155वें सृजन संवाद ने मनाई गई गुरुदत्त की जन्मशती

जमशेदपुर: यह निर्देशक-अभिनेता गुरुदत्त का शताब्दी वर्ष है। साहित्य, सिनेमा एवं कला संस्था सृजन संवाद ने उनकी जन्मशती ऑनलाइन मनाई। इस अवसर पर प्रसिद्ध पत्रिका फ़ेमिना की पूर्व एडिटर सत्या सरन की बहुचर्चित किताब टेन ईयर्स विद गुरुदत्त पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए मुंबई से स्वयं सत्या सरन उपस्थित थीं। अमरावती से नदीम खान ने उनसे संवाद किया। इसका संचालन डॉ. विजय शर्मा ने किया जबकि विषय प्रवेश इला भूषण ने कराया। पोस्टर तन्मय सोलंकी तथा लिंक वैभव मणि त्रिपाठी ने बनाया। मीडिया संचालन का भार अनुराग रंजन ने संभाला।

गुरुदत्त की अर्थपूर्ण फ़िल्मों को देखने, उनका अपने शिक्षण में प्रयोग करने, उन पर लिखे को पढ़ने आदि के अनुभवों को साझा करते हुए डॉ. विजय शर्मा ने विषय परिचय देते हुए बताया कि वह गुरुदत्त की फ़िल्मों का अपने शिक्षण में उपयोग करती हैं, साथ ही उन्होंने उन पर लिखा एवं संवाद भी किया है। वक्ताओं एवं फ़ेसबुक लाइव से जुड़े लोगों का उन्होंने स्वागत किया। फ़ेमिना की पूर्व एडिटर सत्या सरन गुरुदत्त के अलावा रितु नंदा, जगजीत सिंह, एसडी बर्मन एवं हरिप्रसाद चौरसिया की जीवनी लिखी है। उन्होंने कई किताबों का इंग्लिश में अनुवाद किया है। इंग्लिश के प्रोफ़ेसर रह चुके नदीम खान के परिचय में दिल्ली कॉलेज की प्रोफ़ेसर इला भूषण ने बताया कि वे कई साल तक इंडियन इंस्ट्यूट ऑफ़ मास कम्युनिकेशन, पश्चिमी क्षेत्र के डॉयरेक्टर रहे हैं। पढ़ाकू नदीम खान की अनुवाद की 25 किताबें पेंगुइन, ओरियंट ब्लैक स्वान आदि से प्रकाशित हैं, वे हिन्दी एवं मराठी से इंग्लिश में अनुवाद करते हैं।

फ़िर प्रश्नोत्तरी का लंबा सिलसिला चला। नदीन खान टेन ईयर्स विद गुरुदत्त किताब पढ़कर खूब तैयारी के साथ प्रश्न बना कर आए थे। सत्या सरन ने दो साल तक अरबार अल्वी के साथ हुई बातचीत के नोट्स लेकर पूरी किताब लिखी है। वे काम कर रही थीं, अत: केवल छुट्टी वाले दिन ही अल्वी से मिल पाती थीं। अरबार अल्वी गुरुदत्त के अंतरंग मित्र, सहयोगी एवं स्क्रिप्टराइटर थे, उन्होंने ‘साहिब बीबी और गुलाम’ फ़िल्म का निर्देशन किया है। उम्र दराज अल्वी गुरु दत्त से जुड़ी यादें सुना तो गए मगर किताब के लाउंच पर बीमार होने के कारण न आ सके, कुछ दिन बाद वे गुजर गए। उन्होंने सत्या सरन कर विश्वास किया, पाण्डुलिपि भी चेक नहीं की। बातचीत के दौरान गुरु दत्त के जीवन तथा उनके काम से जुड़े कई रोचक प्रसंग मिस सरन ने साझा किए। किताब में और भी कई महत्वपूर्ण बातें आई हैं, उन्होंने कहा, सिने-प्रेमी एवं सिने अध्येताओं को यह किताब अवश्य पढ़नी चाहिए। इस किताब का हिन्दी एवं मराठी अनुवाद भी उपलब्ध है।

नदीम खान ने जिन्हें नाज़ है… वे कहाँ हैं, का प्रभावपूर्ण पाठ किया, जिस सुन कर श्रोता/दर्शक वाह-वाह कर उठे। सत्या सरन ने न केवल नदीन खान के प्रश्नों का उत्तर दिया वरन फ़ेसबुक लाइव पर जुड़े लोगों के प्रश्नों का भी समुचित एवं विस्तारपूर्ण उत्तर दिया। संचालक एवं इला भूषण ने भी प्रश्न पूछे। यह रोचक कार्यक्रम डेढ़ घंटे चला। संचालन करते हुए डॉ. विजय शर्मा ने मिस सरन के उत्तरों पर टिप्पणी की। उन्होंने दोनों वक्ताओं, इला भूषण, दर्शक/श्रोताओं, मीडिया, लिंक संचालक का धन्यवाद किया। कार्यक्रम समाप्त करते हुए बताया गया कि सृजन संवाद की 156वीं कड़ी की घोषणा शीघ्र की जाएगी।

फ़ेसबुक लाइव के माध्यम से जमशेदपुर से करीम सिटी कॉलेज, मास कॉम विभागाध्यक्ष डॉ. नेहा तिवारी, साहित्य, कला फ़ाउंडेशन न्यासी डॉ. क्षमा त्रिपाठी, शिक्षिका वीणा कुमारी, लखनऊ से डॉ. मंजुला मुरारी, डॉ. राकेश पाण्डेय, गुजरात से डॉ. उमा सिंह, रानू मुखर्जी, अमरावती से अश्विन अलसी, दिल्ली से रक्षा गीता, इला भूषण, राकेश कुमार सिंह, उत्तराखंड से शशि भूषण बडोनी, बैंग्लोर से पत्रकार अनघा मारीषा, पुणे से सिने-इतिहासकार मनमोहन चड्ढ़ा आदि जुड़े। इनकी टिप्पणियों एवं प्रश्नों से कार्यक्रम और अधिक सफ़ल हुआ।

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