विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त प्रोफेसर प्रो० डॉ. दिनेश राय का 23 नवंबर 2025 को निधन हो गया। 84 वर्ष की आयु में उनका निधन शिक्षा जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
उनका झारखंड से भी गहरा रिश्ता रहा है। उनकी बड़ी बेटी डॉक्टर पुष्पा कुमारी जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक (हिन्दी विभाग) हैं और दामाद डॉ विमलेश कुमार झारखंड सरकार में डॉक्टर हैं जो अभी जमशेदपुर के परसुडीह खासमहल स्थित सदर अस्पताल में पदस्थापित है।
प्रो० डॉ. दिनेश राय के निधन से शिक्षा जगत ने गणित का एक ऐसा रत्न को दिया है जिसकी भरपाई लंबे समय तक संभव नहीं।
गाँव छोटकी खड़ाव , थाना सहार, जिला भोजपुर बिहार के मूल निवासी डॉ. राय अपने सौम्य स्वभाव, गहन विद्वता और सेवा-भाव के कारण छात्रों, सहकर्मियों और समाज में विशेष सम्मान प्राप्त करते थे। सहजानंद ब्रहर्षि कॉलेज, आरा में गणित के प्रोफेसर एवं प्रभारी प्राचार्य के रूप में उनकी पहचान एक अनुशासित, व्यवहारकुशल और दूरदर्शी शिक्षाविद के रूप में रही। बाद में वे वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर गणित विभाग के विभागाध्यक्ष बने और वर्ष 2006 में सेवा निवृत्त हुए।
सहजानंद से वीकेएसयू तक का आलोकित सफर
डॉ. दिनेश राय का जीवन ज्ञान की साधना को समर्पित रहा। उन्होंने सहजानंद ब्रहर्षि कॉलेज, आरा में गणित के प्रोफेसर के रूप में अपना लंबा योगदान दिया और संस्थान के प्रभारी प्राचार्य के रूप में भी कार्य किया।
उनकी पहचान एक ऐसे शिक्षाविद् के रूप में थी, जो न केवल विषय का गहन ज्ञान रखते थे, बल्कि छात्रों के भविष्य को गढ़ने का भी जुनून रखते थे।
शिक्षा को बनाया समाजसेवा का माध्यम
डॉ. राय एक साधारण शिक्षक से कहीं अधिक थे; वह एक समाजसेवी और शिक्षा के सच्चे पहरेदार थे।
उनका हृदय ग्रामीण और गरीब छात्रों के लिए धड़कता था। इसी भावना के साथ उन्होंने दो डिग्री कॉलेजों की स्थापना की।
उनका उद्देश्य स्पष्ट था— गाँव-देहात के उन मेधावी छात्रों तक उच्च शिक्षा पहुँचाना जो आर्थिक तंगी के कारण वंचित रह जाते थे।
इन संस्थानों ने न केवल सैकड़ों युवाओं को शिक्षित किया, बल्कि स्थानीय लोगों को बड़े पैमाने पर रोजगार देकर क्षेत्र के आर्थिक उत्थान में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उनके निर्देशन में गणित के अनगिनत छात्रों ने पीएचडी की उपाधि प्राप्त की, जो आज देश-विदेश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और संस्थानों में डॉ. राय की ज्ञान-परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
गणित के महामनीषी, लेखक और समाजसेवी
गणित विषय के प्रकांड विद्वान डॉ. राय ने इस विषय पर कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखीं। उनकी लेखनी और शोध आज भी विश्वविद्यालयों में संदर्भ-ग्रंथ के रूप में उपयोग की जाते हैं।
भोजपुर जिले में उन्हें एक कुशल गणितज्ञ, संवेदनशील समाजसेवी और व्यवहारिक व्यक्तित्व के रूप में जाना जाता था।
वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के विज्ञान संकायाध्यक्ष सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में उल्लेखनीय योगदान दिया।
सादगी और संवेदना से भरा व्यक्तित्व
उनका जाना केवल एक परिवार का नुकसान नहीं, बल्कि ज्ञान जगत का अपूरणीय क्षति है। जीवनभर वे सादगी, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और करुणा के पर्याय बने रहे।
गणित के प्रकांड विद्वान: सरल और व्यवहारिक व्यक्तित्व
गणित विषय पर उनकी असाधारण पकड़ थी। वे इस विषय के प्रकांड विद्वान माने जाते थे, जिन्होंने छात्रों की सुविधा के लिए विषय पर अनेक महत्वपूर्ण पुस्तकें भी लिखीं।
भोजपुर जिले में उन्हें गणितज्ञ के अलावा एक अत्यंत व्यवहारिक और सहज व्यक्तित्व के रूप में जाना जाता था। उनकी सादगी, ईमानदारी, और कर्तव्यनिष्ठा उनके संपूर्ण जीवन की पूंजी रही।
ज्ञान व सेवा की मशाल थामे परिवार
डॉ. राय ने अपने परिवार को भी शिक्षा, चिकित्सा और राष्ट्र सेवा के मूल्यों से सींचा। उनका भरा-पूरा परिवार आज भी समाज के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सेवारत है:
बड़ी बेटी: सहायक प्राध्यापक (हिन्दी विभाग), जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय
दामाद: डॉक्टर, झारखंड सरकार
छोटी बेटी: साइंटिस्ट, IGIMS, पटना
छोटा दामाद: डॉक्टर, IGIMS, पटना
बड़ा बेटा शैलेश कुमार राय: चीफ इंजीनियर
छोटा बेटा: प्रिंसिपल, PMJ कॉलेज
बहुएं: डॉ. आरती कुमारी (सहायक प्राध्यापक, PMJ कॉलेज) और छोटी बहू (प्रिंसिपल, DD कॉलेज, आरा) भी शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
उनका परिवार उनके द्वारा स्थापित शिक्षा-संस्कारों का जीवंत प्रमाण है।
डॉ. दिनेश राय का भौतिक शरीर अब हमारे बीच नहीं है, लेकिन एक शिक्षक, लेखक, समाजसेवी और एक महान इंसान के रूप में उनका योगदान और उनकी प्रेरणा हमेशा भोजपुर की धरती और शिक्षा जगत को प्रकाशित करती रहेगी। भोजपुर की धरती हमेशा उन्हें एक ऐसे शिक्षक के रूप में याद रखेगी जिसने जीवनभर ‘ज्ञान’ को ही अपनी पूजा माना और ‘विद्यार्थियों’ को अपना परिवार।
