रांची के कारोबारी ने बेच दिया 100 करोड़ का अवैध कफ सिरप, रांची के 2 और वाराणसी के 26 थोक विक्रेताओं के खिलाफ मुकदमा
रांची : वाराणसी में कोडीन फास्फेटयुक्त कफ सिरप की अवैध बिक्री करने वाले एक विशाल सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है। इसकी जड़ें रांची तक जुड़ी हुई मिली है।
जांच में पता चला है कि रांची स्थित थोक दवा कंपनी मेसर्स शैली ट्रेडर्स ने उत्तर प्रदेश के 93 थोक विक्रेताओं को अवैध रूप से लगभग 100 करोड़ रुपए की प्रतिबंधित फेन्सीडील (Phensedyl) कफ सिरप की सप्लाई की है। इन 93 थोक विक्रेताओं में अकेले वाराणसी के 26 दवा विक्रेता शामिल हैं। यह सिंडिकेट कफ सिरप का इस्तेमाल नशीले पदार्थ के रूप में करने वालों को अवैध रूप से दवा उपलब्ध करा रहा था।
इस बड़े खुलासे के बाद, ड्रग इंस्पेक्टर जुनाब अली ने तत्काल कार्रवाई करते हुए शनिवार देर शाम कोतवाली थाने में 28 दवा विक्रेताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। जिसमें मुख्य रूप से शुभम जायसवाल और उसके पिता भोला प्रसाद के नाम शामिल हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए, पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है और अब सभी नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए प्रशासन तेजी से तलाश में जुट गई है।
मालूम हो कि मध्य प्रदेश और राजस्थान में कोडीन फास्फेट युक्त कफ सिरप से बच्चों की हुई मौत के बाद औषधि प्रशासन विभाग लगातार कफ सिरप के स्टॉक की जांच में जुटा हुआ था। इस दौरान उन्हें खबर मिली कि वाराणसी में रांची के मेसर्स शैली टेडर्स की तरफ से 2023-25 में ऐबट हेल्थ केयर से करीब 89 लाख रुपये की फेंसीडील कफ सिरप की खरीदी की गई।
उसके बाद शैली ट्रेडर्स के भोला प्रसाद और उसके बेटे शुभम जायसवाल ने वाराणसी सहित प्रदेश में दवा के 93 थोक व्यापारियों को 100 करोड़ रुपये की कफ सिरप की सप्लाई की। इसमें केवल वाराणसी के 26 मेडिकल स्टोरों पर करीब 50 करोड़ रुपए की कफ सिरप सप्लाई की गई थी।
वाराणासी में इस अभियान का नेतृत्व खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के आयुक्त के द्वारा किया गया था, जिसमें जांच के बाद इसकी खबर मिली। काबिलेतारीफ यह कि जहां विक्रेताओं के पास से विक्रय का कोई रिकॉर्ड ही नहीं था। इसके बाद टीम के द्वारा रांची के 2 और वाराणसी के 26 दवा के थोक विक्रेताओं के खिलाफ कोतवाली थाने में मुकदमा दर्ज किया गया।
नकली दवा बेच लोगों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे थे कारोबारी
झारखंड की राजधानी रांची और उत्तर प्रदेश के वाराणसी के दवा कारोबारियों की अवैध कारोबार में संलिप्तता गंभीर मामला। सबसे चिंताजनक बात यह है कि पिछले दो साल से नकली दवा बनाने का काम चल रहा था, लेकिन पुलिस व प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी। इन खुलासों से पता चलता है कि रांची, वाराणसी ही नहीं देश के कई शहरों में दोयम दर्जें की दवाएं बिक रही है। इस तरह से मरीजों के जीवन के साथ खिलवाड़ हो रहा है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) भी इसको लेकर चिंता जता चुका है।
