September 7, 2026
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जमशेदपुर

निजी स्कूलों पर कसेगा शिकंजा, उपायुक्त की दो टूक -नहीं हो मनमानी फीस वृद्धि

निजी स्कूलों पर कसेगा शिकंजा, उपायुक्त की दो टूक -नहीं हो मनमानी फीस वृद्धि

फीस रसीद में ट्यूशन फीस, विकास शुल्क, परिवहन शुल्क, परीक्षा शुल्क का स्पष्ट उल्लेख हो

अब स्कूल प्रबंधन किसी बुक स्टोर, विशेष दुकान से किताबें व यूनिफार्म के लिए बाध्य नहीं करेगा

शिकायत मिलने पर संबंधित विद्यालय के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी

विद्यालय प्रबंधन शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में प्रशासन का सहयोग करें

जमशेदपुर : उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने निजी स्कूलों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि सभी निजी विद्यालय राज्य सरकार द्वारा निर्धारित नियमों एवं दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही फीस वृद्धि करें। किसी भी परिस्थिति में अनियमित या मनमानी फीस वृद्धि नहीं हो।

पूर्वी सिंहभूम जिले में संचालित निजी विद्यालयों में फीस संरचना को पारदर्शी, न्यायसंगत एवं नियमों के अनुरूप बनाए रखने के उद्देश्य से उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय कमिटी की बैठक हुई। बैठक में शिक्षा विभाग के पदाधिकारी एवं अन्य संबंधित उपस्थित रहे।

उपायुक्त ने निर्देशित किया कि प्रत्येक निजी विद्यालय में विधिवत रूप से गठित फीस निर्धारण कमिटी के सभी सदस्यों के नाम, पदनाम एवं संपर्क संख्या विद्यालय परिसर में प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित किए जाएं, ताकि अभिभावकों को आवश्यक जानकारी सहजता से उपलब्ध हो सके। इससे शिकायत निवारण की प्रक्रिया भी अधिक सुलभ और प्रभावी बनेगी।

इसके अतिरिक्त, सभी विद्यालयों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया कि फीस रसीद में प्रत्येक मद (हेड) का स्पष्ट उल्लेख किया जाए। जैसे—ट्यूशन फीस, विकास शुल्क, परिवहन शुल्क, परीक्षा शुल्क आदि। इससे अभिभावकों को यह जानकारी स्पष्ट रूप से प्राप्त होगी कि किस मद में कितनी राशि ली जा रही है, जिससे किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो।

उपायुक्त ने विशेष रूप से यह भी कहा कि कोई भी विद्यालय प्रबंधन अभिभावकों को किसी विशेष दुकान या बुक स्टोर या स्कूल से ही किताबें, यूनिफॉर्म या अन्य सामग्री खरीदने के लिए बाध्य नहीं करेगा।

अभिभावकों को अपनी सुविधा एवं पसंद के अनुसार कहीं से भी सामग्री खरीदने की स्वतंत्रता होगी। यदि इस प्रकार की कोई शिकायत प्राप्त होती है तो संबंधित विद्यालय के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि जिला प्रशासन द्वारा समय-समय पर विद्यालयों की निगरानी की जाएगी तथा प्राप्त शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। उपायुक्त ने सभी विद्यालय प्रबंधन से अपेक्षा की कि वे शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में प्रशासन का सहयोग करें और अभिभावकों के साथ पारदर्शी एवं जिम्मेदार व्यवहार अपनाएं।

आखिरकार देर से ही जागी राज्य सरकार। लंबे समय से निजी स्कूलों के खिलाफ अभिभावक, राजनीतिक दल और स्वयंसेवी संगठन प्रशासन से शिकायत कर रहे थे लेकिन अबतक कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।

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