श्रम विभाग ने टाटा मोटर्स जमशेदपुर को नोटिस जारी किया
पैरामेडिकल स्टाफ की वेतन स्थिरता और चिकित्सा लाभ की कमी की शिकायतों पर प्रबंधन को तलब किया गया
यूनियन ने आरोप लगाया कि अस्पताल में लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों के लिए ‘बंधुआ मजदूरी’ जैसी स्थिति है
जमशेदपुर – श्रम विभाग ने टाटा मोटर्स के जमशेदपुर प्रबंधन को कंपनी के अस्पताल में पैरामेडिकल स्टाफ के साथ व्यवहार को लेकर मिली शिकायतों के बाद नोटिस जारी किया है।
श्रम अधीक्षक-1 अविनाश ठाकुर ने संयुक्त युवा संघ द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के जवाब में यह नोटिस जारी किया।
यूनियन का आरोप है कि वर्षों की सेवा के बावजूद पैरामेडिकल कर्मचारियों को वेतन वृद्धि और चिकित्सा लाभ से वंचित रखा जाता है।
नोटिस में कहा गया है, “प्रबंधन को 6 जुलाई को श्रम विभाग के कार्यालय में सभी प्रासंगिक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।” “दोनों पक्षों की उपस्थिति में सुनवाई की जाएगी।”
संयुक्त युवा संघ के केंद्रीय अध्यक्ष रवि सिंह चंदेल का दावा है कि कंपनी में करीब 100 मेडिकल स्टाफ बिना किसी ठेकेदार की मदद के 15-20 साल से सीधे तौर पर कार्यरत हैं।
चंदेल ने कहा, “इन कर्मचारियों और उनके परिवारों को न तो चिकित्सा लाभ दिया जाता है और न ही उनके वेतन में वृद्धि की जाती है।” “वे मूलतः बंधुआ मजदूरों की तरह काम कर रहे हैं।”
यूनियन ने प्रबंधन पर इन श्रमिकों के प्रति तानाशाही और मनमाना रवैया अपनाने का आरोप लगाया है।
चंदेल ने कहा, “इस दमनकारी व्यवस्था के पीड़ितों की सुनने वाला कोई नहीं है।”
टाटा मोटर्स ने अभी तक इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
यह विवाद जमशेदपुर के औद्योगिक क्षेत्र में श्रमिकों और प्रबंधन के बीच चल रहे तनाव को उजागर करता है।
श्रम विभाग का हस्तक्षेप ऐसे संघर्षों में मध्यस्थता करने तथा श्रमिकों के अधिकारों को लागू करने में सरकार की भूमिका को रेखांकित करता है।
