क्या धरती से विलुप्त हो जायेंगे पुरुष?
वाई क्रोमोसोम की संभावित विलुप्ति से मानव जाति के अस्तित्व पर संकट गहराया, लेकिन शोधकर्ताओं की नई खोज ने दी राहत की किरण।
वैज्ञानिक अध्ययन में वाई क्रोमोसोम के धीरे-धीरे समाप्त होने की पुष्टि हुई है, जिससे पुरुषों का अस्तित्व खतरे में है। हालांकि, अमामी स्पाइनी चूहों पर हुए शोध से उम्मीद बंधी है, जिन्होंने वाई क्रोमोसोम के बिना एक नया जीन विकसित कर लिया है। यह दिखाता है कि मानव जाति के लिए भी संभावित समाधान हो सकते हैं।

मानव जाति और अन्य स्तनधारी जीवों में लिंग निर्धारण करने वाले वाई क्रोमोसोम पर संकट आन पड़ा है। पूरी दुनिया में इस खबर ने हलचल मचा दी है कि मनुष्यों का वाई क्रोमोसोम विलुप्ति के कगार पर है और आने वाले कुछ मिलियन वर्षों के बाद Y क्रोमोजोम का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। अगर सच में ऐसा हुआ तो धरती पर पुरुष नहीं रहेंगे और सिर्फ महिलाएं बचेंगी। ऐसे में मानव संतति ही खत्म हो जाएगी।
ये बातें फिलहाल शोध और अनुमान पर आधारित हैं। लेकिन इसे पूरी तरह खारिज भी नहीं किया जा सकता। यह खबर निराश करने वाली है लेकिन इसी के साथ एक उम्मीद की किरण भी वर्ष 2022 में Amami spiny rats पर हुए एक अध्ययन के नतीजे ने दिखाई है। आइये इसे विस्तार से समझते हैं और आत्मावलोकन भी करते हैं।
हम सब ने हाई स्कूल में पढ़ा है कि इंसान में 46 गुणसूत्र (२३ जोड़े) होते हैं।
इनमें वाई क्रोमोसोम एक्स क्रोमोसोम की तुलना में छोटा होता है और उसमें जींस की संख्या भी तुलनात्मक रूप से कम होती है। इनमें से 22 जोड़े गुणसूत्र पुरुष और महिला में एक जैसे होते हैं। शेष दो क्रोमोजोम X और Y के नाम से जाने जाते हैं। महिलाओं में दो एक्स क्रोमोसोम होते हैं जबकि पुरुषों में एक और एक वाई क्रोमोसोम्स होते हैं।
पुरुषों में मौजूद यही वाई क्रोमोसोम लिंग निर्धारण के लिए जिम्मेदार होता है । यह क्रोमोजोम अपने साथ SRY gene रखता है। शोध अध्ययन में यह बात सामने आई है कि यही SRY (Sex determining Region Y) gene धीरे-धीरे खत्म हो रहा है।
क्रोमोसोम पर आए इस संकट से सिर्फ एक्स क्रोमोजोम्स बचेंगे और अंततः सिर्फ महिलाएं ही धरती पर बचेंगी। फिर तो मानव जाति का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा क्योंकि पुरुषों के अभाव में पीढ़ियां आगे कैसे बढ़ेंगी। लेकिन यह ध्यान देने की बात है कि इसी पृथ्वी पर कुछ प्रजातियां, जैसे सरीसृप प्रजातियां ऐसी भी हैं जिनमें सिर्फ मादा ही होती हैं और वह ही स्वतः बच्चों को जन्म दे देती हैं। क्या मानव जाति में भी ऐसा संभव होगा, यह सब विज्ञान के गर्भ में छुपी हुई बातें हैं।
यहां एक बात और बताना आवश्यक है कि सभी क्रोमोजोम्स में जींस की संख्या बराबर नहीं होती। उदाहरण के लिए, क्रोमोसोम नंबर एक में 2300 gene होते हैं लेकिन वाई क्रोमोसोम में सिर्फ 213 जींस होते हैं। जींस यानी डीएनए की पुड़िया। यह जींस ही इंसान की सारी जेनेटिक जानकारियां लेकर चलता है, सारी जेनेटिक जानकारियों का वाहक है। इंसान के features का सारा डेटा संग्रह gene के अंदर रहता है।
मिसाल के लिए, हमारी आंख का रंग कैसा होगा, नाक चपटी होगी या सीधी, यह gene ही तय करते हैं। इस प्रकार SRY gene ही यह निर्धारित करता है कि इंसान पुरुष बनेगा या महिला। यही gene, male characteristics को trigger करता है। एक पंक्ति में हमें व्याख्या करनी हो तो हम कहेंगे कि पहले कोशिका, कोशिका के अंदर न्यूक्लियस, न्यूक्लियस के अंदर जींस और जींस बने हैं बहुत सारे डीएनए से, डीएनए के अंदर nucleosome।
अब, आसन्न संकट के मूल में व्याप्त तथ्यात्मक जानकारी। 300 मिलियन वर्ष पहले वाई क्रोमोसोम में 1438 जीन हुआ करते थे। अब इनमें से 1393 gene खत्म हो चुके हैं। अगर यह दर बनी रहती है तो अब बचे 45 gene आने वाले 10 मिलियन वर्षों में खत्म हो जाएंगे। वैज्ञानिकों का मानना है कि वाई क्रोमोसोम 11 मिलियन वर्षों के अंदर पूरा खत्म हो जाएगा। बस यही है चिंता का असली कारण।
इस बीच जो उम्मीद की किरण सामने आई है उसकी भी चर्चा कर लेते हैं। “Proceedings of the National Academy of Sciences” journal की 2022 में प्रकाशित रिपोर्ट में यह उजागर हुआ है कि Amami spiny rats कहे जाने वाले चूहों ने Y क्रोमोसोम की अनुपस्थिति में एक वैकल्पिक gene विकसित कर लिया शरीर के अंदर और वे स्वयं में ही male rats को जन्म देने के लिए सक्षम हैं।
वैज्ञानिकों ने प्रयोग के दौरान चूहों के शरीर से SRY gene हटा दिया। लेकिन gene duplication की वजह से चूहों ने एक वैकल्पिक उपाय शरीर के अंदर पैदा कर लिया। बड़ा प्रश्न है कि क्या यही व्यवहार मानव शरीर के अंदर भी दोहराया जा सकेगा।
SRY gene की विलुप्त के लिए कौन से कारक जिम्मेदार है? प्रारंभिक अध्ययन में वैज्ञानिक यह बताते हैं कि प्रदूषण एक बड़ा कारक है और दूसरा, हमारी बिगड़ी हुई लाइफस्टाइल। दोनों ही समस्याओं को इंसान स्वयं दूर कर सकता है, किसी दूसरे की ओर उंगली दिखाने से कोई फायदा नहीं।

