घाटशिला उपचुनाव: नामांकन के बहाने सियासी शक्ति प्रदर्शन, दोनों दलों ने दांव पर लगाई प्रतिष्ठा

जमशेदपुर : झारखंड की सियासत में घाटशिला विधानसभा सीट उपचुनाव अब केवल एक सीट भर का चुनाव नहीं रहा। प्रेस्टीज बैटल में बदल चुका यह उपचुनाव सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए साख का सवाल बन गया है। शुक्रवार को नामांकन के दिन भाजपा और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। दोनों ही दलों ने इसे महज औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन में तब्दील कर दिया।

झामुमो की ओर से सोमेश सोरेन ने भरा परचा, हेमंत सोरेन समेत महागठबंधन के नेता मौजूद
शुक्रवार को झामुमो प्रत्याशी सोमेश सोरेन ने भारी समर्थकों और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अगुवाई में नामांकन दाखिल किया। रांची में पहले ही इसको लेकर रणनीतिक बैठक की जा चुकी थी, और कोल्हान प्रमंडल के तमाम मंत्रियों, विधायकों एवं महागठबंधन के घटक दलों के नेताओं की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि झामुमो इस चुनाव को प्रतिष्ठा से जोड़ चुका है।

नामांकन के दौरान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, राजद के सत्यानंद भोक्ता, सीपीआई के महेन्द्र पाठक सहित कई दलों के नेता शामिल हुए। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि झामुमो इस चुनाव को महागठबंधन की एकजुटता का प्रदर्शन भी बना रहा है।

भाजपा से बाबूलाल सोरेन ने भरा नामांकन, मउभंडार में जनसभा कर दिखाई ताकत
उधर, भाजपा प्रत्याशी बाबूलाल सोरेन ने भी आज नामांकन पत्र दाखिल किया। इसके बाद मउभंडार स्थित एआईसीसी फुटबॉल मैदान में एक विशाल जनसभा आयोजित की गई, जिसमें भाजपा और सहयोगी दलों के शीर्ष नेता शामिल हुए।

इस जनसभा में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सह नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, आजसू प्रमुख सुदेश महतो, जदयू के विधायक सरयू राय, लोजपा-रामविलास के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र प्रधान, सांसद आदित्य साहू, सांसद विद्युत वरण महतो, मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल, नीलकंठ सिंह मुंडा सहित कई दिग्गज नेताओं की मौजूदगी रही। सभा के माध्यम से भाजपा ने यह संदेश देने की कोशिश की कि जनता का भरोसा अब भी उनके साथ है।

घाटशिला : सियासी गर्मी का केंद्र
पूर्वी सिंहभूम जिले की यह आदिवासी आरक्षित सीट भले भौगोलिक रूप से सीमित हो, लेकिन राजनीतिक महत्व राज्य स्तर पर काफी बड़ा है।

घाटशिला सीट पर झामुमो और भाजपा के बीच वर्षों से सीधा मुकाबला रहा है। अब जब यह सीट उपचुनाव के लिए खाली हुई है, दोनों दल इसे हार-जीत की नहीं, बल्कि जनता के जनादेश की कसौटी मान रहे हैं।

प्रेस्टीज की लड़ाई क्यों?
झामुमो के लिए: पार्टी यह दिखाना चाहती है कि सरकार में होने के बावजूद जनसमर्थन बना हुआ है, और महागठबंधन मजबूत है।
भाजपा के लिए: विपक्ष में रहते हुए अगर भाजपा यह सीट जीतती है तो यह सरकार की जनप्रियता पर सवालिया निशान होगा, और लोकसभा चुनाव 2024 के बाद की रणनीति को नई दिशा देगा।

वरिष्ठ पत्रकार राकेश कुमार का आकलन है कि 17 अक्टूबर के शक्ति प्रदर्शन ने यह साफ कर दिया है कि घाटशिला उपचुनाव अब सामान्य चुनाव नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा की लड़ाई और राजनीतिक भविष्य का ट्रेलर बन गया है। आने वाले दिनों में स्टार प्रचारकों की एंट्री, जनसभाएं, और जमीनी रणनीतियां इस चुनाव को और दिलचस्प बनाती जाएंगी।

Join Our Newsletter

यह भी पढ़ें

मालवीय नगर आग में जान बचाने वाले रोहित मुखिया को दिल्ली सरकार का सम्मान, 5 लाख सहायता और मुफ्त इलाज

नई दिल्ली, 18 जून (आईएएनएस)। मालवीय नगर में लगी भीषण आग की घटना के दौरान कई लोगों की जान बचाने वाले रोहित मुखिया के...

पश्चिम बंगाल अब जल शक्ति मंत्रालय की सभी प्रमुख परियोजनाओं में करेगा भागीदारी: सीएम सुवेंदु अधिकारी

कोलकाता, 18 जून (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल सरकार अब केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय से जुड़ी सभी जल परियोजनाओं में भाग लेगी। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने...

अभिमत

झारखंड राज्यसभा चुनाव से तय होंगे बड़े राजनीतिक संकेत

झारखंड की राज्यसभा सीटों पर 18 जून को होने वाला चुनाव कांग्रेस की राजनीतिक ताकत, इंडिया गठबंधन की एकता और विपक्षी रणनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विश्वसनीय पत्रकारिता के पुरोधा राधेश्याम अग्रवाल : जिनकी विरासत आज भी रोशन कर रही है मीडिया का मार्ग

अग्रवाल साहब ने केवल एक समाचार पत्र की स्थापना नहीं की, बल्कि उन्होंने इस क्षेत्र में पत्रकारिता की ऐसी मजबूत नींव रखी, जिस पर आगे चलकर पूरे मीडिया उद्योग का विस्तार हुआ।

ज़िद

संपादक की पसंद

स्वतंत्रता सेनानी ‘देशबंधु’ चितरंजन दास की पुण्यतिथि पर केंद्रीय मंत्रियों समेत भाजपा नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

नई दिल्ली, 16 जून (आईएएनएस)। भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रख्यात वकील, समाज सुधारक और राष्ट्रवादी नेता 'देशबंधु' चितरंजन दास की पुण्यतिथि पर केंद्रीय...

झारखंड: घाघीडीह सेंट्रल जेल का वीडियो वायरल, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

जमशेदपुर, 14 जून (आईएएनएस)। झारखंड के घाघीडीह सेंट्रल जेल की सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। त्रिस्तरीय सुरक्षा...

Feel like reacting? Express your views here!

यह भी

आपकी राय

अन्य समाचार व अभिमत