घाटशिला में झामुमो के सोमेश चंद्र सोरेन जीते, भाजपा के बाबूलाल सोरेन को 38 601 मतों से किया पराजित

जमशेदपुर : घाटशिला विधानसभा उपचुनाव 2025 में, झामुमो ने एक बार फिर ‘मईया सम्मान योजना’ और भावनात्मक लहर के सहारे शानदार जीत दर्ज की है। झामुमो उम्मीदवार सोमेश चंद्र सोरेन ने भाजपा के उम्मीदवार बाबूलाल सोरेन को बड़े अंतर से पराजित किया, यह साबित करते हुए कि जीत की डोर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के हाथों में मजबूती से टिकी हुई है। पृष्ठभूमि भी कुछ इसी तरह की थी। कई बार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, उनकी पत्नी विधायक कल्पना सोरेन ने घाटशिला में चुनावी सभा को संबोधित किया। हालांकि भाजपा ने भी अपनी ताकत झोंकी थी। भाजपा के पक्ष में भी कई दिग्ग्जों ने भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में चुनावी सभा को संबोधित किया था। झामुमो के सोमेश चंद्र सोरेन को 104936 वोट मिले जबकि भाजपा के बाबूलाल सोरेन को 66335 वोट मिले। सोमेश ने बाबूलाल को कुल 38 601 मतों से पराजित किया। अालम यह था कि पहले राउंड से लेकर आखिरी तक झामुमो प्रत्याशी आगे ही रहे।

घाटशिला उपचुनाव में कुल 13 उम्मीदवार चुनावी दंगल थे। इनमें प्रमुख बीजेपी के बाबूलाल सोरेन,झारखंड मुक्ति मोर्चा के सोमेश चंद्र सोरेन ,जेएलकेएम के रामदास मुर्मू,पीपुल्स पार्टी ऑफ इंडिया-डेमोक्रेटिक के पार्वती हांसदा ,भ्रष्ट आदिवासी पार्टी के पंचानन सोरेन के अलावा परमेश्वर टुडू, श्रीलाल किस्कू, मानस राम हांसदा, नारायण सिंह, विकास हेम्ब्रम, बसंत कुमार टोपनो, मनोज कुमार सिंह, और रामकृष्ण कांती थे।

घाटशिला के उपचुनाव में भावनात्मक लहर का साथ सबसे ज्यादा झारखंड मुक्ति मोर्चा को मिला। सहानुभूति का गेम तो चंपई सोरेन ने भी अपने पुत्र बाबूलाल सोरेन के पक्ष में यह कह कर बहाना चाहा कि हेमंत सोरेन ने उन्हें बैल कहा। यह कह कर काफी आंसू भी बहाए पर जनता पर जादू झामुमो का चला। ऐसे कई कारण रहे जिसने झामुमो के उम्मीदवार को जीत का दामन थमा दिया।

झामुमो की जीत के कारण :

1.घाटशिला उप चुनाव का परिणाम सामने आ गया।झामुमो के उम्मीदवार सोमेश सोरेन ने भारी मतों के अंतर से चुनावी जंग अपने नाम किया। यह जीत उन्हें यूं ही नहीं मिली बल्कि झामुमो सरकार के किए गए कार्यों और बेहतर सुशासन के नाम मिला। इसके अलावा भी कई कारण हर जो जीत के कारण बने।

2.इस उपचुनाव में भावना के रथ पर घाटशीला की जनता सवार दिखी। दरअसल शिक्षा मंत्री रहे रामदास सोरेन के मृत्यु के बात उठी सिंपैथी की लहर ने सोमेश सोरेन की जीत का मार्ग प्रशस्त कर दिया। झारखंड सरकार के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी रामदास सोरेन का योगदान का ख्याल कर उनके पुत्र सोमेश सोरेन को उनकी विरासत सौंप दी। इसका काफी सकारात्मक प्रभाव पड़ा।

3.घाटशिला को विकसित करने में रामदास सोरेन का बड़ा हाथ रहा। इसका भी असर जीत में रहा होगा। रामदास सोरेन ने तीन बार घाटशिला का प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 2009,2019 और 2024 के विधानसभा चुनाव में जीत कर घाट शीला के लिए जो काम किए उसका प्रभाव भी सोमेश सोरेन को जीताने का काम किया।

4. हेमंत सोरेन सरकार का ऐसा कोई कारनामा भी सामने नहीं आया जिससे सरकार की छवि पर कोई दाग दिखता। इस का भी लाभ सोमेश सोरेन को मिला। और वे बीजेपी उम्मीदवार बाबूलाल सोरेन पर भारी पड़े।

5.सोमेश सोरेन की मां का संबोधन भी कम भावुक करने वाला नहीं था। इस संबोधन में लफ़्ज़ कम आशु ज्यादा निकल रहे थे। इस से भावना का एक अच्छा मूव तैयार हुआ और सोमेश सोरेन ने जीत का दामन थामा।

6.मईया सम्मान का भी कम प्रभाव नहीं रहा होगा। इस योजना पर हेमंत सोरेन ने झारखंड विधानसभा की जंग जीत ली थी यह तो एक विधानसभा का सवाल था।

मतगणना- राउंड 20 के नतीजे

1. बाबूलाल सोरेन, भाजपा- 66335

2. सोमेश चंद्र सोरेन, झामुमो- 104936

3. पंचानन सोरेन, भारत आदिवासी पार्टी (BAP) – 1047

4. पार्वती हांसदा, पीपुल्स पार्टी ऑफ इंडिया(डेमोक्रेटिक) – 387

5. रामदास मुर्मू, जेएलकेएम- 11563

6. नारायण सिंह, निर्दलीय प्रत्याशी- 197

7. परमेश्वर टुडू, निर्दलीय- 153

8. बसंत कुमार तोपनो, निर्दलीय- 129

9. मनसा राम हांसदा, निर्दलीय प्रत्याशी- 907

10. मनोज कुमार सिंह, निर्दलीय- 369

11. रामकृष्ण कांति माहली, निर्दलीय- 340

12. विकास हेम्ब्रम, निर्दलीय- 918

13. डॉ. श्रीलाल किस्कू, निर्दलीय- 1503

14. NOTA- 2768

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