September 11, 2026
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रांची में सीएम आवास घेरने निकले ‘झारखंड आंदोलनकारियों’ को पुलिस ने रोका, विरोध में भूख हड़ताल पर बैठे लोग

रांची में सीएम आवास घेरने निकले ‘झारखंड आंदोलनकारियों’ को पुलिस ने रोका, विरोध में भूख हड़ताल पर बैठे लोग

रांची, 10 जून (आईएएनएस)। अलग झारखंड राज्य के गठन के लिए चले लंबे आंदोलन में भाग वाले लोगों ने बुधवार को अपनी मांगों को लेकर रांची में शक्ति प्रदर्शन किया। झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के बैनर तले राज्य के विभिन्न जिलों से पहुंचे आंदोलनकारियों ने मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें सिदो-कान्हो पार्क के पास बैरिकेडिंग कर रोक दिया। इसके बाद आंदोलनकारी सड़क पर धरने पर बैठ गए।

ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक मांदर की थाप के साथ मोरहाबादी मैदान से निकले आंदोलनकारियों का कहना था कि झारखंड राज्य के निर्माण के लिए वर्षों तक संघर्ष करने वाले लोगों को आज भी अपेक्षित सम्मान और अधिकार नहीं मिले हैं। वे राजकीय मान्यता, सम्मानजनक पेंशन, मुआवजा तथा आश्रितों के लिए सरकारी नौकरी और रोजगार की मांग कर रहे हैं।

मोर्चा के प्रधान सचिव पुष्कर महतो के नेतृत्व में आयोजित प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार उनकी मांगों को लंबे समय से नजरअंदाज कर रही है। उनका कहना था कि अलग राज्य के आंदोलन में हजारों लोगों ने भागीदारी की और कई लोगों ने बलिदान दिया, लेकिन राज्य गठन के 25 वर्ष बाद भी आंदोलनकारियों की स्थिति संतोषजनक नहीं है।

प्रदर्शन के दौरान कुछ समय के लिए आंदोलनकारियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें आगे बढ़ने से रोका गया और सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि वे किसी विशेष सुविधा की नहीं, बल्कि अपने योगदान की आधिकारिक पहचान और सम्मान की मांग कर रहे हैं।

आंदोलनकारी नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य के विभिन्न जिलों से रांची आने वाले कुछ लोगों को रास्ते में रोका गया और कुछ को हिरासत में लिया गया। हालांकि प्रशासन की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

आंदोलन को और तेज करने के लिए 17 आंदोलनकारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। आंदोलनकारियों ने कहा कि झारखंड केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि लंबे संघर्ष और बलिदान का परिणाम है। इसलिए राज्य निर्माण में भूमिका निभाने वाले लोगों की मांगों पर त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए।

एसएनसीएसके

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