सिख समुदाय ने हर्षोल्लास के साथ मनाई लोहड़ी
गुरुद्वारे में विशेष दीवान सजाया गया और शबद-कीर्तन किया गया
प्रमुख बिंदु:
- पलामू के दो प्रमुख गुरुद्वारों में लोहड़ी का जश्न मनाया गया.
- शबद-कीर्तन और पारंपरिक अनुष्ठानों ने उत्सव के अवसर को चिह्नित किया।
- सिख समुदाय ने बधाइयां दीं और प्रसाद के रूप में मिठाइयां बांटीं.
मेदिनीनगर- नवाटोली चौक के निकट बेलवाटिका गुरुद्वारा एवं नामधारी गुरुद्वारा में कार्यक्रम आयोजित कर सिख समुदाय के लोगों ने सोमवार की शाम हर्षोल्लास के साथ लोहड़ी मनाई. उत्सव समारोहों में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियाँ शामिल थीं जो समुदाय को एक साथ लाती थीं।
शाम की शुरुआत एक विशेष दीवान से हुई, जहां गुरु ग्रंथ साहिब को सजाया गया और ज्ञानी सुंदर सिंह के नेतृत्व में स्थानीय रागी जत्था द्वारा शबद-कीर्तन किया गया। भक्तों ने शांति, समृद्धि और खुशी की प्रार्थना करते हुए पवित्र अलाव (पुग्गा) की परिक्रमा करने सहित पारंपरिक अनुष्ठानों में भाग लिया।
पारंपरिक समारोह उत्सव को उजागर करते हैं
जीवंत भागीदारी के साथ उत्सव देर रात तक जारी रहा। इस कार्यक्रम में पवित्र अलाव से जुड़े भक्ति भजनों और अनुष्ठानों का प्रदर्शन शामिल था। समुदाय के सदस्यों ने जलते हुए पुग्गा के चारों ओर बैंड संगीत की लय पर नृत्य किया, जिससे माहौल में खुशी का माहौल बन गया।
एकजुटता की भावना को चिह्नित करने के लिए मिठाई, तिलकुट और रेवड़ी से युक्त प्रसाद वितरित किया गया। उपस्थित लोगों ने एक-दूसरे को हार्दिक शुभकामनाएं दीं और लोहड़ी के महत्व पर विचार किया, जो सिख नव वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है।
समुदाय के सदस्यों द्वारा महत्वपूर्ण भागीदारी
इस मौके पर गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा कमेटी के अध्यक्ष सतबीर सिंह राजा और सदस्य गुरवीर सिंह गोलू, सरदार उपेन्द्र सिंह, हरजीत सिंह काकू समेत प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं। महिलाओं और बच्चों ने सक्रिय रूप से भाग लिया, जिससे उत्सव की समावेशिता और जीवंतता बढ़ गई।
सभा में भक्ति और सांस्कृतिक गतिविधियों का मिश्रण देखा गया, जिसने उपस्थित लोगों पर एक अमिट छाप छोड़ी। समुदाय ने एकता को बढ़ावा देते हुए परंपराओं के संरक्षण के महत्व पर जोर दिया।
