जमशेदपुर : भाजपा जमशेदपुर महानगर अध्यक्ष की कुर्सी पर सोनारी निवासी संजीव सिन्हा की ताजपोशी की चर्चाएं तेज होते ही महानगर भाजपा में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। बुधवार की रात करीब आठ मंडल अध्यक्ष अपने-अपने समर्थकों के साथ बिष्टुपुर स्थित स्थानीय सांसद विद्युत वरण महतो के आवास पर पहुंचे और जोरदार विरोध दर्ज कराया।
विरोध कर रहे नेताओं का आरोप है कि संजीव सिन्हा को अध्यक्ष बनाए जाने के पीछे सांसद का प्रत्यक्ष हस्तक्षेप है और संगठन की आंतरिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया को दरकिनार किया जा रहा है। इस घटनाक्रम के बाद भाजपा महानगर इकाई में अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है।
नामांकन की औपचारिकता, पहले से तय माना जा रहा नाम
इधर, भाजपा जमशेदपुर महानगर जिलाध्यक्ष के चयन के लिए औपचारिक रूप से नामांकन प्रक्रिया अपनाने का निर्णय लिया गया है। नामांकन लेने के लिए प्रदेश से दो वरिष्ठ पदाधिकारी — प्रदेश महामंत्री मनोज सिंह और पर्यवेक्षक विरंची नारायण — जमशेदपुर आने वाले हैं। दोनों के ठहरने के लिए सर्किट हाउस में कमरा आरक्षित कराया गया है।
जानकारी के अनुसार, दोनों नेता एक-दो दिनों में जमशेदपुर पहुंचेंगे, नामांकन की प्रक्रिया पूरी कराएंगे और इसके अगले ही दिन नए जिलाध्यक्ष के नाम की घोषणा कर दी जाएगी।
एक ही नामांकन की संभावना, संजीव सिन्हा का नाम सबसे आगे
पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस बार केवल एक ही नामांकन दाखिल होने की संभावना है, जो जिला उपाध्यक्ष संजीव सिन्हा करेंगे। ऐसे में उनके जिलाध्यक्ष बनने को लगभग तय माना जा रहा है। भाजपा के अंदरखाने में यह भी चर्चा है कि नामांकन की प्रक्रिया महज औपचारिकता भर है और मौजूदा समीकरण में संजीव सिन्हा का नाम पहले ही तय हो चुका है।
हालांकि, जिस तरह से आठ मंडल अध्यक्षों ने खुलकर विरोध का रुख अपनाया है, उससे यह साफ हो गया है कि संगठन के भीतर इस फैसले को लेकर गहरी नाराजगी है और आने वाले दिनों में यह विवाद और तूल पकड़ सकता है।
रायशुमारी पर उठ रहे सवाल
गौरतलब है कि इससे पहले जिलाध्यक्ष चयन के लिए रायशुमारी कराई गई थी। अब जब नामांकन की प्रक्रिया अपनाई जा रही है, तो संगठन के भीतर यह सवाल उठ रहा है कि जब अंततः नामांकन के जरिए ही फैसला होना था, तो रायशुमारी कराने की जरूरत क्यों पड़ी।
भाजपा के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, यदि रायशुमारी को आधार बनाया जाता तो वर्तमान जिलाध्यक्ष सुधांशु ओझा का दोबारा चुना जाना तय माना जा रहा था। बताया जाता है कि रायशुमारी में वे पहले स्थान पर थे, जबकि दूसरे स्थान पर अमित अग्रवाल और तीसरे स्थान पर संजीव सिन्हा का नाम था। हालांकि कुछ नेता दूसरे और तीसरे स्थान को लेकर अलग-अलग दावे भी कर रहे हैं।
सूत्रों का कहना है कि प्रदेश स्तर पर दो शीर्ष नेताओं के बीच सहमति नहीं बन पाने के कारण मामला केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचा और वहीं से अंतिम निर्णय की रूपरेखा तय की गई।
बंगाल से लौटकर आएंगे प्रदेश नेता
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रदेश महामंत्री मनोज सिंह ने बताया है कि वे और विरंची नारायण फिलहाल पश्चिम बंगाल जा रहे हैं, जहां राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ बैठक प्रस्तावित है। वहां से लौटने के बाद वे जमशेदपुर आएंगे और नामांकन प्रक्रिया पूरी कराएंगे।
अब देखना यह है कि बढ़ते विरोध के बीच पार्टी नेतृत्व अपने फैसले पर कायम रहता है या फिर संगठन की नाराजगी को देखते हुए किसी नए विकल्प पर विचार किया जाता है। फिलहाल इतना तय है कि भाजपा महानगर की राजनीति में उबाल आ चुका है।

