माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने जताई कड़ी आपत्ति, प्रशासनिक लापरवाही पर कसा शिकंजा
प्रमुख बिंदु:
जुलाई से दिसंबर 2024 तक शिक्षकों को नहीं मिला वेतन
7 अप्रैल 2025 को 12.73 करोड़ रुपये का आवंटन हुआ था
डीईओ चाईबासा और उनके कार्यालय पर निदेशालय ने जताई कड़ी आपत्ति
वेतन प्रमाणपत्र (UC) भी अब तक निदेशालय को नहीं भेजा गया
पूरे कार्यालय के वेतन निकासी पर तत्काल प्रभाव से रोक
जमशेदपुर। पश्चिमी सिंहभूम जिले के शिक्षकों को महीनों से लंबित वेतन का इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि वेतन भुगतान के लिए आवश्यक राशि पहले ही जारी की जा चुकी है। अब इस मामले में चाईबासा के जिला शिक्षा कार्यालय की कार्यशैली पर सवाल उठते दिख रहे हैं।
राज्य के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के अधीन माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट नाराजगी जताते हुए चाईबासा के जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) टोनी प्रेमराज टोप्पो और उनके कार्यालय के अन्य संबंधित अधिकारियों एवं कर्मियों के वेतन पर रोक लगाने का आदेश जारी कर दिया है। यह कार्रवाई शिक्षकों के जुलाई से दिसंबर 2024 तक के वेतन भुगतान में अनावश्यक विलंब को लेकर की गई है।
7 अप्रैल को जारी हुआ था 12.73 करोड़ का आवंटन
माध्यमिक शिक्षा निदेशक राजेश प्रसाद द्वारा जारी पत्र में बताया गया है कि 7 अप्रैल 2025 को डीईओ चाईबासा को वेतन भुगतान के लिए 12 करोड़ 73 लाख 23 हजार रुपये की राशि आवंटित की गई थी। इस राशि से 2024-25 के शैक्षणिक सत्र के शेष बकाया सहित सभी शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों का भुगतान किया जाना था।
निदेशालय का कहना है कि विभागीय स्तर से कई बार भुगतान के लिए निर्देश दिए गए, साथ ही भुगतान प्रमाणपत्र (UC) जमा करने को कहा गया, लेकिन डीईओ कार्यालय की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। न ही कोई स्पष्टीकरण निदेशालय को भेजा गया।
लापरवाही और मनमानी का मामला — निदेशक
माध्यमिक शिक्षा निदेशक राजेश प्रसाद ने इसे कर्तव्य के प्रति लापरवाही, उदासीनता और मनमानी का प्रतीक बताते हुए सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने आदेश में लिखा है कि शिक्षकों के वेतन में देरी न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि यह शिक्षक समुदाय के मनोबल को भी प्रभावित करता है।
कौन-कौन हुए वेतन रोक के दायरे में?
निदेशालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, डीईओ चाईबासा टोनी प्रेमराज टोप्पो, उनके कार्यालय के सभी लिपिक (क्लर्क), निकासी पदाधिकारी और व्ययन पदाधिकारी के वेतन निकासी पर अगले आदेश तक पूर्ण रोक लगा दी गई है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जब तक लंबित वेतन का भुगतान नहीं होता और संबंधित दस्तावेज निदेशालय को नहीं भेजे जाते, वेतन निर्गत नहीं किया जाएगा।
शिक्षकों में नाराजगी, प्रशासन पर उठे सवाल
इस पूरे मामले से जिले के हजारों शिक्षकों में गहरी नाराजगी है। शिक्षकों का कहना है कि वेतन के बिना परिवार चलाना मुश्किल हो गया है, और जब सरकार द्वारा बजट आवंटित कर दिया गया था, तो इतनी बड़ी लापरवाही प्रशासनिक लचरता को उजागर करती है।
