एनडीए में जश्न शुरू, तेजस्वी, खेसारी लाल, तेज प्रताप पीछे, मैथिली ठाकुर आगे
बिहार विधानसभा चुनाव : मतगणना के शुक्रवार को प्रारंभिक रुझानों के अनुसार सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने बहुमत के आंकड़े 122 को पार कर 196 से अधिक सीट पर बढ़त बना ली है। भजपा और जेडीयू के दफ्तरों में जश्न का माहौल। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शुक्रवार शाम दिल्ली स्थित भाजपा के कार्यालय में जाएंगे।
निर्वाचन आयोग के अनुसार, शुरुआती रुझान में राजग 196 से अधिक विधानसभा सीट पर और ‘इंडिया’ (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस) गठबंधन करीब 41 सीट पर आगे है। निर्णायक बढ़त के साथ ही एनडीए में जश्न शुरू हो गया है।
शुरुआती रुझान के अनुसार, ‘इंडिया’ गठबंधन के मुख्यमंत्री पद उम्मीदवार एवं राजद नेता तेजस्वी यादव राघोपुर सीट पर पीछे चल रहे हैं। मोहम्मद शहाबुद्दीन के बेटे एवं राष्ट्रीय जनता दल (राजद) उम्मीदवार ओसामा शहाब रघुनाथपुर सीट पर 725 मतों से आगे हैं और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के विकास कुमार सिंह पीछे हैं।
भाजपा उम्मीदवार उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी तारापुर सीट पर 2,690 मतों से आगे हैं जबकि राजद के अरुण कुमार पीछे हैं। उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा लखीसराय में आगे हैं। राजद प्रमुख लालू प्रसाद के बेटे और जेजेडी संस्थापक तेज प्रताप यादव महुआ सीट पर चौथे स्थान पर हैं। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के संजय कुमार सिंह इस सीट पर सबसे आगे हैं।
जमुई सीट पर भाजपा उम्मीदवार श्रेयसी सिंह अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी राजद के मोहम्मद शमसाद आलम से 2,539 मतों से आगे हैं। अन्य प्रमुख प्रत्याशियों में चर्चित लोकगायिका मैथिली ठाकुर आगे हैं। अधिकारियों के अनुसार, राज्य की 243 विधानसभा सीटों की मतगणना सुबह आठ बजे शुरू हुई, जिसमें आयोग के मानकों के अनुरूप सबसे पहले डाक मतपत्रों की गिनती की गई। ईवीएम की गिनती सुबह 8.30 बजे से शुरू हुई। दो चरणों में 6 और 11 नवंबर को सम्पन्न हुए बिहार चुनावों को राज्य के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार की महत्वपूर्ण राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा है।
बिहार विधानसभा चुनाव के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि मतदान के दिन किसी की भी मौत नहीं हुई और किसी भी निर्वाचन क्षेत्र में पुनर्मतदान की जरूरत नहीं पड़ी। आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले विधानसभा चुनावों में राज्य में हिंसा हुई, कुछ मौतें भी हुईं और कई निर्वाचन क्षेत्रों में फिर से चुनाव भी कराने पड़े थे। आंकड़ों के अनुसार, 1985 के चुनावों में 63 मौतें हुई थीं और 156 मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान का आदेश दिया गया था। साल 1990 के चुनावों के दौरान, चुनाव संबंधी हिंसा में 87 लोग मारे गए थे। साल 1995 में, तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त टी एन शेषन ने अप्रत्याशित हिंसा और चुनावी कदाचार के कारण बिहार चुनावों को चार बार स्थगित करने का आदेश दिया था। आंकड़ों के अनुसार, 2005 में हिंसा और कदाचार के कारण 660 मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान हुआ था। बिहार में इस साल दो चरणों में विधानसभा चुनाव हुए और इसके लिए मतगणना जारी है।
कांग्रेस को करारा झटका
बिहार में कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में करारा झटका लगते दिख रहा है और यहां तक कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार तथा विधायक दल (सीएलपी) के नेता शकील अहमद खान भी अपनी सीटों पर पीछे हैं। राजेश कुमार औरंगाबाद जिले की कुटुंबा और खान कटिहार जिले की कदवा विधानसभा सीट पर उम्मीदवार हैं। निर्वाचन आयोग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, कुटुंबा सीट पर राजेश कुमार, हम (सेक्युलर) के उम्मीदवार ललन राम से 7,288 वोटों से पीछे थे। वहीं, कदवा में सीएलपी नेता शकील अहमद खान जद (यू) प्रत्याशी दुलाल चंद्र गोस्वामी से 23,785 मतों से पीछे थे। कांग्रेस इस बार बिहार विधानसभा चुनाव में 61 सीटों पर मैदान में उतरी थी, जिनमें से केवल छह सीटों पर पार्टी उम्मीदवारों की बढ़त दर्ज करते दिखाई दे रही है। वर्तमान रुझानों के अनुसार, कांग्रेस उम्मीदवार सुरेंद्र प्रसाद वाल्मीकिनगर, मोहम्मद कमरुल होदा किशनगंज, मनोहर प्रसाद सिंह मनिहारी, अमीता भूषण बेगूसराय, अनिल कुमार विक्रम और मंगल राम चेनारी सीटों से आगे थे।
लालू यादव के बेटे तेज प्रताप महुआ विधानसभा सीट पर चौथे स्थान पर
निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर शुक्रवार अपराह्न डेढ़ बजे तक उपलब्ध रुझानों के अनुसार 10वें दौर की मतगणना के बाद राजद (राष्ट्रीय जनता दल) सुप्रीमो लालू प्रसाद के बड़े बेटे एवं जनशक्ति जनता दल प्रमुख तेज प्रताप महुआ सीट पर चौथे स्थान पर हैं। अपने पिता द्वारा राजद से निष्कासित किये जाने के बाद हाल में अपनी राजनीतिक पार्टी बनाने वाले तेज प्रताप (9,557) लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के संजय कुमार सिंह से 24,984 मतों से पीछे हैं। लोजपा (रामविलास) के सिंह को 34,541 वोट मिले, जबकि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के मुकेश कुमार रौशन (19,998 वोट) दूसरे और एआईएमआईएम (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन) के अमित कुमार (9,564 वोट) तीसरे स्थान पर बने हुए हैं। तेज प्रताप को 25 मई को राजद से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया था। इससे एक दिन पहले ही उन्होंने कथित तौर पर एक महिला के साथ ‘रिश्ते’ में होने की बात कबूल की थी। हालांकि, बाद में उन्होंने यह दावा करते हुए सोशल मीडिया ‘पोस्ट’ हटा दी थी कि उनका पेज ‘‘हैक” हो गया था। लालू प्रसाद ने भी तेज प्रताप के ‘‘गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार” के कारण उनसे नाता तोड़ लिया था।
लोगों का विश्वास जीतने में विफल रही जन सुराज, चुनावी नतीजों की समीक्षा होगी : पवन के. वर्मा
जन सुराज पार्टी (जेएनपी) के प्रवक्ता पवन के. वर्मा ने शुक्रवार को कहा कि पार्टी बिहार विधानसभा चुनाव में जनता का विश्वास जीतने में क्यों विफल रही, इसकी वह गंभीरता से समीक्षा करेगी। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों और अब तक के रुझानों में चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर की पार्टी कोई खास छाप छोड़ने में असफल नजर आ रही है जबकि चुनाव पूर्व उसने अपने संगठन को खड़ा करने के लिए जमीनी स्तर पर खासा प्रयास किया था। वर्मा की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत हासिल करता दिख रहा है। निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध ताजा आंकड़ों के अनुसार, राजग 187 विधानसभा सीटों पर आगे है, जबकि विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन केवल 49 सीटों पर ही बढ़त हासिल कर सकी है। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों से पता चलता है कि किशोर की पार्टी खाता खोलने के लिए भी संघर्ष कर रही है जबकि चुनाव से पहले उसने बड़े-बड़े दावे किए थे। वर्मा ने पीटीआई वीडियो से बातचीत में कहा कि जन सुराज ‘ईमानदारी और दृढ़ विश्वास’ के साथ चुनाव में उतरी थी लेकिन वह मतदाताओं का विश्वास जीतने में विफल रही। उन्होंने कहा, ‘‘हमने पूरी ईमानदारी के साथ काम किया, इस विश्वास के साथ कि बिहार को मौलिक परिवर्तन की आवश्यकता है। प्रयास में कोई कमी नहीं थी। लेकिन अगर हमने लोगों का विश्वास नहीं जीता है, तो हम इसका विश्लेषण करेंगे और इस पर विचार करेंगे।” वर्मा ने जोर देकर कहा कि पार्टी भले ही इस चुनाव में ‘लड़खड़ा’ गई लेकिन वह मुख्यधारा के दलों को जनता के मुद्दों पर सोचने के लिए मजबूर करने में सफल रही है। उन्होंने कहा, ‘‘एक बात हमें संतोष देती है कि रोजगार, पलायन, शिक्षा और भ्रष्टाचार मुक्त बिहार का जन सुराज का एजेंडा अब हर पार्टी के एजेंडे का हिस्सा होगा।” राजग के प्रदर्शन के बारे में वर्मा ने कहा कि चुनाव परिणाम अक्सर पूर्वानुमानों को खारिज कर देते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने कई चुनाव देखे हैं जहां परिणाम प्रत्याशित से अलग होते हैं। इसमें कोई संदेह नहीं है कि नीतीश जी को बिहार में स्वीकार्यता और सम्मान प्राप्त है। मैंने उनके साथ मिलकर काम किया है और हमें खुशी है कि उन्हें लोगों का जनादेश मिला है। हम उनके अच्छे होने की कामना करते हैं और उम्मीद करते हैं कि वह फिर से मुख्यमंत्री बनेंगे।” यह पूछे जाने पर कि क्या पार्टी अपने निराशाजनक प्रदर्शन पर आत्ममंथन करेगी, वर्मा ने कहा कि जन सुराज अपनी कमियों की समीक्षा करेगा, भले ही उसके ‘विजन’ और प्रयासों में कोई खामी नहीं रही। उन्होंने कहा, ‘‘इसमें कोई शक नहीं कि नतीजे निराशाजनक हैं। अब हम विश्लेषण करेंगे कि आगे क्या करने की जरूरत है।” चुनावी झटके के बाद प्रशांत किशोर के बिहार छोड़ने की अटकलों को वर्मा ने खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, ‘‘वह रहेंगे या जाएंगे यह उनका निजी फैसला है। लेकिन वह बिहार को नहीं छोड़ सकते हैं और न ही बिहार उन्हें छोड़ सकता है। एक बार पूरे परिणाम आने के बाद, वह भविष्य की रणनीति पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करेंगे।”
