जामताड़ा : झारखंड के जामताड़ा सदर अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था की कथित लापरवाही एक बार फिर सवालों के घेरे में है।
केलाही गांव निवासी पांच माह की गर्भवती आदिवासी महिला प्रीति हांसदा की हालत समय पर डॉक्टर नहीं मिलने के कारण बिगड़ गई। परिजनों का आरोप है कि पूरी रात अस्पताल में कोई डॉक्टर इलाज के लिए नहीं पहुंचा, जिसके बाद महिला को निजी क्लीनिक ले जाना पड़ा, जहां गर्भपात कराना पड़ा।
जानकारी के अनुसार, मिहिजाम थाना क्षेत्र के केलाही गांव निवासी प्रीति हांसदा को शनिवार रात करीब 10 बजे अचानक ब्लीडिंग होने लगी। इसके बाद परिजन उन्हें इलाज के लिए सदर अस्पताल लेकर पहुंचे। पर्ची कटवाकर भर्ती कराने के बाद महिला को बेड तो मिल गया, लेकिन पूरी रात इलाज के लिए कोई डॉक्टर नहीं पहुंचा।

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में रातभर कोई महिला डॉक्टर मौजूद नहीं थी। वे लगातार अस्पताल कर्मियों और नर्सों से डॉक्टर बुलाने की गुहार लगाते रहे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। ड्यूटी पर मौजूद एएनएम और जीएनएम ने डॉक्टर के लिखित परामर्श के अभाव में दवा या इंजेक्शन देने में असमर्थता जताई। इस दौरान महिला की हालत लगातार बिगड़ती रही और रक्तस्राव जारी रहा।
रविवार सुबह करीब सात बजे तक डॉक्टर नहीं पहुंचने पर परिजनों ने महिला को गंभीर स्थिति में एक निजी क्लीनिक में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान गर्भपात कराना पड़ा। फिलहाल महिला की स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है।
मामले को लेकर आकिब जावेद खान और समानत मरांडी ने आरोप लगाया कि समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण गर्भपात हुआ। उन्होंने कहा कि यदि इलाज में और देरी होती तो महिला की जान भी जा सकती थी। उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्वास्थ्य मंत्री के गृह क्षेत्र में भी अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं की कमी गंभीर चिंता का विषय है।
वहीं, शिव प्रसाद मिश्र ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है और पूरे प्रकरण की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
