असलम के साथ मिलकर पति की हत्या: प्यार की आजादी का और कितना दुष्परिणाम देखना होगा?

सोनाली मिश्रा

भोपाल से एक कथित प्यार की आजादी की ऐसी कहानी सामने आ रही है, जिसमें पति की हत्या पत्नी ने अपने आशिक असलम के साथ मिलकर कर दी। इस कहानी में महिला ने ही अपने पति की हत्या ही नहीं की अपितु उसकी गुमशुदा होने की रिपोर्ट भी दर्ज कराई और खुद ही आगे बढ़कर चिंता आदि भी व्यक्त की।

सुखी सेवनिया पुलिस ने एक विवाहिता और उसके आशिक को महिला के पति बबलू की हत्या के सम्बन्ध में हिरासत में लिया है।

पुलिस ने बताया कि महिला ने पुलिस के पास 21 फरवरी को यह रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसका पति बबलू लापता है। वह अपने मायके गयी थी और जब वह वापस आई तो उसका पति नहीं मिला था। पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई तो पता चला कि महिला के अवैध सम्बन्ध असलम के साथ हैं।

पुलिस को इस बात का भी पता चला कि बबलू को यह बात पता चल गयी थी कि उसकी बीवी का आशिक असलम है। इसलिए असलम के साथ उसने झगड़ा भी किया था। पुलिस को असलम पर संदेह हुआ और फिर पुलिस ने उसे पकड़कर कड़ाई से पूछताछ की। इस पर असलम ने सच बताया कि उसके और 14 साल के एक नाबालिग ने बबलू की हत्या कर दी थी।

और फिर नईम के साथ मिलकर बबलू की लाश को बोरे में बंद करके ६ किलोमीटर दूर फेंक दिया था। इस के बाद पुलिस ने सभी को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है।

यह घटना एक बार फिर से उसी समस्या पर प्रश्न उठाती है, कि आखिर यह प्यार करने की आजादी किसे क्या दे रही है? विवाह के बाद भी पत्नी किसी भी पुरुष के साथ दैहिक सम्बन्ध बना सकती है, यह तर्क देने वाले क्या इन हत्याओं के लिए उत्तरदायी नहीं हैं? विवाह के बाद भी दैहिक स्वतंत्रता मिलती रहनी चाहिए, यह कैसा तर्क है? इसी तर्क के चलते पति पत्नी के मध्य परस्पर आदर भाव समाप्त होता है एवं साथ ही वह पवित्र सम्बन्ध दरक जाता है, जिसके आधार पर यह पूरी सृष्टि टिकी हुई है।

अनिता और असलम को हिरासत में ले लिया गया है, परन्तु परिवार नष्ट हो गया है। ऐसा ही प्यार की आजादी का एक और मामला दिल्ली से आया था जिसमें एक महिला ने शायद इसी आजादी के चलते अपना पहला पति छोड़ दिया था और वह किसी मोहित के साथ लिव-इन में रह रही थी, उसी लिव-इन साथी ने उसे मौत उपहार में दी थी!

दिल्ली में रहने वाली मोनिका (नाम परिवर्तित) अपने पहले पति से अलग होकर मोहित के साथ लिव इन में रह रही थी और उसके दो बच्चे थे, जिनमें से एक उसका पहले पति से था तो दूसरा उसके लिव-इन साथी से था।

झगड़े का आरम्भ तब हुआ जब उसकी लड़ाई मोहित से हुई कि वह ड्रग्स का सेवन करके घर आया था।

पुलिस के अनुसार आरोपी मोहित ने महिला पर तारपीन का तेल डाल दिया था और फिर आग लगा दी। जिसके चलते वह जल गयी और इलाज के दौरान मर गयी। मोहित को हिरासत में ले लिया गया है।

यह दोनों ही घटनाएं कथित रूप से रहने की आजादी और प्यार करने की आजादी के दुष्परिणाम के रूप में सामने आई हैं।

यह बात समझनी ही होगी कि कोई भी स्वतंत्रता कभी भी बिना कर्तव्यबोध के नहीं आती है एवं संबंधों में ही परस्पर कर्तव्यबोध न हो तो आदर भाव ही समाप्त हो जाएगा। यही हो रहा है कि पति एवं पत्नी के मध्य परस्पर कर्तव्यबोध ही समाप्त किया जा रहा है। विमर्श ऐसा बनाया जा रहा है जिससे पारिवारिक मूल्य छीजते जा रहे हैं। ऐसी कविताएँ दिन भर सोशल मीडिया पर विचरण करती हैं जिनमें स्त्रियों को पीड़ित एवं पुरुषों को राक्षस के रूप में दिखाया जा रहा है।

जहां विमर्श यह बनाया जाना चाहिए था कि पति एवं पत्नी दोनों परस्पर एक इस सम्बन्ध के प्रति निष्ठावान रहकर एक दूसरे का आदर करें तो वहां वोकिज्म के चलते विमर्श ही नहीं बल्कि माननीय न्यायपालिका द्वारा भी कहीं  न कहीं ऐसे नियम क़ानून बना दिए जा रहे हैं, जिनके चलते पति एवं पत्नी का साझा विमर्श टूटकर अकेला और लिव-इन वाला विमर्श बन रहा है।

कई बार महिलाओं को यह लगता है कि उन्हें कानून से प्रश्रय मिल जाएगा फिर चाहे वह कितना भी जघन्य अपराध कर लें! कई बार ऐसा भी देखा गया है कि वह अपनी रक्षा में बनाए गए विभिन्न कानूनों का दुरूपयोग भी करती हैं।

लिव-इन में रहना कहने के लिए आजादी है, परन्तु आजादी किससे? और क्यों? यह प्रश्न भी अब करना अनिवार्य है क्योंकि यदि लिव-इन में वह रह रही है तो वह उन तमाम सामाजिक दायरों से परे होकर रह रही है जो समाज द्वारा अघोषित रूप से निर्धारित किए गए हैं। फिर ऐसे में उसके साथ कुछ भी गलत होने पर एक प्रकार की जो सामाजिक सुरक्षा मिलनी चाहिए, वह नहीं मिल पाती है।

प्यार की आजादी या फिर लिव-इन की आजादी के चलते हाल ही में उत्तर प्रदेश में आराधना को भी अपनी जान देनी पड़ी थी, एवं इसी प्यार की आजादी के चलते निक्की यादव भी असमय ही भगवान को प्यारी हो गयी थी। अब बहुत आवश्यक है कि गिरते हुए पारिवारिक मूल्यों पर बात हो, चर्चा हो क्योंकि परिवार अर्थात गृहस्थी ही एक सफल राष्ट्र का निर्माण कर सकती है!

(यह स्टोरी हिंदू पोस्ट की है और यहाँ साभार पुनर्प्रकाशित की जा रही है.)

(यह आलेख लेखक के व्यक्तिगत विचारों, दृष्टिकोणों और तर्कों को व्यक्त करता है। कॉलम और लेखों में व्यक्त किये गये विचार किसी भी तरह से टाउन पोस्ट, इसके संपादक की राय या इसकी संपादकीय नीतियों या दृष्टिकोण को इंगित नहीं करते हैं.)

Join Our Newsletter

यह भी पढ़ें

‘शोले’ के मशहूर डायलॉग ‘आधे इधर जाओ, आधे उधर जाओ,’ ममता बनर्जी पर फीट बैठता है : कीया घोष

कोलकाता, 10 जून (आईएएनएस)। भाजपा की नेता और प्रवक्ता कीया घोष ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कई...

विदेशी फंडिंग मामले में न्यूजक्लिक और प्रबीर पुरकायस्थ को दिल्ली हाईकोर्ट से राहत, एफआईआर और ईसीआईआर रद्द

नई दिल्ली, 11 जून (आईएएनएस)। विदेशी फंडिंग से जुड़े बहुचर्चित मामले में न्यूज पोर्टल न्यूजक्लिक और उसके एडिटर-इन-चीफ प्रबीर पुरकायस्थ को दिल्ली हाईकोर्ट से...

अभिमत

विश्वसनीय पत्रकारिता के पुरोधा राधेश्याम अग्रवाल : जिनकी विरासत आज भी रोशन कर रही है मीडिया का मार्ग

अग्रवाल साहब ने केवल एक समाचार पत्र की स्थापना नहीं की, बल्कि उन्होंने इस क्षेत्र में पत्रकारिता की ऐसी मजबूत नींव रखी, जिस पर आगे चलकर पूरे मीडिया उद्योग का विस्तार हुआ।

जमशेदपुर से पर्यावरण चेतना का 22-23 मई को होगा नया शंखनाद

बसंत कुमार सिंह ​सभ्यता के विकास और आधुनिकता की अंधी दौड़ में हमने जिन दो प्राकृतिक संपदाओं को सबसे अधिक दांव पर लगाया है, वे...

ज़िद

संपादक की पसंद

विशाखापत्तनम स्टील प्लांट हादसा : मृतकों की संख्या बढ़कर 9 हुई

विशाखापत्तनम, 10 जून (आईएएनएस)। विशाखापत्तनम स्टील प्लांट में सोमवार को हुए हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर नौ हो गई है। बुधवार को...

ईडी की बड़ी कार्रवाई: मिजोरम- म्यांमार और त्रिपुरा-बांग्लादेश सीमा पर छापेमारी, करोड़ों की मनी लॉन्ड्रिंग का खुलासा

आइजोल, 8 जून (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मिजोरम, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में चार स्थानों पर एक साथ छापेमारी...

Feel like reacting? Express your views here!

यह भी

आपकी राय

अन्य समाचार व अभिमत